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विकास का आइना: आधारभूत संरचना और पिछड़ता बिहार

विकास का आइना: आधारभूत संरचना और पिछड़ता बिहार

किसी भी देश या राज्य की समृद्धि व विकास का आंकलन उसके आधारभूत संरचना से लगाया जा सकता है। मतलब वहां की चिकित्सा व्यवस्था कैसी है, वहां की शिक्षा की व्यवस्था, सड़क व परिवहन व्यवस्था, वहां की बिजली-पानी की व्यवस्था कैसी हैं। बिहार एक गरीब व पिछड़ा राज्य होने के साथ ही आधारभूत संरचना के मामले में पिछड़ा हुआ है। पूरे राज्य की जनसंख्या 8 करोड़ से ज्यादा है जबकि केवल 7 मेडिकल कॉलेज हैं। शिक्षा के मामले में बिहार प्राचीन काल से ही आगे रहा है, नालंदा, विक्रमशिला आदि विश्वविद्यालय यहां की शिक्षा की गुणवत्ता की द्योतक हैं, लेकिन सहशताब्दी की जनगणना 2001 के आंकड़ों के अनुसार बिहार में केवल 5 उच्च शिक्षण संस्थान और 13 विश्वविद्यालय हैं। अभी बिहार में सिर्फ 67116 किलोमीटर सड़कें हैं जबकि राष्ट्रीय औसत के अनुसार जनसंख्या के अनुपात में राज्य में 192774 किमी. सड़कों की आवश्‍यकता है। अपराध के चढ़ते ग्राफ के कारण यहां पर पर्यटन उद्योग भी फल-फूल नहीं पाया है। रोजगार की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य से रोज हजारों की तादात में लोग दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

चिकित्सा

बिहार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य का स्तर ग्राम से राजधानी (शहर) तक स्वास्थ्य सेवाओं का क्रम विस्तारित है।
* वर्तमान में बिहार राज्य में 7 मेडिकल कॉलेज हैं जो जनस्वास्थ्य को सुधारने में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
* बिहार राज्य को 8 करोड़ से अधिक आबादी के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल से लेकर छोटे-बड़े कुल 9448 स्वास्थ्य केन्द्र हैं।

बिहार राज्य में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के आधार पर विभिन्‍न स्तर पर विभाजित हैं, जो निम्नलिखित हैं-

1. ग्राम स्तर पर चिकित्सा व स्वास्थ्य सुविधाएं।
* कुछ ग्रामों को मिलाकर पंचायत में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित किये गये हैं।
* स्वास्थ्य केन्दों पर प्राथमिक स्तर की स्वास्थय सुविधाएं उपलब्ध करवायी गयी हैं।
* स्वास्थ्य उपकेन्द्र में एक या दो कर्मचारी होते हैं, जबकि प्राथमिक सेवा केन्द्र में एक चिकित्सा व अन्य कर्मचारी नियुक्‍त रहते हैं।
* ग्राम पंचायत मुखिया द्वारा ग्राम में स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाओं में सहयोग एवं भागीदारी होती है। उससे विभिन्‍न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन कराने में भागीदारी व सहयोग मिलता है।

2. प्रखण्ड व अनुमण्डल स्तर-बिहार राज्य के सभी प्रखण्डों में स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित हैं। यहां पर महिला एवं पुरुष डॉक्‍टर की व्यवस्था होती है।
कुछ अनुमण्डल में भी स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित हैं।

3. जिला व राज्य स्तर-बिहार राज्य के प्रत्येक जिलों में पर्याप्त बेडों की संख्या वाला अस्पताल स्थापित है। यहां रोगों, बीमारियों सम्बन्धी इलाज की सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
* सिविल सर्जन जिला स्तर का सर्वोच्च स्वास्थ्य अधिकारी होता है।
* बिहार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सर्वोच्च केन्द्र पटना में स्थापित इन्दिरा गांधी आयुर्वेद केन्द्र तथा पीएमसीएच है। यह सुविधा सभी सात कॉलेजों में उपलब्ध हैं।

बिहार राज्य में ब्लड बैंक
बिहार राज्य के स्वास्थ्य नीति के अनुसार प्रत्येक जिले के सदर अस्पतालों में कम से कम एक ब्लड बैंक होना आवश्यक है।

* बिहार में कुल 29 ब्लड बैंक हैं जिसमें 8 सरकारी हैं 15 निजी तथा 6 स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित हैं।
* बिहार राज्य की राजधानी पटना में ही 200 से 300 यूनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ती है, जबकि इसमें 70 से 80 यूनिट खून ही सरकारी स्त्रोतों से उपलब्ध हो पाता है। सरकार को स्वास्थ्य एवं स्वैच्छिक रक्‍तदान के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
* स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण एवं बीमा योजना के अन्तर्गत स्वास्थ्य सेवाओं में निजी क्षेत्रों में सभी स्तर पर भागीदारी तथा स्वास्थ्य बीमा को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्रों में ज्यादा व्यय करेने की योजना है। स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय योजना को बीमित किया जा रहा है।


