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लक्ष्मीजी को बुलाएं अपने द्वार

लक्ष्मीजी को बुलाएं अपने द्वार

लक्ष्मी जी सौभाग्य, सम्पत्ति एवं वैभव की देवी मानी जाती हैं। पुराणों के अनुसार लक्ष्मी की कृपा मात्र से दीन, हीन और असहाय लोग निहाल और मालामाल हो जते हैं। भला सुख-समृद्धि बरसाने वाली मां लक्ष्मी की कृपा कौन नहीं पाना चाहेगा। यही कारण है कि दीपावली के दिन, जो कि लक्ष्मी (कमला) का जन्मदिन है, लोग धूमधाम से लक्ष्मी का पूजन करते हैं। यही कारण है कि अमावस्या की काली रात भी दीपों के प्रकाश से जगमगा उठती है। रात्रि की शांति आतिशबाजी से गुंजयमान हो जाती है।

दीपावली पूजन का मुहूर्त
‘स्थिरलग्ने पूजयेल्लक्ष्मीम’ रुद्रयामल तन्त्र के वचनानुसार घर-परिवार एवं व्यापार में लक्ष्मी का स्थायी अर्थात सदैव निवास रहे, इसलिए दीपावली के दिन प्रदोषकाल एवं स्थिर लग्न में लक्ष्मीजी का पूजन किया जता है। दि. 17 अक्तूबर 2009 को दीपावली के दिन कुंभ लग्न, वृष लग्न एवं सिंह लग्न- ये तीनों स्थिर लग्न हैं। इस पर्व के दिन कुम्भ लग्न दिन में 2.51 से 4.20 बजे तक, वृष लग्न सायं 7.20 से 9.15 तक और सिंह लग्न रात्रि में 1.54 से 4.10 बजे तक रहेगी। यह समय दीपावली पूजन का उत्तम मुहूर्त है।

पूजा की सामग्री
दीपावली के पूजन में निम्नलिखित 24 वस्तुओं का उपयोग होता है— शुद्धजल/गंगाजल, पंचामृत, इत्र, मौली (कलावा), जनेऊ, रोली/चन्दन, चावल, हल्दी, सिन्दूर, कमलगट्टा, फूलमाला, धूपबत्ती/अगरबत्ती, दीपक, रुई, देशी घी, तेल, मिठाई, मेवा मिÞश्री, फल, पान, सुपाड़ी, लौंग-इलायची, खील-बताशे और सोने/चांदी के सिक्के।

दीपावली पूजन
धनतेरस के अगले दिन ‘रूप चौदस’ को उबटन लगा कर स्नान
और घर की सफाई कर सायंकाल 11 या 14 दीपक जलाये जाते हैं। सुख-सम्पत्ति को देने वाली मां लक्ष्मी की पूज दीपावली के दिन प्रदोषकाल/स्थिर लग्न में की जती है। कुछ लोग यह पूज लाभ, शुभ एवं अमृत चौघड़ियां में भी करते हैं। दीपावली पूजन के लिए शुद्ध/पवित्र वस्त्र धारण कर अपने परिवार के साथ शुभ मुहूर्त में पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए और फिर अपने पास पूज-सामग्री सज कर अपने सामने चौकी या पट्टे पर लाल कपड़ा बिछा कर उस पर लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति, चांदी/सोने के सिक्के और कलश को स्थापित करना चाहिए। उसके बाद Þाद्धा एवं भक्ित के साथ Þश्री लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्तियों को गंगाजल एवं पंचामृत से स्नान करा कर  मौली, रोली, चन्दन, अक्षत, सिन्दूर, पुष्पमाला, धूप, दीप, नैवेद्य (मिठाई) पान, सुपाड़ी, लौंग, इलायची, खील, बताशे, फल एवं दक्षिणा से विधिवत पूजन करना चाहिए। तत्पश्चात कपूर से लघु आरती के बाद जने-अनजने में हुई त्रुटियों के लिए भक्ति भाव से प्रार्थना करनी चाहिए। फिर 16 या 21 दीये जलाने चाहिए। अन्त में मां लक्ष्मी जी की प्रधान आरती करनी चाहिए।

