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दीवाली में सावधानी

जलने से छाले पड़ने पर उनसे छेड़छाड़ न करें। उन्हें साफ-सुथरा रखें और कोई ऐंटिसेप्टिक ऑयंटमेंट जैसे नियोस्पोरिन, सिल्वर सल्फाडायजिन, क्लोरहैक्सीडीन, फ्यूसीडीन या सोफरामायसिन लगा लें।

- छाला फूट जाए तो उसकी देखभाल किसी खुले घाव की तरह करें। उसे धूल, गंदगी और मक्खियों से बचाएं। उस पर ऐंटिसेप्टिक ऑयंटमेंट लगाएं और पट्टी कर दें जिससे वह ढका रहे।

- बड़े छाले उठ आएं तो डाक्टर से सलाह लें।

- कपड़ों के आग पकड़ने पर तुरंत जमीन पर लेट जाएं और लोट लगाएं। घबरा कर इधर-उधर भागने या सीधा खड़े रहने से आग की लपटें ऊपर की तरफ उठकर पूरा बदन झुलसा सकती हैं। जबकि लोट लगाने से आग या तो बुझ ही जाती है या कम नुकसान पहुंचाती हैं।

- अगर अकेले हैं और आग लग जाए तो तुरंत मदद के लिए आवाज दें।

- पास में कोई हो तो उसे तुरंत आग बुझाने के लिए प्रयास करने चाहिए। तुरंत जलते हुए व्यक्ति पर पानी डालें। पानी न मिल पाए तो तुरंत किसी मोटे कपड़े, कंबल, कोट, बोरी आदि से आग बुझाएं।

- आग बुझने पर अगर यह पाएं कि बदन का बड़ा हिस्सा जल गया है तो उस पर अधिक पानी न डालें। यह सावधानी बच्चों पर विशेष रूप से लागू होती है। अधिक जले हुए बदन पर पानी डालते रहने से शरीर का तापमान नीचे गिर सकता है और रोगी का जीवन संकट में पड़ जाता है।

- बेहतर होगा कि जले हुए व्यक्ति के बदन से चिपके हुए कपड़ों को खींचकर निकालने की बजाय उस पर कोई साफ कपड़ा या चादर ढक दें और उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं। रास्ता लम्बा हो तो उसे खूब मात्र में पानी और दूसरे तरल पदार्थ देते रहें और उसे हिम्मत बंधाते रहें।

- जले हुए हिस्से पर तेल, चरबी, घी जैसी कोई चीज न लगाएं।

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