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दर्द न बने दिवाली

आसमां से बातें करते राकेट, रंग बिखेरते अनार, हाथों में सुनहरे, जगमगाते रंगों की झड़ी लगाती फुलझड़ियां! सच है दीवाली का सुख सब की हंसी-खुशी और हिफाजत में ही है, इसलिए कुछ सरल सावधानियां अमल में लाना जरूरी है। बेहतर है कि आतिशबाजी का लुत्फ कहीं खुले मैदान में सभी मिलकर उठाएं। जिन्हें अनार या राकेट का शौक है, उन्हें जान लेना चाहिए कि दीवाली पर जलने के 80-90 प्रतिशत मामले अनार या राकेट हाथ जलाने से होते हैं।

- फुलझड़ियां जला रहे हैं तो पास में पानी भरी बाल्टी रखें और जली हुई फुलझड़ी उसी में डालें। फुलझड़ी की बची हुई जलती डंडी इधर-उघर फैंकने से कोई भी उससे जल सकता है।

- सावधानी के बावजूद कोई हादसा हो जाए तो घबराएं नहीं, बल्कि समझदारी से जले हुए व्यक्ति को फस्र्ट एड दें। इससे दुर्घटना की तीव्रता तो घटाई ही जा सकती है:  

- शरीर का कोई छोटा हिस्सा जलने पर जले हुए अंग को तुरंत सादे पानी में डुबा लें। इससे त्वचा से ऊष्मा खारिज हो सकेगी, दर्द से राहत मिलेगी और अंग जलने के बुरे असर से काफी हद तक बच सकेगा।

- अगर शरीर का कोई छोटा हिस्सा जला है और उस हिस्से में सिर्फ हलकी लाली है, तो घर पर ही इलाज हो सकता है। उस अंग को साफ-सुथरा रखें। उस पर वैस्लीन का हल्का सा लेप लगा लें।

- शरीर का बड़ा हिस्सा जल जाए तो चाहे वह सतही ही क्यों न मालूम हो, किसी बर्न्स विशेषज्ञ या सर्जन से राय जरूर ले लें।

- जले हुए अंग पर घी, मलहम या ग्रीस कदापि न लगाएँ। न ही मिट्टी या कीचड़ का लेप करें।
जलने से छाले पड़ने पर छालों से छेड़छाड़ न करें। न तो उन्हें फोड़ें, न ही उनमें सूई डालकर उन्हें पिचकाने की कोशिश करें।       
जारी..

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