शिक्षा व्यवस्था
बिहार में शिक्षा का प्रमुख केन्द्र नालन्दा, विक्रमशिला, वर्जासन एवं ओदन्तपुरी आदि विश्‍वविद्यालय रहे हैं

* बिहार में शिक्षा की व्यवस्था मध्यकाल से प्रारम्भ हुई थी, जिसमें अधिकांश मुसलमान ही उच्च शिक्षा प्राप्त करते थे। शिक्षा का माध्यम फारसी था लेकिन कहीं संस्कृत का भी शिक्षण संस्थान स्थापित किया गया था।
* अजीमाबाद (पटना) बिहार में फारसी शिक्षण का सबसे बड़ा केन्द्र था। बिहार के प्रसिद्ध विद्वानों में काजी गुलाम मुजफ्फर थे।
* आधुनिक शिक्षा का प्रारम्भ 1835 ई. में लॉर्ड विलियम बैंटिक द्वारा किया गया। शिक्षा का माध्यम संस्कृत-फारसी के साथ अंग्रेजी भी था लेकिन शिक्षाएं अंग्रेजी की सर्व प्रमुखता थी।
* पूर्णिया के बिहार शरीफ तथा छपरा में एक अंग्रेजी शिक्षा केन्द्र की स्थापना की गई।

प्राचीन बिहार के महत्वपूर्ण शिक्षा केन्द्र व बिहार शिक्षा संस्थान
प्राचीनकाल से बिहार शिक्षा का विशिष्ट केन्द्र रहा है। इसकी गौरवशाली शैक्षिक पृष्ठभूमि में अनेक महत्वपूर्ण स्थान थे, जो निम्न हैं-

नालन्दा विश्‍वविद्यालय
* गुप्तकालीन सम्राट कुमारगुप्त प्रथम द्वारा नालन्दा विश्‍वविद्यालय की स्थापना की गयी (415-454 ई.पू.)।
* नालन्दा विश्‍वविद्यालय में अध्ययन हेतु भारत से बाहर के देशों जावा, चीन, तिब्बत, श्रीलंका व कोरिया आदि के सैकड़ों छात्र प्रवेश लेते थे।
* ह्वेनसांग के समय नालन्दा विश्‍वविद्यालय में 8500 छात्र एवं 1510 शिक्षक थे तथा इसके प्रख्यात कुलपतियों में सर्वाधिक प्रसिद्ध शीलभद्र नामक विद्वान थे। प्रख्यात आचार्यों में धर्मपाल, चन्द्रपाल, गुणमति, स्थिरमति, प्रभामित्र, जिनमित्र, दिकनाग, ज्ञानचन्द्र, नागार्जुन, वसुबन्धु, असंग, धर्मकीर्ति बहुत उल्लेखनीय रहे थे।
* प्रवेश इच्छुक विद्यार्थियों को द्वारपाल वाद-विवाद में उत्तीर्ण होने पर प्रवेश मिलता था।
* इस विश्‍वविद्यालय में शिक्षा का माध्यम पालि भाषा थी। 12वीं सदी में बख्तियार खिलजी के आक्रमण के फलस्वरूप नष्ट हो गया था।

विक्रमशिला विश्‍वविद्यालय
* पालवंशीय शासक (770-810 ई.) में विक्रमशिला विश्‍वविद्यालय की स्थापना की गई।
* यह विश्‍वविद्यालय बौद्ध धर्म के वर्जयान शाखा का प्रमुख केन्द्र था। यहां न्याय, तत्वज्ञान एवं व्याकरण की शिक्षा प्रदान की जाती थी।
* विक्रमशिला विश्‍वविद्यालय के महान विद्वानों में रक्षित विरोचन, ज्ञानभद्र, बुद्ध जेतरित, रत्‍नाकर, शान्तिज्ञान, श्रीमित्र, अभयंकर थे।
* यहां तिब्बत के छात्रों की संख्या सर्वाधिक थी।

ओदन्तपुरी विश्‍वविद्यालय
ओदन्तपुरी विश्‍वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के प्रथम शासक गोपाल ने की थी। यह विश्‍वविद्यालय बिहार शरीफ नगर के समीप स्थित है। यह विश्‍वविद्यालय तन्त्र विद्या की शिक्षा का केन्द्र था। महारक्षित और शीलरक्षित नामक प्रसिद्ध विद्वान थे।

तिलक महाविद्यालय
* यह मगध में प्रसिद्ध शिक्षा का केन्द्र था। इस विद्यालय का उल्लेख चीनी यात्रियों (ह्वेनसांग एवं इत्सिंग) ने अपने यात्रा विवरणों में किया है।
* इस विद्यालय की स्थापना का श्रेय हर्यक वंश के शासकों ने किया था। यह विद्यालय महायान सम्प्रदाय का केन्द्र था। यहां के प्रसिद्ध विद्वानों में प्रज्ञानभद्र का नाम उल्लेखनीय है।
* तिलक महाविद्यालय नालन्दा के समीप तिल्लास गांव के रूप में पहचाना गया है।

