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किशनगंगा परियोजना पर पाक को बातचीत का न्यौता

किशनगंगा परियोजना पर पाक को बातचीत का न्यौता

भारत ने पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा बिजली परियोजना पर बातचीत का न्यौता दिया है। पाकिस्तान ने यह मामला विश्व बैंक के समक्ष उठाने की धमकी दी थी।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि सिंधु जल आयुक्त जी रंगनाथन ने इस बारे में पाकिस्तान के अपने समकक्ष सैयद जमात अली शाह को पत्र भेजकर उन्हें इस मसले पर बातचीत के लिए बुलाया है। पाकिस्तान द्वारा इस परियोजना को लेकर विश्व बैंक का दरवाजा खटखटाने की धमकी दिए जाने के कुछ माह बाद रंगनाथन ने यह पत्र भेजा है। 1960 की सिंधु जल संधि में विश्व बैंक तीसरा पक्ष है, जिसके तहत भारत-पाक जल विवाद आता है।

सूत्रों ने बताया कि अपने पत्र में रंगनाथन ने इस बात पर जोर दिया है कि इस मसले में विश्व बैंक का दरवाजा खटखटाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसे मिल बैठकर द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अभी तक इस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कई दौर की द्विपक्षीय बातचीत विफल होने के बाद पाकिस्तान ने विश्व बैंक का दरवाजा खटखटाने की धमकी दी थी। पाकिस्तान किशनगंगा पर बिजली परियोजना के निर्माण का विरोध कर रहा है। उसका दावा है कि यह सिंधु जल संधि का उल्लंघन है, लेकिन भारत इस बात को अस्वीकार करता रहा है।

तीन सौ तीस मेगावाट की इस परियोजना पर काम 1994 में शुरू हुआ था। पाकिस्तान ने इस पर तत्काल विरोध जताया था। गतिरोध दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी। इस परियोजना की क्षमता बढ़कर 990 मेगावाट की जा सकती है।

सिंधु जल संधि के तहत, साझा नदियों में से तीन नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब पर पाकिस्तान का और सतलुज, रावी तथा व्यास पर भारत का विशेषाधिकार है। किशनगंगा झेलम नदी की सहायक नदी है। पाकिस्तान का आरोप है कि नदी के बहाव का रुख बदलने से नीलम [झेलम] नदी की उसकी कृषि तथा पनबिजली परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा। सीमा के दूसरी ओर झेलम नदी ही नीलम नदी के नाम से जानी जाती है।

पाकिस्तान की चिंता के मद्देनजर भारत ने 2006 में परियोजना की समीक्षा की और इसे जल संग्रहण परियोजना [स्टोरेज प्रोजेक्ट] से बदल कर बहते पानी से बिजली उत्पादन करने वाले संयंत्र की परियोजना [रन ऑफ रीवर प्लांट] कर दिया। पाकिस्तान को जून 2006 में इसकी जानकारी दे दी गई। इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए जब जल संसाधन सचिव यूएन पंजियार से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया संधि के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया गया है। किशनगंगा पनबिजली परियोजना संधि के प्रावधानों के अनुरूप ही है।

पूर्व में, जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर निर्माणाधीन बगलिहार विद्युत परियोजना को लेकर भी मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान ने विश्व बैंक का रुख किया था। पाकिस्तान को इस परियोजना के तहत बनाए जाने वाले बांध के डिजाइन और उंचाई को लेकर आपत्ति थी। विश्व बैंक ने एक तटस्थ विशेषज्ञ के तौर पर रिचर्ड लफीते की नियुक्ति की थी। लफीते ने दोनों देशों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बातचीत की थी और बांध स्थल जा कर मुआयना किया था। गहन विचारविमर्श के बाद लफीते ने 2007 में डोडा जिले में निर्माणाधीन इस 440 मेगावाट की परियोजना को, बांध की उंचाई घटाने के लिए कुछ सुझावों के साथ मंजूरी दे दी।

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