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ट्रेनिंग की अहमियत

कई सर्वेक्षणों में यह बात सामने आई है कि सबसे ज्यादा कामयाब और अच्छी परफॉर्मेस देने वाले कर्मचारी वही होते हैं, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में खास प्रशिक्षण हासिल कर रखा है। इसमें कोई दोराय नहीं कि प्रशिक्षण से आपको क्षेत्र विशेष की जानकारी, हुनर और क्षमता में इजाफा जरूर होता है। प्रशिक्षित कर्मचारी किसी भी कंपनी के लिए सबसे बड़ी पूंजी होते हैं।

ट्रेनिंग में निवेश
खासकर मंदी के इस बदले माहौल में प्रशिक्षित कर्मचारियों की अहमियत और भी ज्यादा हो गई है क्योंकि आजकल जॉब मार्केट में प्रतिस्पर्धा और कड़ी हो गई है और प्रशिक्षित कर्मचारियों की सप्लाई मांग के मुकाबले काफी कम है। इसलिए यह समय हर कर्मचारी के लिए नई ट्रेनिंग लेने का है। कई कंपनियों में ट्रेनिंग देकर न केवल कर्मचारियों के हुनर और क्षमता को निखारा जाता है, बल्कि इसे ऐसे निवेश के तौर पर देखा जाता है, जिससे कंपनी का भविष्य और चमकदार हो सकता है क्योंकि ट्रेनिंग की वजह से कर्मचारियों में काम के प्रति लगन बढ़ती है, और वे पहले से बेहतर और ज्यादा काम करने के लिए मोटिवेट होते हैं।

एचआर विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार सीनियर मैनेजरों को न चाहते हुए भी महज इसलिए आउटसोर्सिग की जरूरत पड़ जाती है कि उनका स्टाफ किसी खास काम के लिए प्रशिक्षित नहीं है। ऐसे में अपने कर्मचारियों को ट्रेनिंग देना उस कंपनी की मजबूरी बन जाती है। आखिर किस कंपनी को ज्यादा कार्यकुशल और कंपीटीटिव स्टाफ की जरूरत नहीं होती? हालांकि कुछ कंपनियां ऐसी भी होती हैं, जो ट्रेनिंग को ऐच्छिक मानती हैं। उनका मानना है कि यह एक खर्चा है, जिससे जहां तक हो सके, बचना चाहिए। वे इसे एचआर डेवलप करने वाला निवेश नहीं मानते।

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