फूलहारी शिक्षण संस्थान
* यह शिक्षण संस्थान नालन्दा के आस-पास था।
* यहां बहुत से प्रसिद्ध बौद्ध आचार्यों का निवास स्थान एवं तिब्बती विद्वानों का भी निवास स्थान रहा है।

उच्च शिक्षा एवं बिहार के प्रमुख शिक्षा संस्थान
वर्तमान में बिहार में शिक्षा की स्थिति ठीक नहीं है। सहशताब्दी की जनगणना 2001 के आंकड़ों के अनुसार प्रमुख शिक्षा संस्थान की स्थिति निम्न है-

बिहार में उच्च शिक्षा
* बिहार में उच्च शिक्षा का प्रारम्भ 9 जनवरी, 1863 में पटना कॉलेज की नींव रखकर की गई। इसी काल में मुंगेर, मुजफ्फरपुर अन्य नगरों में स्थापित की गई।
* मुजफ्फरपुर में इमदाद अली खां ने 1872 ई. में बिहार साईंटिफिक सोसाइटी की स्थापना की। इसी की एक शाखा पटना में भी खोली गई।
* 1817 ई. में पटना विश्‍वविद्यालय की स्थापना के साथ बिहार में उच्च शिक्षा का शुभारम्भ हो गया। पटना विश्‍वविद्यालय पूर्व में कोलकाता से सम्बन्ध था।
* सन्‌ 1899 में बिहार नेशनल महाविद्यालय की स्थापना हुई।
* सन्‌ 1931 में भागलपुर विश्‍वविद्यालय तथा बिहार विश्‍वविद्यालय (मुजफ्फरपुर) में स्थापित किया। अब दोनों विश्‍वविद्यालयों को क्रमशः तिलका मांझी भागलपुर विश्‍वविद्यालय एवं बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्‍वविद्यालय के नाम से जाना जाता है।

बिहार राज्य के प्रमुख विश्‍वविद्यालय
1. पटना विश्‍वविद्यालय, पटना 1917
2. भीमराव अम्बेडकर विश्‍वविद्यालय, मुजफ्फरपुर 1952
3. तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय, भागलपुर 1951
4. कामेश्‍वर सिंह संस्कृत विश्‍वविद्यालय, दरभंगा 1961
5. मगध विश्‍वविद्यालय, बोधगया 1962
6. ललित नारायण मिथिला विश्‍वविद्यालय, दरभंगा 1972
7. राजेन्द्र कृषि विश्‍वविद्यालय, पूषा (समस्तीपुर) 1970
8. नालन्दा खुला विश्‍वविद्यालय, बिहार शरीफ 1988
9. जयप्रकाश नारायण विश्‍वविद्यालय, छपरा 1990
10. भूपेन्द्र नारायण नारायण मण्डल विश्‍वविद्यालय, महोपुरा  1991
11. वीर कुंअर सिंह विश्‍वविद्यालय, आरा 1992
12. मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्‍वविद्यालय, पटना 1998
13. इन्दिरा गांधी खुला विश्‍वविद्यालय, पटना (क्षेत्रीय कार्यालय)  
* वर्तमान में बिहार में 13 विश्‍वविद्यालय हैं।
* बिहार राज्य (समस्तीपुर), 1970 ई. से दो राजकीय (महिला) विद्यालय कार्यरत हैं। 467 महाविद्यालय हैं।

पॉलिटेक्निक कॉलेज
1. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक गुलजार बाग, पटना
2. न्यू गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, पटना
3. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, मुजफ्फरपुर
4. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, दरभंगा
5. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, गया
6. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, पूर्णिया
7. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, भागलपुर
8. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, सहरसा
9. गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, बरौनी
10.  गवर्नमेण्ट पॉलिटेक्निक कॉलेज, आदित्यपुर

महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज
1. गवर्नमेण्ट वुमेन्स पॉलिटेक्निक कॉलेज पटना इंजीनियरिंग कॉलेज, पटना
2. गवर्नमेण्ट वुमेन्स पॉलिटेक्निक, मुजफ्फरपुर
3. बिहार कॉलेज इंजीनियरिंग (एनआईटी) पटना विश्‍वविद्यालय, पटना
4. भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, भागलपुर विश्‍वविद्यालय, भागलपुर
5. मुजफ्फरपुर इंस्टीट्‍यूट ऑफ टेक्नोलॉजी,बिहार अम्बेदकर विश्‍वविद्यालय, भागलपुर
6. कॉलेज ऑफ एग्रीकलचरल इंजीनियरिंग,राजेन्द्र कृषि विश्‍वविद्यालय, पूसा
7. संजय गाँधी इंस्टीट्‍यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजीन, पटना

