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नई पीढ़ी की सोच और चुनौतियों का समागम

पहला सेशन - नई पीढ़ी की सोच

नीतीश कुमारः

1 मार्च 1951 को जन्मे नीतीश 24 नवंबर 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं। यह उनकी दूसरी पारी है इससे पहले वे 3-10 मार्च 2000 तक 7 दिन के लिए राज्य के 29वें मुख्यमंत्री रहे चुके हैं। 1974 में जेपी आंदोलन से जुड़ने वाले नीतीश 1985 में पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए। 1987 में वे युवा लोकदल के अध्यक्ष बने, 1989 में वे जनता दल के महासचिव बनने के साथ ही 9वीं लोकसभा के लिए भी चुने गए। केन्द्र सरकार में कृषि और रेल मंत्रालय संभाल चुके नीतीश की छवि पिछले चार साल में बिहार के बदलते स्वरूप की छवि बन गई है।

दीपांकर भट्टाचार्यः

दिसंबर 1960 में असम के गुवाहाटी में एक रेल कर्मचारी के घर जन्में दीपांकर  की पढ़ाई रामकृष्ण मिशन विद्यालय नरेन्द्रपुर में हुई और वे 1979 में हायर सेकेंडरी में प्रथम आए थे। बाद  में वे सीपीआई(माले) में आ गए। दिसंबर 1987 में दीपांकर को सीपीआई (माले) की सेंट्रल कमेटी का मेंबर और पोलित ब्यूरो में चुना गया। 1975 और 1998 में उन्हें पार्टी का महासचिव चुना गया।

शत्रुघन सिन्हाः

15 जुलाई 1946 को पटना में जन्में शत्रुघन सिन्हा ने फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया-पुणे (ftii) से एक्टिंग का कोर्स किया। 1970-80 के दौर में बॉलीवुड़ के चोटी के कलाकारों में रहे शत्रु को अपने खास अंदाज के लिए शॉट गन के नाम से भी जाना जाता है। जेपी आंदोलन से प्रेरणा लेकर शत्रुघन सिन्हा ने राजनीति में आने का फैसला किया। 80 के दशक में जब वे अपने एक्टिंग करियर के शिखर पर थे तब उन्होंने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया। केन्द्र में स्वास्थ्य व शिपिंग के मंत्रालय संभाल चुके शत्रुघन सिंहा 2009 के आम चुनाव में पटना साहिब से लोकसभा चुनाव जीते हैं।

शकील अहमदः

2 जनवरी 1956 में जन्मे यह कांग्रेसी नेता 14वीं लोकसभा में बिहार की मधुबनी लोकसभा क्षेत्र से चुने गए हैं। शकील अहमद ने मुजफरपुर के एसके मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है। पहली बार 1985 में विधायक चुने एक शकील अहमद 1990 और 2000 में भी विधानसभा के लिए चुने गए। 1998, 2004 और 2009 में शकील लोकसभा के लिए चुने गए।

श्री आनंद:

सुपर थर्टी के संस्थापक और युवा गणितज्ञ आनंद कुमार बिहार की पहचान बन गये हैं। हाल ही में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स के 2009 के संस्करण में उनका नाम शामिल किया गया है। उन्होंने सुपर थर्टी के तहत 210 बच्चों को पढ़ाया और इनमें से 182 बच्चे आईआईटी में अपनी प्रतिभा के जौहर दिखा रहे हैं। उनके किए गए कार्यो को देखते हुए धीरू भाई अंबानी फाउंडेशन से रियल हीरो अवार्ड मिला। फिल्म रंग दे बसंती के स्पेशल शो पर आमिर खान ने उन्हें सम्मानित किया। आईआईएम ने व्याख्यान के लिए लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के साथ उन्हें भी बुलाया। अल जजीरा और डिस्कवरी चैनलों ने आनन्द पर विशेष फिल्में बनाई। पटना के चांदपुर बेला की तंग गलियों में रहने वाले आनन्द आज फ्रांस, अमेरिका और इंगलैंड तक में चर्चित है। उन्होंने ऐसे बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग देनी शुरू की जो पैसे के अभाव में आईआईटी की तैयारी नहीं कर पाते थे। इसे सुपर थर्टी का नाम दिया। वे हर वर्ष जांच परीक्षा के माध्यम से पूरे राज्य के 30 छात्रों का चयन करते हैं। इन छात्रों को वे आईआईटी की जांच परीक्षा के लिए तैयार करते हैं। इन छात्रों से वे कोई भी शुल्क नहीं लेते हैं। मात्र यही नहीं उनके रहने और खाने की भी व्यवस्था भी आनन्द ही करते हैं। इसके लिए वे सरकार अथवा किसी दूसरे संस्थान से भी कोइ आर्थिक मदद नहीं लेते। इन सात वर्षो में कई बार सुपर थर्टी के सभी तीस बच्चे आईआईटी की जांच परीक्षा में सफल हुए हैं।


