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दो टूक (16 अक्तूबर, 2009)

चौतरफा दिवाली वाले बाजार की धूम है। मंदी की नींद से जागे त्योहारी सीजन ने धनतेरस की एक अंगड़ाई पर ही दसियों करोड़ की न्योछौरी उतार ली। शेयर मार्केट की जय-जय की थाप पर सोना-चांदी से लेकर ऑटो बाजार तक थिरक रहा है। नौकरियां और इंक्रीमेंट एक दूजे को देख आंखों ही आंखों में मुस्कराने लगी हैं। औद्योगिक विकास के आंकड़े इन सबकी बलैया ले रहे हैं।

दूसरी तरफ रुदन और विलाप वाली ताकतें एक बार फिर यह जगर-मगर देख अचकचा गई हैं। जाहिर है उनके भी कुछ डर होंगे। कुछ आशंकाएं होंगी। कुछ भी हो फिलहाल तो दिवाली है। और इस बार तो लगता है मुद्दतों बाद आई है। सो अभी इसी वक्त इसे खुल कर जी लेने में क्या बुराई है! कौन जाने कल क्या हो!

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  • Web Title:दो टूक (16 अक्तूबर, 2009)