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नस्ली भेदभाव पर भारतीय मूल की बैरिस्टर ने दावा ठोका

भारतीय मूल की एक बैरिस्टर ने ब्रिटेन में नस्लभेद के मुआवजे के तौर पर अपने बैरिस्टर चैंबर्स पर तीन करोड़ 30 लाख पौंड का दावा किया है। आयशा बिजलानी नामक इस बैरिस्टर ने अपने चैंबर के प्रमुख पर नस्ली भेदभाव का आरोप लगाया है। बैरिस्टर ने चैंबर्स प्रमुख के विधिक क्लकरें पर साफ तौर पर साजिश रचने और हाई प्रोफाइल और फायदे वाले कई विधिक मामलों से उसे वंचित रखने का आरोप लगाया है।

बैरिस्टर्स चैंबर विधिक फर्म, कंपनियां या कोई अलग विधिक संगठन नहीं होते बल्कि ये कई बैरिस्टरो का सहकारी संघ या स्वनियोजित बैरिस्टरों का संघ होता है। आयशा ने एक नियोजन पंचाट के समक्ष अपना मामला रखा। उन्होंने कहा कि फोर न्यू स्क्वायर चैंबर में नस्ली संस्कृति में काम होता था। आयशा ने यहां 16 वर्षों तक काम किया।
    
आयशा ने सेंट्रल लंदन एंपलायमेंट ट्रिब्यूनल के समक्ष कहा कि मेरे नस्ल और जन्मस्थान के आधार पर वहां के क्लर्क मुझे साफ तौर पर नापसंद करते थे। वरिष्ठ क्लर्क लिज्जी वाइजमैन लोगों को काम देते थे उन्हें चैंबर्स के सदस्यों के प्रति क्लकरें के इस नस्लभेदी व्यवहार, आक्रामकता और दुर्भावना के बारे में पता था लेकिन उन्होंने उनकी सराहना की और क्लकरें ने अपना काम जारी रखा। आयशा ने कहा कि नस्ल और मूल के आधार पर वरिष्ठ बैरिस्टरों ने भी नकारात्मक भावना रखी।

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