DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कानून व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते अपराधी

यूपी-बिहार की धरती को भारत की राजनीति की खेती भी कहा जाता है। बिहार ने देश को कई बड़े-बड़े नेता और आईएएस, आईपीएस अफसर दिए हैं। लेकिन राज्य की कानून व्यवस्था की अराजकता ने ही राज्य में उद्योग धंधों को पनपने नहीं दिया, जिस कारण सरकारी और निजी निवेश के मामले में यह राज्य अन्य राज्यों से पिछड़ता चला गया। आए दिन होने वाले अपहरण व हत्या के मामले राज्य की कानून व्यवस्‍था को मुंह चिढ़ाते रहते हैं। राजनीतिक दल भी अपराधियों के बाहुबल का लाभ उठाने के लिए उन्हें चुनाव मैदान में उतार देते हैं। जब यही अपराधी चुनकर विधानसभा या संसद तक पहुंच जाते हैं तो अपराधियों और अपराध को और बढ़ावा मिलता है। अपराधियों के नेता बनने के बाद स्थिति 'सईंया भये कोतवाल अब डर काहे का' जैसी हो जाती है। गरीबी और अमीरी के बीच की बढ़ती खाई और सामाजिक अन्याय के कारण दबा-कुचला वर्ग हथियार उठाने को मजबूर हो गया है। इसके साथ ही नक्सलवाद भी राज्य के लिए एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। बिहार में उग्रवाद की समस्या की जड़ मूल रूप से भूमि के असमान वितरण तथा आर्थिक उपार्जन की संरचना में निहित है। गरीबी, सामन्ती प्रथा, जाति प्रथा तथा बेरोजगारी ही महत्वपूर्ण कारण है।

पिछले 20 वर्षों से बिहार के अनेक जिलों में उग्रवाद की समस्या मौजूद है। उग्रवाद की यह समस्या मुख्यतः जहानाबाद, गया, भोजपुर, नवादा, औरंगाबाद, रोहतास, पूर्णिया, पटना आदि जिलों में फैली हुई है जिससे कमोवेश राज्य के दूसरे जिलों में भी उग्रवाद की घटनाएं होती रहती हैं।

राज्य में अनेक सामाजिक एवं आर्थिक कारणों से सामूहिक नरसंहार की घटनाएं होती रहती हैं। वर्तमान बिहार नक्सली गतिविधियों एवं सामन्ती दमन का सबसे बड़ा केन्द्र बना हुआ है। बिहार के नक्सलवाद प्रभावित जिलों में मुख्य झगड़ा नक्सलवादियों एवं भूस्वामियों के मध्य हुआ है।

* राज्य में सबसे पहले अप्रैल 1968 में मुजफ्फरपुर जिले में नरसंहार की घटना हुई जिसमें 6 लोग मारे गये 16 घायल हुए।
* इसके बाद पूर्णिया जिले के रूपसपुर गांव में भूपतियों ने 14 आदिवासियों को जिन्दा जलाया।

बिहार में उग्रवाद का मुख्य कारण
बिहार में उग्रवाद की समस्या की जड़ मूल रूप से भूमि के असमान वितरण तथा आर्थिक उपार्जन की संरचना में निहित है। गरीबी, सामन्ती प्रथा, जाति प्रथा तथा बेरोजगारी ही महत्वपूर्ण कारण है।

उग्रवाद के महत्वपूर्ण कारण निम्न हैं-
1. सामन्ती एवं जाति प्रथा, 2. भूमिहीन श्रमिक, 3. भुमि सुधार की समस्या, 4. मजदूरी की समस्या, 5. भूमि पर जनसंख्या का अधिक भार, 6. बेरोजगारी में बढ़ोत्तरी, 7. नौकरशाही की शिथिलता, 8. मूलभूत संरचना का अभाव, 9. सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में घोर असमानता की भावना, 10. सरकारी स्तर से प्रयासों का अभाव।

बिहार में मुख्यतः दो वर्ग, उच्च वर्ग और निम्न वर्ग हैं। अपने को सशक्‍त करने के लिए या रक्षा के लिए उच्च वर्ग (भू-स्वामी) ने निजी सेना का गठन करती है, वहीं निम्न वर्ग (मजदूर वर्ग) ने नक्सली संगठन बनाकर इनका प्रतिकार किया है। यही कारण है कि यहां वर्ग संघर्ष की स्थिति हमेशा बनी रहती है और आये दिन नरसंहार होते रहते हैं।

18वीं शताब्दी के मध्य में बिहार के जमींदार लोग अपनी निजी सेना रखते थे और उसके द्वारा लोगों को आतंकित कर अपना हित साधते थे। सन्‌ 1781 में जमींदारों के विरुद्ध प्रथम विद्रोह (नरहट समाही एवं सिरिस जमींदार कुटुम्ब) हुआ था।

माओवादी कम्युनिस्ट सेन्टर- यह एक अति उग्र वामपंथी नक्सली संगठन है जिसका मुख्यालय मदनपुर पहाड़ियों में है। यह मुख्यतः जहानाबाद, औरंगाबाद, गया में हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेन- यह उग्रवादी संगठन के साथ-साथ राजनीतिक संगठन है जो मुख्यतः भोजपुर, जहानाबाद, रोहतास, नालन्दा, औरंगाबाद एवं सीवान जिले में हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट (एम.एल.) पार्टी यूनिटी- यह अन्य उग्रवादी संगठन है जिसे पार्टी यूनिटी के नाम से जाना जाता है। यह उग्रवादी पार्टी गया, जहानाबाद, औरंगाबाद एवं रोहतास जिले में हैं।