बिहार के चिकित्सा महाविद्यालय
1. पटना मेडिकल कॉलेज, पटना
2. दरभंगा मेडिकल कॉलेज, दरभंगा
3. नालन्दा मेडिकल कॉलेज, पटना
4. बुद्ध इंस्टीट्‍यूट ऑफ डेण्टल साइंस एण्ड हॉस्पीटल कंकडबाग, पटना
5. बिहार कॉलेज ऑफ फार्मेसी, पटना
6. पटना डेण्टल कॉलेज एण्ड हॉस्पीटल, पटना
7. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, भागलपुर
8. श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर
9. एम.आई.टी. मुजफ्फरपुर
10. दरभंगा मेडिकल कॉलेज, लहेरियागंज
11. अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज, गया

होम्योपैथिक कॉलेज
1.  गया होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, गया
2. के.एन.एच. मेडिकल कॉलेज, भागलपुर
3. मगध होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, बिहार शरीफ
4. मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर
5. आर. बी.टी.एस. गवर्नमेण्ट होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पीटल, मुंगेर
6. सारण होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, छपरा
7.  सिंह होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पीटल लहेरियासराय, दरभंगा

बिहार के आयुर्वेद महाविद्यालय
1. राजकीय तिब्बती कॉलेज, पटना

2. आयुर्वेद कॉलेज, पटना
3. अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज, भागलपुर
4. महारानी रामेश्‍वरी महाविद्यालय, दरभंगा
5. राजकीय होम्योपैथिक कॉलेज, मुजफ्फरपुर
6. शिवकुमारी आयुर्वेद कॉलेज, बेगूसराय

बिहार के इंजीनियरिंग महाविद्यालय
1. बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (एनआईटी), पटना
2. भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, भागलपुर
3. मुजफ्फरपुर इंस्टीट्‍यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुजफ्फरपुर
4. फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज, पूसा
5.  मौलाना अब्दुल कलाम आजाद इंजीनियरिंग कॉलेज, पटना

बिहार के कृषि और पशु चिकित्सा महाविद्यालय
1. राजेन्द्र कृषि महाविद्यालय पूसा (समस्तीपुर)
2.  बिहार कृषि महाविद्यालय सबौर (भागलपुर)
3. तिरहुत कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (मुजफ्फरपुर)
4. बिहार बेटरिनरी कॉलेज (पटना)
5. फैकल्टी ऑफ फोरेस्ट्री साइन्स पूसा (समस्तीपुर)

बिहार के विधि महाविद्यालय
1. पटना लॉ कॉलेज, पटना
2. विदेह लॉ कॉलेज, मधुबनी
3. लॉ कॉलेज, समस्तीपुर
4. एम.एम.कॉलेज, गया
5.  एम.एस. कॉलेज, मोतीहारी
6. टी.एन.बी.लॉ कॉलेज, भागलपुर
7. एस.के.जे. लॉ कॉलेज, मुजफ्फरपुर
8. शिवानन्द मण्डल लॉ कॉलेज, मधेपुरा
9. महाराज कॉलेज आरा, भोजपुर

प्रबन्ध संस्थान
1. इण्डिया इंस्टीट्‍युट ऑफ बिजनेस मैनेजमेण्ट, पटना
2. ललित नारायण मिश्र संस्थान, पटना
3. ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेण्ट भगवानपुर चट्टी, मुजफ्फरपुर

पत्रकारिता एवं जनसम्पर्क पाठ्‍यक्रम
1.  डॉ. सच्चिदानन्द सिंह पत्रकारिता जनसंचार एवं पुस्तकालय विज्ञान संस्थान, पटना
2. मगध विश्‍वविद्यालय, गया
3. तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय, भागलपुर

कला और शिल्प महाविद्यालय
1. कला और शिल्प महाविद्यालय, पटना
2. कला एवं शिल्प महाविद्यालय, आरा
3. ब्रह्मदेव कला और शिल्प महाविद्यालय, दरभंगा
4. ललित कला महाविद्यालय-गवर्नमेण्ट कॉलेज ऑफ आर्ट्‍स एण्ड क्राफ्ट, पटना

प्रमुख प्रयोगशालाएं व अनुसन्धान केन्द्र तथा प्रमुख शोध संस्थान
1.  राजेन्द्र मेमोरियल चिकित्सा अनुसन्धान केन्द्र, पटना
2. इन्दिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना
3.  टी.वी. डिमोन्स्ट्रेशन एण्ड ट्रेनिंग सेण्टर, पटना व दरभंगा
4. बिहार रिसर्च सोसाइटी, पटना

प्रमुख शोध संस्थान
1.  अरबी-फारसी शोध संस्थान, पटना
2. बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्‍, पटना
3. काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान, पटना
4. अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन शोध संस्थान, पटना
5. ललित नारायण मिश्र आर्थिक व सामाजिक शोध संस्थान, पटना
6. बिहार पुराविद्‍ परिषद्‍, पटना
7. डॉ. सच्चिदानन्द सिंह पुस्तकालय एवं राधिका सिंह संस्थान, पटना
8. खुदाबख्श ओरियण्टल लाइब्रेरी, पटना
9. जगजीवनराम संसदीय अध्ययन शोध संस्थान, पटना
10. नव नालन्दा महाविहार, नालन्दा
11.  जैन एवं प्राकृत शोध संस्थान, वैशाली
12. मिथिला शोध संस्थान, दरभंगा
13. ग्रामीण विकास संस्था बरौली, समस्तीपुर

