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चाँद पर जिंदगानी

चाँद पर वैज्ञानिकों ने पानी खोज लिया है और अब वहां बसने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। यह बड़े हर्ष का विषय है। हालांकि वहां अभी केवल अमीर लोग ही बसने की सोच सकते हैं, क्योंकि वहां बसने के लिए करोड़ों डॉलर की कीमत चुकानी पड़ेगी। यह अच्छी बात इसलिए है कि अमीर लोग चांद पर चले जाएं तो हम गरीबों को भी कुछ आराम मिले। मनुष्य ने चांद पर पानी तो खोज लिया, परन्तु धरती के जल-संकट  के बारे में क्यों नहीं सोच रहा, जहां वह पहले से रह रहा है। रुपया होते भी गरीब क्यों? अनाज होते भी भुखमरी क्यों? इन प्रश्नों का हल तभी होगा जब हम चांद से पहले धरती वासियों के लिए सोचेंगे।
महावीर चौहान, शांतिकुंज, हरिद्वार

खत्म नहीं हुआ भ्रष्टाचार
लघु सिंचाई विभाग में विभिन्न घोटालों में दोषी पाये गए विभागाध्यक्ष एसए असगर को निलंबित किया जा चुका है, लेकिन विभाग में अभी अनेक ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने बड़े-बड़े घोटाले कर रखे हैं, लेकिन उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही है। उदाहरण के तौर पर गत वर्ष गुप्तचर एजेंसी द्वारा लघु सिंचाई विभाग के जिस अधिशासी अभियंता के शयन-कक्ष के दीवान में 50-60 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई थी, उसके विरुद्ध अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसा लगता है कि  सिंचाई मंत्री द्वारा ही उक्त अधिकारी के प्रकरण पर पर्दा डाला गया हो। पुनर्वास घोटाले में दोषी पाये गये नोडल अधिकारी सीवी कपिल के विरुद्ध भी कार्रवाई नहीं हुई। यदि मुख्यमंत्री निशंक घोटालों का पर्दाफाश करने का साहस जुटा सके तो अधिकारियों में पनप रही भ्रष्ट प्रवृत्ति पर भी अंकुश लग सकेगा।
शूरवीर सिंह राणा, देहरादून

पीएम का बयान हास्यास्पद
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कथन ‘हम नक्सलवादियों के बढ़ते खतरे के समक्ष नहीं झुकेंगे लेकिन उनके विरुद्ध सेना का प्रयोग नहीं करेंगे’ हास्यास्पद है। इस समय देश के करीब 200 जनपद एवं 13 प्रदेश माओवादियों के प्रभाव में आ चुके हैं। इन हालात में भी सैनिक कार्रवाई नहीं करेंगे तो कब करेंगे। यह तो माओवादियों को हिंसक कार्रवाई करने की खुली छूट है। यह स्थिति एक कहानी की याद दिला रही है। एक व्यक्ति ने तोता पाल रखा था जिसे पढ़ाया गया ‘बहेलिया आयेगा, दाना डालेगा, जाल बिछायेगा, पकड़कर ले जायेगा इसलिए वहां नहीं जाना’। लेकिन तोता गया, पकड़े जाने पर भी बोलता रहा ‘बहेलिया आयेगा, दाना डालेगा, जाल बिछायेगा, पकड़कर ले जायेगा वहां नहीं जाना’। खतरे तो ठोस कार्रवाई से दूर किये जाते है तोता रटंत से नहीं
चम्पत राय जैन, देहरादून

पड़ासियों को जवाब दे भारत
भारत वर्षो से अमन चैन की लड़ाई लड़ता आ रहा है, मगर पड़ोसी इन बातों को दरकिनार कर भारत को जड़ से उखाड़ने में लगे हैं। अगर हम सतर्क न रहे तो ये दुश्मन किसी भी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ेगा। हाल में चीन ने भारत की सीमा में घुस कर बहुत बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया । चीन की इस घिनौनी हरकत से भारत ही नहीं, बल्कि इसके 21 पड़ोसी देश परेशान हैं। चीन ने पहले भी 1962 में हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा देकर हमारी पीठ में खंजर घोपा था, उसके जख्म भरे भी न थे कि उसने घुसपैठ कर उन जख्मों को फिर से हरा कर दिया।
दीवान सिंह चौहान, श्रीनगर गढ़वाल

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