दूसरा सेशन - हमारी चुनौतियां

लालू प्रसाद यादवः
बिहार के गोपालगंज में 1948 में एक गरीब परिवार मे जन्में लालू प्रसाद यादव ने राजनीति की शुरूआत जयप्रकाश आंदोलन से की, तब वे एक छात्र नेता थे। वे वकालत भी कर चुके हैं। 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद पहली बार लोकसभा पहुंचे, तब उनकी उम्र 29 साल थी। 1980 से 1989 तक वे दो बार विधानसभा के सदस्य रहे और विपक्ष के नेता पद पर भी रहे। 1990 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। 1995 मे भी वे भारी बहुमत से विजयी रहे। लगातार 15 साल तक बिहार की सत्ता लालू प्रसाद यादव के पास रही। यूपीए सरकार में रेलमंत्री रहते हुए उन्होंने भारतीय रेल को मुनाफे की पटरी पर पहुंचाया। फिलहाल राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद लोकसभा से सांसद है।

एनके सिंहः
पूर्व आईएएस ऑफिसर नंद किशोर सिंह वर्तमान में बिहार से राज्यसभा के सदस्य हैं। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री की। 1964 में वे बिहार कैडर से आईएएस बने। भारत सरकार में आज एनके सिंह के पास कई राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पद हासिल हैं। वह भारत के शीर्ष अधिकारियों में से एक हैं। अब तक वे वित्त सचिव, योजना आयोग के सदस्य, प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव जैसे कई अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं।  

 
प्रकाश झाः
27 फरवरी, 1952 को बिहार के पश्चिमी चंपारण में जन्में प्रकाश झा आज एक जाने-माने फिल्म डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और स्क्रीनप्ले राइटर हैं। उन्हें दामुल (1984), मृत्युदंड (1997) और गंगाजल (2003) जैसी राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर बनी फिल्मों के लिए काफी तारीफ मिल चुकी है। प्रकाश झा को फेस आफ्टर स्ट्रोम (1984) और सोनल (2002) जैसी डॉक्यूमेंट्री के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है। वे चंपारण से 2004 और पश्चिमी चंपारण से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन दोनों बार उन्हें निराशा ही मिली। फिलहाल वे 'प्रकाश झा प्रोडक्शन' नाम से एक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी चलाते हैं। 


शिवानंद तिवारीः
बिहार के भोजपुर जिले में जन्में शिवानंद तिवारी आज राज्यसभा में इस क्षेत्र की नुमाइंदगी करते हैं। वे 1996 और 2000 में बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। 2008 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया। शिवानंद तिवारी संयुक्त संसदीय समिति, वित्त सदस्यीय समिति, गृह मंत्रालयों की परामर्श समिति के सदस्यों के तौर पर भी काम कर रहे हैं।

शैबाल गुप्ता:

शैबाल गुप्ता बिहार के चर्चित अर्थशास्त्री हैं। वे एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सदस्य सचिव हैं और ए.एन. सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान से भी जुड़े रहे हैं। बिहार की अर्थव्यवस्था को लेकर उन्होंने कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। खासकर बिहार के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को लेकर किए गए उनके काम को काफी चर्चा मिली है। वे राज्य भूमि सुधार आयोग और कॉमन स्कूल सिस्टम कमीशन से भी जुड़े रहे हैं। अभी बिहार सरकार के पीपुल्स फाइनेंस के निदेशक के रूप में भी बिहार की अर्थव्यवस्था पर काम कर रहे हैं। सूबे के आर्थिक सर्वेक्षण में भी उन्होंने सहयोग किया है।

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