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‘भारत को चीन के दबाव में आने की जरूरत नहीं’

चीन की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ और भारतीय नेताओं की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर आपत्तियों में आ रही तेजी को देखते हुए जानेमाने रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (सेवानिवृत) अफसिर करीम का कहना है कि अब भारत को नपेतुले अंदाज में चीन को जता देना चाहिए कि बहुत हो गया, अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि इस समय भारत सरकार ने चीन से विरोध का सही रास्ते अपनाया है।

संतुलित भाषा में यह कह कर चीन को बता दिया गया है कि यदि उसने भारतीय नेताओं की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर आपत्तियां जतानी बंद नहीं की तो सीमा विवाद सुलझाने के लिए बातचीत का सिलसिला प्रभावित हो सकता है। जनरल करीम का विचार है कि चीन इस वक्त भारत के साथ हालात बिगाड़ना नहीं चाहता, लेकिन समय-समय पर चौधराहट जताते हुए यह एहसास कराना चाहता है कि इस क्षेत्र का दादा वही है।

हमें उसके दबाव में आने की जरूरत नहीं है लेकिन बहुत ज्यादा हल्ला मचाने की भी जरूरत नहीं। युद्धोन्माद के बजाय यदि हम सख्त कूटनय का सहारा लेते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी संवेदनशील करने में सफल होते हैं तो यही हमारे लिए बड़ी बात होगी। इस बार पाक अधिकृत कश्मीर में चीन की मदद से पाकिस्तानी परियोजनाओं पर भारत ने आपत्ति जता कर सही कदम उठाया।

जनरल करीम के विचार में अब वक्त आ गया है जब भारत चीन के किसी बड़े नेता को आमंत्रित करे और सीमा विवाद पर खुल कर बात करे। हमें चीन से इस समय झगड़ा मोल नहीं लेना है, लेकिन उसे यह भी जता देना जरूरी है कि सिर्फ उसकी मर्जी नहीं चलेगी। इस बीच हमें चीन से लगी अपनी सीमाओं पर चौकसी और तैनाती और बढ़ानी चाहिए।

सेनाओं की ताकत और उनका आधुनिकीकरण तेजी से करना होगा। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में ढांचागत सुविधाएं जुटाने के लिए हर संभव प्रयास करने होंगे। यदि चीन जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ सुर मिलाता है तो हमें भी तिब्बत और सिंगजियांग कार्ड खेलते हुए वहां मानवाधिकार हनन के मुद्दे उठाने चाहिए। यदि वह जम्मू-कश्मीर के हमारे नागरिकों को पेपर वीजा देता है तो हमें भी इसी तर्ज पर जवाब देते हुए इन क्षेत्र के लोगों को वैसा ही वीजा देना चाहिए।

सुशील शर्मा

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