उग्रवाद की समस्या के समाधान
* बिहार सरकार भी उग्रवाद की समस्या को गम्भीरता से समाधान के लिए प्रयासरत है।
* इसके लिए राज्य सरकार वर्ग-संघर्ष एवं विद्रोह को कम करने की कोशिश कर रही है।
* अर्द्धसैनिक बलों एवं केन्द्रीय बल की कम्पनियों द्वारा गतिविधियों के विरुद्ध चौकस। उग्रवाद प्रभावित जिलों में कोर ग्रुप की स्थापना की गई है।
* क्विक रिस्पांस टीम का गठन जो उग्रवाद एवं प्रतिशोध की कार्यवाही के विरुद्ध तुरन्त कार्य करने को तैयार।
* सामाजिक एवं आर्थिक प्रोत्साहन।
* गरीबी, बेरोजगारी, भूमिहीन आदि की समस्याओं को प्रभावी ढंग से निपटने का प्रयास करना।

बिहार के महत्वपूर्ण ऑपरेशन
1. ऑपरेशन ब्लैक पैंथर- यह ऑपरेशन बिहार राज्य के पश्‍चिमी चम्पारण जिले में व्याप्त दस्यु समस्या के अन्त हेतु प्रारम्भ किया गया।
2. ऑपरेशन कॉम्बिंग- यह ऑपरेशन राज्य के दमरिया में हुए भीषणतम नरसंहार के आरोपियों को पकड़ने हेतु प्रारम्भ किया गया।
3. ऑपरेशन धनवन्तरि- राज्य में व्याप्त अवैध तथा नकली औषधियों पर नियन्त्रण एवं समाप्ति हेतु चलाया गया अभियान है।
4. ऑपरेशन टॉस्क फोर्स- बिहार सरकार द्वारा नक्सलियों के उन्मूलन के लिए चलाया गया अभियान है।
5. ऑपरेशन फेयर इलेक्शन- मार्च 1995 में राज्य विधान सभा चुनावों में निष्पक्षता एवं शान्तिपूर्ण मतदान कराने हेतु चलाये गये इस ऑपरेशन के बावजूद राज्य में भारी हिंसा हुई। फलतः निर्वाचन आयोग को अनेकानेक बार निर्वाचित तिथियों में परिवर्तन तथा पुनः मतदान कराना पड़ा।
6. ऑपरेशन टोडरमल- यह ऑपरेशन राज्य सरकार द्वारा भूमि सुधार कार्यक्रम में तीव्र गति लाने तथा भूमिहीनों को समुचित भूमि-वितरित हेतु चलाया गया है।
7. ऑपरेशन उजाला- राज्य के मुजफ्फरपुर जिले की कलेक्टर तथा जिला मजिस्ट्रेट राजबाला वर्मा ने नगर के कुख्यात वेश्या अड्डे चतुर्भुज स्थान की वेश्याओं के जीवन एवं शैली में क्रान्तिकारी परिवर्तन हेतु संचालित किया ।
8. ऑपरेशन जगुआर- इस ऑपरेशन को अंग प्रदेश एवं कोसी अंचल क्षेत्र के दियारा में सक्रिय अपराधियों के सफाये हेतु चलाया गया।
9. ऑपरेशन सिद्धार्थ एवं दशक- राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक दुर्बल वर्ग की दशा सुधारने तथा उन्हें सामाजिक न्याय प्रदान करने हेतु ये दोनों ऑपरेशन चलाये गये।
10. ऑपरेशन कोबरा- राज्य के माफिया गिरोहों के सफाये हेतु यह ऑपरेशन संचालित हुआ।
11. ऑपरेशन जॉन- राज्य के उग्रवादी उत्पात को नियन्त्रित करके उनके अड्डे को समाप्त करने हेतु इस ऑपरेशन को प्रारम्भ किया गया।
12. ऑपरेशन चाणक्य- इस ऑपरेशन को बाजार में दैनिक उपयोग की वस्तुओं में की जा रही मिलावट को समाप्त करने हेतु प्रारम्भ किया गया।
13. ऑपरेशन चारा- केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने राज्य में हुए चारा घोटाला की जांच करके दोषियों की धरपकड़ हेतु ऑपरेशन का संचालन किया।
14. ऑपरेशन फ्लड- राज्य सरकार ने राज्य में दुग्ध क्रान्ति हेतु इस ऑपरेशन का संचालन किया।
15. ऑपरेशन मानसून- राज्य के पर्यावरण तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा वर्षा ऋतु में संरक्षित वनों में अवैध शिकार को रोकने हेतु चलाया गया ऑपरेशन है।
16. ऑपरेशन एटेन्टेंस- यह शिक्षा विभाग में बच्चों को नियमित स्कूल जाने हेतु चलाया गया विशेष अभियान है।
17. ऑपरेशन वर्ज वाहन- नक्सलियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।
18. राज्य सरकार आपका द्वार- राज्य में आर्थिक विषमता दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कानून व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते अपराधी