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मानसिक बीमारी के आधार पर नहीं मिली राहत

बहुचर्चित दौलतराम हत्याकांड मामले में आरोपी पूर्व निगमपार्षद बंसीलाल के भाई हरीश को मानसिक बीमारी के आधार पर, अदालत से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने परिवार की दलील को ठुकराते हुए आरोपी की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं।


कड़कड़डूमा स्थित एडिशनल सेशन जज पीएस तेजी की अदालत ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि आरोपी हरीश को तुरंत हिरासत में लिया जाए। हालांकि आरोपी का उपचार पुलिस की निगरानी में संबंधित अस्पताल में ही चलेगा।
दरअसल जमानत पर रिहा आरोपी हरीश, पिछली कई सुनवाईयों से अदालत में पेश नहीं हो रहा है। हरीश के परिजनों की ओर से अदालत में याचिका लगाई थी कि वह मानसिक तौर पर बीमार है। मानसिक बीमारी के कारण वह पिछले 13 सितम्बर से इबहास में भर्ती है।


अदालत ने परिजनों की दलील को खारिज करते हुए, पिछली सुनवाई पर आरोपी के गैर जमानती वारंट जारी किए थे। गुरुवार की तारीख पर आरोपी फिर अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। लिहाजा अदालत ने आरोपी को हिरासत में लेने के आदेश जारी कर दिए।


पेश मामले के अनुसार वर्ष 1999 में गीता कालोनी थानाक्षेत्र में दौलतराम गुप्ता नाम के व्यवसायी की हत्या हुई थी। पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन निगमपार्षद बंसीलाल के भाई महेन्द्रपाल और उसके ड्राइवर वेदप्रकाश को गिरफ्तार किया था। जबकि इस मामले के अन्य आरोपी महेन्द्र पाल का भाई हरीश, भतीजा हरमेश और मैनेजर तिलकराज व चौकीदार प्रेमपुजारी फरार हो गए थे। अदालत ने इन्हें भगौड़ा करार दिया था।
28 अगस्त 03 को अदालत ने महेन्द्र पाल को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वर्ष 2002 में हरीश और हरमेश पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे। हरीश और हरमेश के खिलाफ अदालत में मामला विचाराधीन है। मामले का खास पहलू यह है कि सीबीआई ने इस मामले में पूर्व निगमपार्षद बंसीलाल को भी आरोपी बनाते हुए आरोपपत्र दायर कर दिया है।

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