बिहार की अन्य प्रमुख शिक्षा संस्थाएं
1. मन्दार विद्यापीठ, भागलपुर
2.  नेत्रहीन छात्र विद्यालय, भागलपुर
3. मदरसा इस्लामिक शमशूल हूदा, पटना
4. संस्कृत विद्यापीठ, पटना
5. ए.एन.सिंह समाज अध्ययन संस्थान, पटना
6. ललित नारायण मिश्र इंस्टीट्‍यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ एण्ड सोशल चेलेन्स, पटना
7. मूक बधिर विद्यालय, पटना
8. पटना नेत्रहीन विद्यालय कदमकुआ, पटना
9. भारतीय नृत्यकला मन्दिर, पटना
10. इण्डियन इंस्टीट्‍यूट ऑफ बिजनेस मनेजमेण्ट, पटना
11. इंस्टीट्‍यूट ऑफ फार्मेसी, पटना
12. संजय गांधी डेयरी टेक्नोलॉजी संस्थान, पटना


सड़कें और परिवहन व्यवस्था
परिवहन के साधन किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति तथा विकास के प्रतीक हैं। यह आर्थिक क्रियाओं को गति प्रदान करता है। परिवहन व्यवस्था के समुचित विकास से औद्योगीकरण, कृषि समृद्धि तथा मानव-जीवन की उत्कृष्टा निर्भर करती है।

बिहार की परिवहन प्रणाली प्रारम्भ से ही राज्य की स्थालाकृति एवं नदी प्रणाली से प्रभावित रही है। नौका गम्य नदियों के तटबन्धो पर परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराती है। राज्य की परिवहन व्यवस्था गंगा नदी पर नियन्त्रण विशेष रुप से परिलक्षित होती है। गंगा नदी के उत्तर तथा दक्षिणी मैदानी भागों में रेलमार्ग तथा सड़कों की परिवहन व्यवस्था बाढ़ तथा धरातलीय प्रवाह की दृष्टी को बनाये रखने के लिए तटबन्धो का निर्माण किया गया।

बिहार राज्य की परिवहन व्यवस्था में उत्तर भारत के अनेक राज्यों से सड़क मार्ग से जुड़ी है। शेरशाह ने पेशावर तक सड़क मार्ग का निर्माण किया। बिहार में परिवहन व्यवस्था में सड़क और रेलमार्ग महत्वपूर्ण है, लेकिन जल परिवहन का सीमित विकास हुआ है।

विकास की आधरभूत संरचना में परिवहन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण और क्रान्तिक अंग है। बिहार की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। बिहार में यातायात के मुख्यतः चार साधन हैं-

1.सड़क परिवहन, 2.रेल परिवहन, 3.वायु परिवहन, 4.जल परिवहन।

सड़क परिवहन
प्राचीनकाल से ही बिहार उत्तर भारत के अन्य भागों से सड़क मार्ग से जुड़ा है। प्राचीन साम्राज्यों की प्रशासनिक एवं आर्थिक व्यवस्था स्थल मार्गों की सुलभ व्यवस्था करती थी। सम्राट अशोक ने वैभवशाली मगध साम्राज्य को राजधानी तथा राजगौर और पाटलिपुत्र के मध्य सुन्दर राज्य मार्ग का निर्माण कराया।

मध्यकाल में मुगल शासकों तथा शेरशाह ने परिवहन योग्य सड़क का निर्माण किया। भारत का प्रख्यात राष्ट्रीय मार्ग ग्राण्ड ट्रक रोड बिहार से होकर गुजरता है। जिसका निर्माण शेरशाह ने 1542 ई. में किया था। यह पेशावर से कोलकता तक जाती थी।

1947 ई. में बिहार में कुल सड़कों की लम्बाई 1315 किमी. थी। अभी बिहार में सड़कों की लम्बाई 67116 किलोमीटर है। सड़क मार्ग को चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है-

1. राष्ट्रीय मार्ग, 2. प्रान्तीय मार्ग, 3. स्थानीय राजमार्ग, 4. सार्वजनिक निर्मित पक्‍की एवं कच्‍ची सड़क।

1. राष्ट्रीय मार्ग-यह प्राथमिक प्रणाली सड़क व्यवस्था है। इसकी जिम्मेदारी केन्द्रीय सरकार पर है। राज्य में 4717 किमी. लम्बे सड़क मार्ग का निर्माण किया गया है। इसके अलावा 26092 लम्बी एकहरी सड़कों का दोहरीकरण होने जा रहा है। देश में राष्ट्रीय राजमार्गो की लम्बाई मात्र 2% है। बिहार में सड़क यातायात का सबसे प्रमुख साधन है। सड़कों से सम्बन्धित 2001 के प्राप्त आंकड़े के अनुसार निम्न हैं-

1. राष्ट्रीय राजमार्ग- 2661.73 किमी.
2. प्रान्तीय राजमार्ग- 10951.71 किमी.
3. स्थानीय राजमार्ग की लम्बाई- 15000 किमी.
4. कच्चे एवं पक्‍के सार्वजनिक निर्मित सड़क की लम्बाई- 13412.9 किमी.

