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परीक्षार्थियों के रिजल्ट घोषित करने का निर्देश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के अन्दर उन समस्त हाईस्कूल परीक्षार्थियों का परीक्षा परिणाम घोषित कर दे जिनकी उत्तर पुस्तिकाएँ बोर्ड की परीक्षा में किसी कारण से बदल गईं थीं। कोर्ट ने कहा है कि इन परीक्षार्थियों का परीक्षाफल अन्य विषयों में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर अंक देकर घोषित किया जाए भले ही वह हाईकोर्ट आएँ हो या नहीं।

यह आदेश न्यायमूर्ति रणविजय सिंह ने फतेहपुर के दीप कुमार सविता की याचिका पर पारित किया है। याची ने हाईस्कूल की परीक्षा के ड्राइंग की कॉपी में शून्य अंक दिए जाने को चुनौती दी थी। परीक्षा के बाद कॉपियाँ बदली बताई गई थीं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि बोर्ड की परीक्षा में दूरवर्ती गाँवों के छात्र सम्मिलित होते हैं। बोर्ड की कई कमियों के कारण छात्र हाईकोर्ट आते हैं। कई गरीब छात्र धन की कमी के कारण मुकदमा दायर नहीं कर पाते। बोर्ड की परीक्षा में कापियों के बदलने की अनेक घटनाएँ सामने आती हैं।

परीक्षाफल समय से घोषित न किए जाने पर अनेक छात्र इंजीनियरिंग अथवा मेडिकल की परीक्षाओं में बैठ नहीं पाते हैं। ऐसे में यह आदेश पारित करना आवश्यक हो गया है। बोर्ड ने हाईस्कूल की परीक्षा के संबंध में यह आदेश पारित करते हुए कहा है कि यदि छात्र औसत अंक के आधार पर हाईस्कूल पास हो जाते हैं तब उनको ग्यारहवीं कक्षा में प्रवेश दिया जाए भले ही उनके पंजीकरण की अंतिम तिथि बीत गई हो।

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  • Web Title:परीक्षार्थियों के रिजल्ट घोषित करने का निर्देश