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दीवाली पर, सिंथेटिक मावे से जरा बच के

दीवाली पर, सिंथेटिक मावे से जरा बच के

दीवाली के मौके पर बाजार में भारी मात्रा में सिंथेटिक दूध या दूषित मावे से बनी मिठाइयां बेचे जाने की आशंका है जिन्हें खाना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है । ऐसे में मिठाई के शौकीनों को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि वे त्यौहारों के इस मौसम में बाजार में बनी मिठाइयों का कम से कम इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा।

दरअसल सिथेंटिक दूध और मावा बनाने के लिये यूरिया, कास्टिक सोडा, खाना पकाने के सस्ते तेल और डिटजेंट का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सामान्य दूध में होने वाले वसा के लिये तेल मिलाया जाता है और गाढ़ेपन के लिये डिटजेंटडाला जाता है। दीपावली जैसे त्योहार के मौकों पर इस तरह के दूध और मावे की बिक्री ज्यादा होने की आशंका बढ़ जाती है।

रॉकलैंड अस्पताल के उदर रोग विशेषज्ञ डॉ़ एम पी़ शर्मा कहते हैं, मिलावटी मावे और दूध में सबसे ज्यादा खतरनाक कास्टिक सोडा और यूरिया होता है। इस तरह के मावे या दूध से बनीं मिठाइयों के सेवन से शुरूआती तौर पर विषाक्तता यानी उल्टियां या पेचिश हो सकती है।

उन्होंने कहा कि दूषित पदार्थ से बनी मिठाइयों के सेवन से शरीर को दीर्घकालिक नुकसान भी हो सकते हैं। यकृत में दर्द हो सकता है और भूख लगना कम हो सकता है। अगर मिठाई अत्यधिक मिलावटी है तो उसमें कास्टिक सोडा और यूरिया की मात्रा भी ज्यादा पायी जाती है। इससे गुर्दे से रक्तस्राव होने का खतरा बढ़ जाता है।

डॉ़ शर्मा ने कहा कि मावे से बनीं मिठाइयों में सफेद टरपेंटाइन भी मिलाया जाता है। इसके और यूरिया तथा कास्टिक सोडा के मिश्रण के चलते मिठाइयां और घातक हो जाती हैं। लिहाजा, दीपावली जैसे त्योहार में कम से कम मावे से बनी मिठाइयों से बचा जाना चाहिये। ऐसी मिठाई लेनी चाहिये जिसे अच्छी तरह गर्म कर या उबालकर खाया जा सके।

दीपावली के उत्सव में मिठास घोलते पकवान सेहत न बिगाड़ दें, इसके लिये प्रशासन भी मुस्तैद है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के दूषित आहार रोकथाम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग ने दिल्ली के लिये 27 एसडीएम को निगरानी का जिम्मा सौंपा है। हर एसडीएम के साथ एक़-एक खाद्य निरीक्षक है। बाजारों से नियमित तौर पर नमूने लिये जा रहे हैं।

अधिकारी ने बताया कि दीपावली के दौरान बाजार में दूषित दूध और मावे की मात्रा बढ़ जाती है क्योंकि मिठाइयों की मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर पैदा हो जाता है। ऐसे में कुछ विक्रेता पुराने मावे की खपत बढ़ देते हैं। लिहाजा हम समय़-समय पर उपभोक्ताओं को सजग रहने की सलाह देते हैं।

बत्रा अस्पताल की आहार विशेषज्ञ अनीता जताना ने बताया कि इस साल कम बारिश के चलते दूध उत्पादन पर असर पड़ है। लिहाजा बाजार में सिंथेटिक दूध से बनी मिठाइयों की भरमार रहेगी । ऐसे में दूध या मावे से बनी मिठाइयां खाना जोखिम भरा रहेगा।

अगर मिठाइयों से बचा ही न जा सके तो फिर क्या उपाय करने चाहिये, इस पर अनीता कहती हैं, दूषित पदार्थ से बनी मिठाई से शरीर पर कितना असर पडे़गा यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी मात्रा में मिठाई का सेवन करते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर मिठाई से आप बच न सकें तो सबसे बेहतर यह होगा कि आप ज्यादा से ज्यादा पानी पियें और फल खायें ताकि शरीर से जहरीले तत्व बाहर निकल सकें।

अनीता बताती हैं, दीपावली पर बेहतर यही होगा कि आप दूध और मावे की मिठाइयों के बजाय बेसन या दाल की बनीं मिठाइयों को तरजीह दें। इसके अलावा सूखे मेवों से बनी मिठाइयों से भी नुकसान नहीं होगा। अनीता ने कहा कि अगर दूषित मिठाई का आप अनजाने में अत्यधिक मात्रा में सेवन कर लें तो फिर सप्ताह भर तक हल्का आहार लेकर आप सेहत दुरूस्त कर सकते हैं क्योंकि गरिष्ठ भोजन से शरीर से जहरीले तत्व बाहर नहीं निकलेंगे।

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