* राज्य में औसत प्रत्येक दिन गाड़िया 200 से 250 किमी चल पाती हैं।
* राष्ट्रीय औसत के अनुसार जनसंख्या के अनुपात में राज्य में 192774 किमी. सड़कों की आवश्‍यकता है।
* भौगोलिक क्षेत्रफल के अनुसार राज्य को राष्ट्रीय औसत की बराबरी करने के लिए 15473 किमी. सड़कों की अतिरिक्‍त आवश्‍यकता है।
* दसवीं पंचवर्षीय योजना में 700.81 करोड़ रुपये राज्य में आवंटित किये गये हैं जिसमें 3200 किमी. लम्बी सड़क का निर्माण किया जाना है।
*प्रधानमन्त्री ग्रामीण सड़क योजना के अन्तर्गत बिहार को वर्ष 2007 तक 34200 करोड़ रुपये देने का प्रावधान है जिससे बिहार के बचे 62% गांवों को पक्‍की सड़कों से जुड़ना है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग की लम्बाई- 2100 किमी. है।

बिहार के राष्ट्रीय मार्ग निम्न हैं-
(1) राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 -यह राष्ट्रीय राजमार्ग बिहार में 392 किमी. गुजरती है। दिल्ली तथा कोलकाता एवं कानपुर को जोड़ता है।
(2) राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-6-बिहार में लम्बाई 22 किमी.
(3)राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-23-250 किमी. लम्बाई
(4)।राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-28-259 किमी. लम्बाई
(5)राष्ट्रीय राजमार्ग-30-230 किमी. लम्बाई
(6)राष्ट्रीय राजमार्ग-31-437 किमी. लम्बाई

2. प्रान्तीय राजमार्ग-इसमें जिला मुख्यालयों एवं प्रदेश की राजधानी को जोड़ने वाले अनेक मार्ग आते हैं। भौतिक अवरोध के कारण इस मार्ग का कम विकास हुआ है। बिहार के मैदानी भाग में सड़कें वर्षा के समय जल प्लावित हो जाती हैं।

3. स्थानीय सड़कें- स्थानीय सड़कें जिला मुख्यालय को छोटे-छोटे नगरों, कस्बों को आपस में जोड़ती हैं ये कच्ची एवं पक्‍की दोनों होती हैं। यह ईंट के सोलिंग से बनता है। यह वर्षा से टूट-फूट हो जाती है।


बिहार में पर्यटन
परिचय- बिहार पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और धर्म अध्यात्म व संस्कृति का केन्द्र स्थान है। बिहार अपने ऐतिहासिक गौरव, सांस्कृतिक वैभव, प्राकृतिक सुन्दरता व जीव-जन्तुओं की विविधता से पर्यटकों के लिए स्वर्ग माना जाता है। यहां की गौरवशाली परम्पराएं, समृद्ध संस्कृति, विलक्षण रीति-रिवाज व सामजिक जीवन-पद्धतियां, मेले, पर्व, त्यौहार सदियों से देशी-विदेशी यात्रियों को आकर्षित करते रहे हैं।

बिहार के पर्यटन स्थल को क्रमशः ए, बी तथा श्रेणी सी में विभाजित किया जा सकता है-
ए- श्रेणी में वैसे पर्यटक स्थल आते हैं जो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के होते हैं। ये स्थल वैशाली, बोधगया, नालन्दा, राझगीर, पटना और विक्रमशिला आदि हैं।
बी- श्रेणी के पर्यटक स्थल वे सभी हैं जो राष्ट्रीय स्तर के हैं। ये स्थल हैं- रोहतास, मुंगेर, पावापुरी, सीतामढ़ी, सुल्तानगंज, बक्सर, सासाराम, हाजीपुर, मधुबनी आदि।
सी- श्रेणी के अन्तर्गत वे सभी पर्यटक स्थल आते हैं जो राज्यस्तरीय होते हैं।

बिहार राज्य में निम्नलिखित प्रमुख पर्यटक हैं-
पटना- यह बिहार की राजधानी है। अजातशत्रु का पुत्र उदयभद्र ने 444-460 ई. पू. में पाटलिपुत्र नगर की स्थापना की और अपनी राजधानी बनायी। पटना में अनेकों ऐतिहासिक स्थल, सिखों के दसवें गुरु का जन्म स्थल तथा प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।

राजगीर- यह पर्यटक स्थल गर्म झरनों के लिए प्रसिद्ध है। सर्दियों में उत्तम भ्रमण स्थल व आरोग्य स्थल कहा जाता है। यहां प्रथम विश्‍व बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था। यहां जैन व हिन्दुओं के अनेक स्थल हैं।

