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पावर कारपोरेशन पर पौने दो करोड़ जुर्माना

ग्रिड से निर्धारित कोटे से अधिक बिजली लेना उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को भारी पड़ा है। नार्दर्न रीजन लोड डिस्पैच सेंटर की शिकायत पर केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत इस ओवरड्राल को ग्रिड की सुरक्षा पर खतरा करार देते हुए पावर कारपोरेशन पर एक करोड़ 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एडज्यूडिकेशन केस 05/2009 का बुधवार को निस्तारण करते हुए आयोग के सदस्य व एडज्यूकेटिंग आफिसर वीएस वर्मा ने यह धनराशि आगामी दस नवम्बर तक जमा करने का आदेश दिया।

आयोग से नार्दर्न रीजन लोड डिस्पैच सेंटर ने गत वर्ष एक दिसम्बर को शिकायत की थी कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोशन ने लगातार चेतावनी दिये जाने के बावजूद ग्रिड से 49 हट्र्ज से कम फ्रिक्वेंसी पर भी कोटे से अधिक ओवरड्राल जारी रखा जिससे ग्रिड की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इस मामले की सुनवाइयों के दौरान आयोग ने एडज्यूकेटिंग आफिसर के रूप में वीएस वर्मा को कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी।

पावर कारपोरेशन की ओर से चीफ इंजीनियर सिस्टम कंट्रोल अशोक कुमार एवं चीफ इंजीनियर वीपी द्विवेदी ने हलफनामे के साथ यह तर्क दिया की प्रदेश में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर न होने से मुख्य सचिव, ऊर्जा सचिव, सीएमडी व शासन के राजनैतिक सलाहकारों का निर्देश मानना उनकी बाध्यता है। लेकिन आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

पावर कारपोरेशन का यह तर्क भी काम नहीं आया कि हिमाचल प्रदेश से कम बिजली मिलना व सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर ट्रेपिजियम क्षेत्र को 800 मेगावाट निर्बाध विद्युत आपूर्ति करना बाध्यता है। आयोग ने कुल 35 उल्लंघन के लिए पांच लाख रुपये प्रत्येक की दर से एक करोड़ 75 लाख रुपये दस नवम्बर तक जमा करने का आदेश दिया है।

इससे पूर्व नियामक आयोग ने याचिका 105/09 की सुनवाई के दौरान ग्रिड कोड के उल्लंघन के लिए गत 31 अगस्त तक दो करोड़ 57 लाख रुपये जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया था। इतना ज्यादा जुर्माना भरने के बावजूद बिजली की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर के कारण ग्रिड कोड का उल्लंघन करना पावर कारपोरेशन की मजबूरी बना हुआ है।

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