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भीगे धान की वजह से क्रय केंद्रों पर खरीद की रफ्तार धीमी

प्रदेश में धान की सरकारी खरीद की बोहनी तो हो गई लेकिन खरीद रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। सरकारी खरीद केन्द्रों पर सन्नाटा है जबकि खरीद शुरू हुए पन्द्रह दिन से अधिक समय हो गया है। कारण यह है कि धान की जो भी आवक हो रही है उसमें नमी तय मानक से ज्यादा है। खाद्य विभाग के अफसरों के मुताबिक अभी तक 180 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। यह सारी खरीद राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज में हुई है। अब तक धान की आवक सबसे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होती रही है।

परन्तु पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में अभी तक धान नहीं खरीदा गया है। खाद्य विभाग के अफसरों का कहना है कि पिछले दिनों हुई भारी वर्षा के कारण धान भीग गया है। खाद्य विभाग की पिछले दिनों हुई समीक्षा बैठक में बरेली के आरएफसी ने बताया था कि धान तो आना शुरू हो गया है लेकिन भीगा हुआ। खाद्य विभाग का जो मानक है उसमें 17 फीसदी तक नमी मान्य है जबकि मण्डी में आने वाले धान की नमी 22 फीसदी से ज्यादा है।

इसलिए सरकारी केन्द्र खरीद नहीं रहे हैं। उधर, प्रमुख सचिव खाद्य जैकब थामस ने बताया है कि धान खरीद केन्द्रों पर किसानों को धान बेचने के लिए जोतबही लाना जरूरी होगा। जोतबही फोटोयुक्त न होने पर वास्तविक किसान की पहचान के लिए कोई फोटोयुक्त पहचान पत्र भी लाना होगा।

उन्होंने बताया कि धान खरीद के बाद केन्द्र प्रभारी द्वारा धान बिक्री की तारीख, मात्र, खरीद केन्द्र का नाम जोतबही के अंतिम पृष्ठ पर अनिवार्य रूप से अंकित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक अक्टूबर से शुरू धान खरीद 28 फरवरी तक जारी रहेगी।

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