नालन्दा- यहां प्राचीनकाल में एक विश्‍वविद्यालय था जहां देश-विदेश से छात्र पढ़ने आते थे। अभी इसका अवशेष दिखलाई पड़ता है।

गया- यहां हिन्दुओं का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यहां देश-विदेश से लोग आकर पूर्वजों की आत्मा को पिण्डदान करके उनके प्रति अपने अन्तिम कर्तव्य को पूरा करते हैं। भगवान रामचन्द्र ने अपने पिता दशरथ के लिए यहां पिण्डदान किया था।

बक्सर- यहां प्राचीन विख्यात गुरु विश्‍वामित्र का आश्रय था जहां राम और लक्ष्मण को प्रारम्भिक शिक्षण-प्रशिक्षण मिला था। प्रसिद्ध ताड़का राक्षसी का राम द्वारा वध किया गया था। 1764 ई. का बक्सर युद्ध भी प्रसिद्ध है।

मनेर- यह बिहार की राजधानी पटना से 29 किमी. की दूरी पर स्थित है जहां शाह दौलत और शेख याहिया मनेरी का मकबरा है।

मधुबनी- यह शहर मधुबनी चित्रकला के लिए विश्‍वविख्यात है। 2003 ई. में लन्दन में आयोजित कला प्रदर्शनी में मधुबनी पेंटिंग्स को सराहा गया था।

मुंगेर- यहां महत्वपूर्ण ऐतिहासिक किला व स्थल है तथा विश्‍व प्रसिद्ध योग विश्‍वविद्यालय भी है। यह प्राचीन अंग साम्राज्य का प्रमुख केन्द्र था।

लौरिया आरेराज- यहां सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अशोक स्तम्भ हैं।

सोनपुर- यहां कार्तिक महीने में एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है तथा प्रसिद्ध ऐतिहासिक हरिहरनाथ का मन्दिर है।

वैशाली- यह शहर विश्‍व का प्राचीनतम गणतन्त्र (छठी सदी ई. पू.) के लिए प्रसिद्ध है। प्रसिद्ध जैन तीर्थंकर महावीर का जन्म स्थल है। अनेक ऐतिहासिक अवशेष यहां हैं।

वाल्मीकि नगर- यह स्थल वाल्मीकि मुनि के जन्म स्थल के लिए प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में यहां वाल्मीकि मुनि का आश्रम था। यहां एक प्रसिद्ध अभयारण्य भी है।

विक्रमशिला- यह भागलपुर जिले में गंगा तट पर स्थित है। प्राचीनकाल में विख्यात विक्रमशिला विश्‍वविद्यालय अवस्थित था। यहां उसके ऐतिहासिक अवशेष अब भी मौजूद हैं।

जीरादेयू- देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म स्थल है।

सासाराम- सूर वंश के संस्थापक अफगान शासक शेरशाह का मकबरा है तथा देश का प्रसिद्ध ग्रांड ट्रंक रोड भी इसी शहर से गुजरता है।

सीतामढ़ी- यह शहर हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है। सीतामढ़ी के पूनौरा नामक स्थान पर राजा जनक द्वारा खेत में हल जोतने के समय धरती से सीता का जन्म हुआ था। सीता जी के कारण शहर का नाम सीतामढ़ी पड़ा।

विसपी- यह स्थान मधुबनी/दरभंगा जिले में स्थित है। यहां प्रसिद्ध मैथिली कवि विद्यापति का जन्म हुआ था।

पावापुरी- यह पटना से 104 किमी. और नालन्दा से 25 किमी दूरी पर स्थित है। यहीं जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर जी ने निर्वाण प्राप्त किया था। यहां जल मन्दिर, मनियार मठ तथा वेनुवन दर्शनीय स्थल हैं।

बरौनी- यह उत्तरी बिहार का एक प्रमुख औद्योगिक नगर है। यहां विशाल तेल शोधन कारखाना, गंगा पुल (सड़क और रेल) है।

भागलपुर- यह बिहार के ऐतिहासिक नगरों में एक है। भागलपुर विश्‍वविद्यालय तथा बरारी की गुफाएं यहां दर्शनीय एवं शिक्षा केन्द्र हैं। विष्णु मन्दिर (द. जंगल में स्थित पहाड़ी पर), अखीत्रैवीनाय का शिव मन्दिर (सुल्तानगंज) प्रसिद्ध है । यहां तसर रेशम का उत्पादन होता है।

आरा- यह पटना से 32 मील की दूरी पर स्थित है। यहां दर्शनीय स्थलों में आरण्य देवी, मढ़िया का राम मन्दिर भी प्रसिद्ध है।

कटिहार- कटिहार जिले में बरारी गुरु बाजार का गुरुद्वारा अत्यन्त प्रसिद्ध है। सिखों के नवें गुरु तेगबहादुर द्वारा लंगर का आयोजन किया गया था। सालमारी स्टेशन के निकट भगवान शिव का गोरखनाथ मन्दिर, रानी इन्द्रावती की राजधानी सौरिया प्रसिद्ध स्थल हैं।

