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विकास की बेल अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस

विकास की बेल अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे विकास यादव की जमानत के लिए की गई अपील पर शहर की पुलिस व तिहाड़ अधिकारियों को गुरुवार को नोटिस जारी किया।

विकास ने अपनी बहन भारती यादव के विवाह में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत मांगी है। भारती का विवाह एक नवंबर को है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने तिहाड़ जेल के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और 20 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। इन अधिकारियों को नोटिस जारी कर विकास द्वारा तिहाड़ में बिताए गए दिनों की संख्या का ब्यौरा मांगा गया है।

विकास के वकील सुमित वर्मा ने दलील दी थी कि एक नवंबर को भारती का विवाह है और बड़े भाई होने के नाते घर पर विकास की उपस्थिति जरूरी है। वर्मा ने शिवानी भटनागर हत्याकांड मामले का उदाहरण भी दिया, जिसमें मुख्य आरोपी आरके शर्मा को उसकी बेटी के विवाह के लिए जमानत दी गई थी। वर्मा ने कहा कि हत्या के अन्य संवेदनशील मामलों में दोषियों को पारिवारिक समारोहों में शामिल होने के लिए जमानत दी जाती है और उनका मुवक्किल अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए जमानत का हकदार है।

उत्तर प्रदेश के विवादास्पद राजनीतिज्ञ डीपी यादव के पुत्र विकास तथा उसके चचेरे भाई विशाल यादव को भारती के अंतरंग मित्र नीतीश कटारा का अपहरण तथा उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। विकास और विशाल को नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में दोषी ठहराते हुए निचली अदालत ने पिछले साल 28 मई को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

दोनों ने 17-18 फरवरी 2002 की रात को एक आईएएस अधिकारी के पुत्र नीतीश का गाजियाबाद में एक विवाह समारोह से अपहरण किया था और फिर उसकी हत्या कर दी थी। दोनों ही नीतीश और भारती के संबंधों के खिलाफ थे और इसीलिए उन्होंने नीतीश की हत्या की थी। नीतीश की मां नीलम ने आशंका जताई थी कि उत्तर प्रदेश में उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दिल्ली में करने के आदेश दिए थे।

घटना के बाद भारती ब्रिटेन चली गई और बार-बार तलब किए जाने के बाद भी मामले में गवाह के तौर पर गवाही देने नहीं आई। अंतत: अदालत ने भारती के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया और 2006 में उसे बयान दर्ज कराने आना पड़ा। विकास और विशाल 2002 में गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में हैं और उन्हें जमानत नहीं मिल सकी।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ की गई उनकी अपील पर सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय में की जानी चाहिए। लेकिन उनकी यह अपील भी खारिज कर दी गई।

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