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जान सकेंगे आयुव्रेदिक उत्पादों की गुणवत्ता

च्यवनप्राश, आँवला का मुरब्बा, बेल का हलुआ, अनार का शरबत, सोंठ व मेथी से तैयार दर्द निवारक जसे आयुव्रेदिक उत्पादों व हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता सही है या नहीं। डिब्बे या रेपर पर लिखी मात्रा के अनुरूप उसमें उत्पाद है या नहीं, उसमें किसी दूसरी चीा की मिलावट तो नहीं है। कंपनियों के इस ह्यखेल से आप बच सकते हैं। उसे पकड़ सकते हैं। बस, आपको ह्यइंडियन फार्माकोपिया कमीशन यानी आईपीसी की सील देखनी होगी। छह महीने इंतजार करिए, बाजार में आईपीसी की मोहर वाले हर्बल और आयुव्रेदिक उत्पाद बाजार में उपलब्ध होने लगेंगे। आईपीसी द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र आईएसआई मानक के बराबर होगा। कमीशन ने, गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी सीएसआईआर की चार प्रयोगशालाओं कम्रश: सीडीआरआई, एनबीआरआई, सीमैप और आईआईआईएम जम्मू को दी है। भारत में पहली बार आयुव्रेदिक और हर्बल उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए ऐजेंसी गठित की गई है। सोमवार को एनबीआरआई में आईपीसी की बैठक में इस सम्बंध में कई फैसले लिए गए। शुरू में अति महत्वपूर्ण 108 वनस्पतियों से तैयार किए जाने वाले आयुव्रेदिक व हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता परखी जाएगी। इसमें च्वनप्राश, मुरब्बा, शरबत, रंग, हर्बल लोशन और दूसरी अन्य चीजें शामिल हैं। एनबीआरआई के निेदेशक डॉ. राकेश तुली ने बताया कि अभी तक आयुव्रेद और हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता परखने के लिए कोई सरकारी एजेंसी नहीं थी। सिर्फ एलोपैथ दवाओं की गुणवत्ता देखी जा रही है। कंपनियाँ रेपर और डिब्बे में क्या भरकर बेच रहीं हैं इसकी सही जानकारी उपभोक्ता को नहीं मिलती। इसे देखते हुए इंडियन फार्माकोपिया कमीशन ने एलोपैथ की तर्ज पर आयुव्रेद और हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता जाँचने के लिए अलग से एजेंसी बनाई है। शुरू में 108 वनस्पतियों से तैयार होने वाले महत्वपूर्ण उत्पादों को तैयार किया जाएगा। चारों प्रयोगशालाएँ मिलकर काम करेंगी। सीडीआरआई उत्पाद के रासायनिक पहलू को देखेगा और एनबीआरआई व सीमैप बॉटनिकल स्टैंडर्ड पर नजर रखेगा। डॉ. तुली का कहना है कि बाजर में अधिक प्रचलित हर्बल व आयुव्रेदिक उत्पाद पहले तैयार कर लिए जाएँगे। उसे स्टोर कर लिया जाएगा। जो कंपनी आयुव्रेदिक और हर्बल उत्पाद बनाना चाहेंगी वह कमीशन के स्टैंडर्ड को ले सकती हैं। उन्हें यह बताया जाएगा कि किस उत्पाद के लिए क्या मानक हैं? उत्पाद कैसे तैयार किया जाए? जो कंपनी मानक के अनुरूप उत्पाद तैयार करेगी, उसकी गुणवत्ता परख कर प्रमाण दिया जाएगा। सोमवार को हुई बैठक में क्रूड ड्रग एंड हर्बल प्रोडक्ट कमेटी आफ इंडियन फार्माकोपिया कमीशन के चेयरमैन डॉ.डीबीए नारायण समेत सीएसआईआर की चारों प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिक व अधिकारी मौजूद थे।

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