बिहार शरीफ- यह स्थल पटना से 85 किमी. की दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह मुस्लिम संस्कृति का प्रमुख केन्द्र है । यहां मखदूम साहब की दरगाह तथा मलिक इब्राहिम वयां का मकबरा है।

पूर्णिया- यह महाभारत कालीन धर्म-स्थल था। यह उत्तर-पूर्वी बिहार में स्थित है जहां से नेपाल जाने का मार्ग है। बनभाखी के सिकलीगढ़ धरोहर प्राचीन गरिमापूर्ण सभ्यता और संस्कृति का स्थल है।

यहां हिरण्य कश्यप का गढ़, भगवान नृसिंह अवतार स्थल, मानिक धाम (ये अवस्थित प्रहलाद स्तम्भ), मां भगवती 52 सिंह एक-एक सिद्धपीठ स्थित है। पूरण देवी का मन्दिर स्थित है।

 

बिहार में ऊर्जा की स्थिति

*ऊर्जा आर्थिक विकास और जीवन का बेहतर स्तर बनाने वाला कारक है।
*देश में 1974 ई. में मात्र 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता थी जो अब तक बढ़कर 97837 मेगावाट हो गयी। वर्तमान में राज्य बिजली बोर्डों की क्षमता देश के कुल बिजली क्षमता का 50% है।
*बिहार में 1991-92 में 2592 मेगावाट बिजली उत्पादित होती थी वही वर्तमान में यह बढ़कर 3570 मेगावाट हो गयी है।
*बिहार में प्रति व्यक्‍ति मात्र 16.7 वाट विद्युत उपलब्ध है।
*बिहार राज्य विद्युत परिषद्‌ का गठन 1 अप्रैल, 1958 को हुआ।

बिहार की विद्युत परियोजनाएं
बिहार में बिजली की आवश्यकता वर्तमान में 2873 मेगावाट की है।

बिहार के ताप विद्युत परियोजनाएं निम्न हैं-
(1) बरौनी ताप संयन्त्र-यह बिहार राज्य विद्युत परिषद्‌ का दूसरा बड़ा संयन्त्र प्रणाली है। यह बरौनी में स्थित है जो बिहार का सबसे बड़ा ताप विद्युत केन्द्र है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 320 मेगावाट है।
(2) कांटी ताप संयन्त्र-यह विद्युत केन्द्र मुजफ्फरपुर जिले में कांटी में स्थित है। इसकी उत्पादन क्षमता 220 मेगावाट है।
(3) कहलगांव विद्युत केन्द्र-राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) के अधीन भागलपुर के कहल गांव में इसकी स्थापना (1992 में) रुस की सहायता से की गई है। इसकी क्षमता 840 मेगावाट की है।
(4) बिहार की राजधानी (पटना) में 2000 मेगावाट की क्षमता का नया सुपर थर्मल पावर प्लाण्ट लगाया जा रहा है।
(5) पटना ताप संयन्त्र-यह पटना शहर में ही स्थित है। यह पटना के कर बिगहिया नामक स्थान पर है। अब बिहार राज्य विद्युत परिषद्‌ के अधीनस्थ कर दिया गया है। इसकी कुल क्षमता 13.5 मेगावाट है। हनुमान नगर बैराज पर 20 मेगावाट उत्पादन क्षमता का जल विद्युत गृह बनाया गया है।
(6) कटैया जल विद्युत परियोजना-यह कोसी से निकलती नहर पूर्वी कोसी पर बनी है। जहां पर 20 मेगावाट उत्पादन क्षमता है।
(7) मेढ़क परियोजना-यह बिहार और उत्तर प्रदेश की संयुक्‍त परियोजनाएं है। इससे 14.59 लाख हेक्‍टेयर भूमि की सिंचाई होती है।
(8) गंडक परियोजना-यह बिहार और उत्तर प्रदेश की संयुक्‍त परियोजना है, जिसके अन्तर्गत पश्‍चिम चम्पारण के भैरम लोटन (वाल्मीकी नगर) में एक बैराज का निर्माण किया गया है, जिससे दो नहरें निकालकर बिहार के सारण, चम्पारण, दरभंगा तथा उत्तर प्रदेश के देवरिया तथा गोरखपुर जिले के लिए सिंचाई की जाती है।
(9) सोन नहर-यह बिहार की प्रथम सिंचाई परियोजना है जिसका निर्माण अंग्रेजो द्वारा 1874 ई. में किया गया था। डिहरी ओन सोन से लगभग 9 किमी.दूर इन्द्रपुरी नामक स्थान पर सोन नदी पर बैराज का निर्माण किया गया है। इसके अन्तर्गत दो जल विद्युत केन्द्र भी बनाये गये हैं, जोकि इस नदी से निकाली नहरों पूर्वी तथा पश्‍चिमी नहरों पर आधारित हैं।

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  • Web Title:विकास का आइना: आधारभूत संरचना और पिछड़ता बिहार