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कहीं सूखा तो कहीं बाढ़, कृषि की समस्याएं कम नहीं

कृषि प्रधान देश में बिहार मुख्य रूप से कृषि पर आश्रित राज्य है। खासकर 2000 में बिहार के दक्षिणी हिस्से को झारखंड के रूप में एक अलग राज्य बनाए जाने के बाद ज्यादातर उद्योग-धंधे झारखंड में चले गए। बिहार के बटवारे से बिहार में जो जमीन बची उसका २/३ भाग बाढ़ से प्रभावित रहता है जबकि लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र सूखाग्रस्त है। हिमालय की तलहटी में बसे उत्तरी बिहार की मिट्टी बहुत उपजाऊ है लेकिन हर साल 2/3 भूभाग पर आने वाली बाढ़ सिर्फ फसलों को ही नष्ट नहीं करती बल्कि यहां की जिंदगी को भी झकझोर जाती है। नदियों के तटबंध टूटने से फसलों को भारी नुकसान होता है। दूसरी तरफ दक्षिणी बिहार में जहां सूखे की समस्या है वहां नहरों की कमी और बरसाती नदियों के पानी का सही नियमन नहीं होने की वजह से कृषि नहीं हो पाती है। राज्य का केवल २८.४० प्रतिशत क्षेत्र में ही नहरों से सिंचाई होती है। समूचे बिहार में नहरों का जाल बिछाकर सिंचाई की उचित व्यवस्था के साथ ही नकदी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों का उत्पादन किया जाए, जिससे किसानों की मेहनत सूखे या बाढ़ के पानी में न बहे।

बाढ़ एवं सूखे की समस्या

बिहार में नदियों का जाल बिछा हुआ है। उत्तरी बिहार में बहने वाली अधिकतर नदियों में वर्षभर जल रहता है। बाढ़ की समस्या उत्तरी बिहार की सबसे बड़ी और गम्भीर समस्या है इस प्राकृतिक आपदा से करोड़ों रुपये की फसलों एवं मवेशियों तथा कृषि का नुकसान होता है।

उत्तरी बिहार की सबसे बड़ी समस्या है-गंगा के उत्तरी मैदान में बाढ़ के कारण हिमालय से बहने वाली अनेक नदियां हैं जिसमें घाघरा, बागमती, कोसी, महानन्दा आदि प्रमुख हैं।

दक्षिणी मैदान में बरसाती नदियां सोन, पुनपुन, हरीहर, किऊल आदि के कारण बाढ़ आती है। उत्तरी बिहार में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सारण, गोपालगंज, वैशाली, सहरसा, खगड़िया आदि प्रमुख हैं, जबकि दक्षिण बिहार में पटना और जहानाबाद अधिक बाढ़ प्रभावित रहे हैं।

* 1975 में पटना में भयंकर बाढ़ आयी। उसके बाद गंगा तटबन्ध का निर्माण हुआ।
* आज बिहार में बाढ़ की समस्या एक भीषण समस्या है।
* राष्ट्रीय बाढ़ आयोग द्वारा देश का सर्वाधिक बाढ़ प्रवण बिहार राज्य ही है।
* बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का २/३ भाग बाढ़ से प्रभावित रहता है।
* पहली पंचवर्षीय योजना से नदियों पर तटबन्ध का निर्माण कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, अधवारा करेह, भूतही बलान, बागमती, कमला बलान, महानन्दा आदि पर किया गया है।
* सीमित साधन स्रोत के अन्तर्गत अब तक ३,४०० किमी. की लम्बाई में बाढ़ सुरक्षात्मक तटबन्धों का निर्माण हुआ है तथा २९.२८ लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र की सीमित सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
* उत्तरी बिहार में सभी प्रमुख नदियों के स्थल जल ग्रहण क्षेत्र का ३/४ भाग नेपाल तथा तिब्बत में पड़ता है।
* नेपाल में जलाशय का निर्मांण करना आवश्यक है।
* भारत सरकार एवं नेपाल के बीच संयुक्‍त विशेषज्ञ दल का गठन किया गया है जो बाढ़ नियन्त्रण करता है।
* बिहार में जल प्रबन्धन पर ध्यान देते हुए राष्ट्रीय सिंचाई नीति बनाये जाना जरुरी है।
* बेसिन पर आधारित मास्टर प्लान तैयार करना तथा निर्माणाधीन सिंचाई परियोजना की प्राथमिकता का निर्धारण करना।
* बिहार में 9 लाख हेक्टेयर भूमि पर जल जमाव की समस्या है। यह जल प्रभाव मुख्यतः गंडक और कोसी कमान क्षेत्र में पड़ते हैं।

बिहार में सूखाग्रस्त क्षेत्र की समस्या

वह क्षेत्र जहां पर 120 सेन्टीमीटर से कम वर्षा होती है उसे सूखाग्रस्त क्षेत्र की संज्ञा दी जाती है। भारत का २/३ क्षेत्र सूखा पीड़ित है जहां 75 सेन्टीमीटर से कम वर्षा होती है।

बिहार में दक्षिणी बिहार के कैमूर, रोहतास, गया, औरंगाबाद, नवादा, मुंगेर, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, भागलपुर, पटना, नालन्दा और जहानाबाद के कुछ इलाके सूखा पीड़ित हैं, जैसे-टाल क्षेत्र। बिहार का 20% क्षेत्र सूखाग्रस्त है। बिहार में सूखाग्रस्त क्षेत्र होने के निम्न कारण हैं-

* मानसून की अनिश्‍चितता एवं परिवर्तनशीलता।
* दक्षिणी बिहार की अधिकतर नदियों का बरसाती होना।
* जल प्रबन्धन में जल संग्रहण पर ध्यान केन्द्रित नहीं करना।
* जल प्रबन्धन और बांध बनाकर जल संग्रह की इच्छा शक्‍ति का अभाव।

बिहार का मध्य भाग पटना, नालन्दा, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, नवादा तथा मुंगेर में 100 सेमी. से कम वर्षा होती है जिससे इन इलाकों में सूखाग्रस्त होने की सम्भावना बनी रहती है। गंगा के दक्षिणी मैदान की भूमि ढा़लयुक्‍त और पथरीली है, वहां की मिट्टी भी छिछली है जिससे भूमिगत जल नहीं जा पाता और जल तेजी से बह जाता है। इस क्षेत्र में वनों की अतिशय कटाई से मिट्टी की नमी में कमी हो गयी है जिससे कृषि प्रभावित होती है। सूखा से निपटने के लिए निम्न उपाय करने चाहिए-

* अधिक-से अधिक वनीकरण को प्रोत्साहन देना चाहिए।
* दक्षिण बिहार की नदियों पर बांध बनाने चाहिए।
* जल प्रबन्धन के अन्तर्गत जल भण्डारण, बेसीन लिस्टिंग या क्रम में तालाब बनाना।
* भूमिगत जल को कम-से-कम उपयोग में लाना तथा उसके निकट जलाशय बनाना।

दुर्गावती जलाशय, क्‍यूल बीयर, बडुआ जलाशय, चन्दन जलाशय, पंचाने बीयर, पैमार बीयर, फल्गु बीयर, लीला जन्य बीयर, सकरी बीयर, निम्सर बीयर, मेरहर बीयर को ध्यान में रखकर इन ऊपरी घाटी में जलाशय बनाने की सम्भावना को ढूंढ़ना चाहिए।

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