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धनतेरस पर व्यापारियों के घर बरसा धन

अपनी परंपराएं जेबों से पैसे निकलवा लेती हैं। बाकी कामों के लिए चाहे बचत या पैसों की किल्लत का बहाना बना भी लिया जाये, धनतेरस पर बैंकों में जमा पैसे भी सोने, चांदी और बर्तनों के रूप में घरों तक पहुंचते हैं।


साइबर सिटी में धनतेरस का बाजार कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रहा था। चाहे गोल्डसूक हो या सदर बाजार, छोटे-बड़े सोने चांदी के सिक्के, गहने, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और चांदी के बर्तन खूब बिके। हालांकि छुट्टी का दिन नहीं होने के कारण गोल्डसूक के ब्रांडेड स्टोर्स में बहुत ज्यादा भीड़ नहीं नजर आई। गोल्डसूक के एवेन्यू मांटेंग की जीएम नेहा ने बताया कि धनतेरस पर लोगों ने सिक्कों और गहनों की खरीदारी तो की है, मगर पिछले साल से इस साल का आंकड़ा कम रहा। पिछले साल धनतेरस छुट्टी वाले दिन था, सो भीड़ ज्यादा थी। इस बार वीक-डे में पड़ने के कारण दिनभर उतने ज्यादा लोग नहीं आए।


इसी मॉल में इस साल खुले रिलांयस ज्वेल के मैनेजर के अनुसार, बगैर मेकिंग चार्ज के सिक्कों का ऑफर खूब चला। गहनों और सिक्कों की बिक्री यहां शबाब पर रही। सदर बाजार के सोना बाजार में धनतेरस पर काफी भीड़ थी। श्रीराम ज्वेलर्स के डा. मंदीप ने बताया कि दस, बीस, पचास और सौ ग्राम तक के सिक्के खूब बिके। पिछले साल की तुलना में 60 प्रतिशत ज्यादा बिक्री रही। गोल्ड क्वाइन के अलावा डायमंड ज्वेलरी की मांग खूब रही। सोलिटर डायमंड की मांग रही। पुराने एंटिक सिक्कों के प्रेमी अब कम हो रहे हैं। पुराने सिक्कों में 91 प्रतिशत सोना है, जबकि नए सिक्कों में सौ फीसदी सोना होने का दावा व्यापारी कर रहे हैं। होलमार्किंग होने के कारण सोने की प्रमाणिकता भी लोगों को मिल रही है। सदर बाजार के स्वर्ण व्यापारियों के यहां काफी भीड़ देखी गई।

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