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चार लाख से अधिक फर्जी राशन कार्ड

प्रदेश में करीब चार लाख से अधिक फर्जी राशन कार्ड हैं। अब ऐसे ही राशन कार्डो की जांच प्रदेश सरकार करवाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में ग्राम्य विकास एवं राजस्व विभाग की एक जांच टीम बनाई जाएगी। इसमें ग्राम सभा के प्रधान को भी शामिल किया जाएगा। इस टीम को 45 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रदेश शासन को सौंपनी होगी। इस अभियान जिलाधिकारी के नेतृत्व में प्रत्येक जिले में चलाया जाएगा। प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री दिवाकर भट्ट ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह निर्देश दिए।

विधान सभा में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि प्रदेश की आबादी करीब 96 लाख है जबकि यहां पर राशन कार्ड 23 लाख है। अगर एक कार्ड में पांच यूनिट का औसत भी मान लिया जाए तो उस लिहाज से प्रदेश में 19 लाख से अधिक कार्ड नहीं होने चाहिए। आबादी के हिसाब से कार्डो की संख्या इतनी ज्यादा होने पर केंद्र सरकार भी आपत्ति जता चुका है।

यह जांच समिति घर-घर जाकर राशन कार्डो की जांच करेगी। इसके साथ ही यह भी पता लगाएगी कि प्रत्येक कार्ड में जितने यूनिट दर्ज हैं उतने सदस्य उस घर में रहते हैं या नहीं ? जांच होने के बाद एक फीसदी कार्डो की जांच एसडीएम व तहसीलदार भी करेंगे। इस अभियान की मॉनीटरिंग का जिम्मा जिलाधिकारी को सौंपा  गया है।

वहीं, सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों को मिलने वाले लाभांश का मामला भी लटक गया है। इसके साथ ही दुकानों की अधिकतम यूनिटें भी तय की जाएंगी। दिवाकर भट्ट ने कहा कि अभी तक न्यूनतम तो 200 यूनिट पर एक दुकान खुल जाती हैं लेकिन अधिकतम यूनिटों की मात्र तय नहीं है। किसी दुकान पर 4000 यूनिटें हैं तो किसी पर आठ हजार। विभाग अब प्रत्येक दुकान पर अधिकतम 2000 यूनिटें ही दी जाएंगी।

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