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रिसाइक्लिंग और दिवाली

दिवाली रिसाइक्लिंग का त्योहार है। मिठाई बनाने वाले लगभग इस अंदाज में मिठाई बनाते हैं, जैसे कंपोस्ट खाद बनाने की विधि ‘कृषि दर्शन’ में दिखाई जा रही हो। ‘कृषि दर्शन’ क्या है, यह आजकल के पाठकों को नहीं मालूम होगा इसलिए उनकी जानकारी के लिए यह बताना होगा कि यह दूरदर्शन का एक प्राइम टाइम प्रोग्राम था जो खेती के बारे में था। हो सकता है कि आजकल के पाठकों को यह बताना भी जरूरी हो कि खेती क्या है, लेकिन यह फिर कभी, यहां जगह नहीं है।

प्रसंगवश दूरदर्शन में दो कार्यक्रम आते थे, ‘कृषि दर्शन’ और ‘चित्रहार’, बाकी कार्यक्रम इन्हीं दोनों कार्यक्रमों को मिलाकर तरह-तरह से रिसाइकल करके बन जाते थे, जैसे प्राइवेट चैनलों पर एक सास बहू सीरियल और एक रियलिटी शो को रिसाइकल करके दिन भर के कार्यक्रम बन जाते हैं, बल्कि पड़ोस के न्यूज चैनल को भी दे आते हैं।

बहरहाल, मिठाई वाले पुरानी मिठाई, यूरिया, मिल्क पाउडर, चीनी, रंग, तेल, मोबिल आइल, मैदा, अरारोट वगैरा बनाकर नए डिब्बों में पेश करते हैं। इस मिठाई को खाने के पहले यही देख लेना चाहिए कि ज्यादा पुरानी न हो। इन रसायनों से हम हिंदुस्तानियों को कोई नुकसान नहीं होता, बशर्ते ज्यादा पुराने न हो। पुराने होने पर नुकसान हो सकता है।
  
हमारे एक मित्र ने दिवाली पर कुछ मिठाई खा ली तो उन पर ऐतिहासिक वस्तुओं को नष्ट करने की धारा में मुकदमा चल गया, क्योंकि पुरातत्ववेत्ताओं का दावा था कि वह मिठाई सबसे पहले 10वीं शताब्दी में बनी थी और हलवाई उसे तब से रिसाइकल करते आ रहे थे। ऐसे में ठीक यही रहता है कि आप भी मिठाई को रिसाइकल करें, चावला जी के यहां से आई मिठाई गोयल साहब को दे डालें और वर्मा जी के यहां से आया डिब्बा शर्मा जी को दे दें। संभव है कि माल असली मालिक के पास पहुंच जाए और वह नए सिरे से उसे बांटने का काम शुरू कर सके।

आजकल रिसाइक्लिंग की बड़ी चर्चा होती है। माना जाता है कि यह पर्यावरण के लिए अच्छा है। मैंने एक जगह पर ‘पुनश्चक्रीकृत’ शब्द पढ़ा, तो मुझे पता चला कि यह हिंदी में उसका अनुवाद है। इसलिए दिवाली के तोहफों का इस्तेमाल मत करिए, उनका पुनश्चक्रीकरण कीजिए। इससे आपको कोई नुकसान भी नहीं होगा और पर्यावरण भी अच्छा बना रहेगा। एक जिले में दिवाली पर डीएम के पास जितने मिठाई के डिब्बे आते थे, उन्हें वे टेंपों में लदवाकर मिठाई वाले की दुकान पर भिजवाकर नकद पैसा ले आते थे। हम यह तो नहीं कर सकते, मगर जो कर सकते हैं, उतना तो करें।

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