व्यापारिक प्रतिष्ठानों की पूजा
दुकान, फैक्टरी या कार्यालय में दीपावली पूजन के पहले उसके द्वार पर सिन्दूर एवं घी मिला कर अनामिका अंगुली से शुभ लाभ एवं स्वस्तिक बनाने चाहिए। आफिस या गद्दी की दीवार पर पूर्व या उत्तर की ओर सिन्दूर एवं घी से पंचदशी यन्त्र या बीसा यन्त्र बनाना चाहिए। ये यन्त्र व्यापार में वृद्धि, कज्रे से मुक्ति और सुख-समृद्धि देने वाले माने गये हैं।

बही-बसना पूजन
बसने पर रोली से स्वस्तिक बना कर उसमें हल्दी की गांठ, साबुत धनिया, कमलगट्टा, सुपाड़ी, अक्षत, दूर्वा एवं सिक्का डाल दें तथा बही के पहले या तीसरे पन्ने पर
रोली से स्वस्तिक एवं श्री बनाकर ‘ú शारदायै नम:’ मन्त्र से गन्ध, अक्षत, पुष्प, फल, पान एवं सुपाड़ी से पूजन करें।

कलम-दवात का पूजन
स्याही भरी दवात को अक्षत एवं पुष्पों पर रख कर उसमें तथा कमल में कलावा बांध कर ‘ú महाकाल्यै नम:’ मन्त्र से गन्ध, अक्षत, पुष्प एवं धूप आदि से पूजन करें।

गल्ला-तिजोरी का पूजन
गल्ला या तिजोरी में सिन्दूर एवं घी से स्वस्तिक बना कर ‘ú कुबेराय नम:’ मन्त्र से गन्ध, अक्षत, पुष्प, हल्दी की गांठ, कमलगट्टा, बताशे एवं नये सिक्कों से पूजन कर प्रार्थना करें—
ú धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।
भगवन् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादि सम्पदा।।
    
दीपावली का काजल
दीपावली पूजा के बाद सरसों के तेल के दीपक से रात्रि में काजल पारा जाता है ‘दीपज्योति समुत्पन्नं कज्जलं मोहनाशकम्’, आगम ग्रन्थों के अनुसार इस काजल को आंख में लगाने से मोह (व्यामोह) नष्ट हो जाता है।

 दीपावली के सिक्के
दीपावली की पूज में प्रयुक्त सोने/चांदी के सिक्के भौतिक लक्ष्मी के प्रतीक होते हैं। यह भौतिक लक्ष्मी, जिसको आम भाषा में ‘धन’  कहते हैं, जीवन की सबसे सार्थक चीज है, इसीलिए इस धन या अर्थ को वदिक परम्परा में जीवन के चार पुरुषार्थो में से एक माना गया है।

 जप के लिए सवरेपयोगी मन्त्र
’  ú गं गणपतये नम: ’ ú गं गणपतये सिद्धिं समृद्धिं कुरू स्वाहा ’ ú महालक्ष्म्यै नम: ’ ú धनाध्यक्षाय नम: ’ ú Þश्रीं ú ह्रीं क्लीं Þश्रीक्लीं विश्रेश्वराय नम:
इन मंत्रों का दीपावली की रात्रि में मनोयोग एवं श्रद्धापूर्वक जप करने से जीवन में सम्पन्नता आती है।

       पूजा के उपकरण          प्रतीक
1. Þश्री लक्ष्मी गणेश की मूर्ति   Þश्री लक्ष्मीगणेश 
2.  सोने/चांदी के सिक्के भौतिकलक्ष्मी
3.  नया बर्तन मां अन्नपूर्णा
4.  खील-बताशे प्रगति, विकास
5.  हटरी  देवलोक
6.  मिट्टी का चौघड़ा सम्पन्नता
7.  बही-खाते सरस्वती/शारदा
8.  कलम-दवात मां काली
9.   तराजू/कांटा धर्मराज
10. गल्ला/तिजोरी कुबेर
11. फैक्टरी की मशीन विश्वकर्मा
12. दीपक दिव्यज्योति

पूजा के उपकरण और उनके प्रतीक
वदिक कर्मकाण्ड में ‘प्रतीकवाद’ के अनुसार, हवन/पूजन का प्रत्येक उपकरण किसी न किसी देवता का प्रतीक होता है।

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