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नरेगा उद्योगों के दुश्मन: झुनझुनवाला

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डा भरत झुनझुनवाला ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए संस्‍कार की लोकप्रिय महात्मा गांधी ग्रामीण राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) को उद्योगों का दुश्मन करार देते हुए कहा है कि इससे उनकी श्रम लागत में इजाफा हो रहा है। 

झुनझुनवाला ने राम नगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की संगोष्ठी, पूर्वांचल में औद्योगिक विकास की संभावनायें और चुनौतियां में कल सरकारी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मनरेगा उद्योगों का सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे एक ओर जहां बेरोजगार (निकम्मे) हो रहे है वहीं उद्यमियों की श्रम लागत बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर सरकार उद्योगों को सब्सिडी देकर स्थाई रोजगार का सृजन कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें उद्योगों से अत्यधिक कर वसूलकर योजनाओं के जरिए नौकरशाही को समृद्ध करने में लगी हैं। सरकार को अफसरशाही पर चोट करनी चाहिए।
 
डा झुनझुनवाला ने सलाह दी कि श्रम सघन उद्योगों जैसे बनारसी साडी, गलीचा, जरदोजी, सिल्क और रेडीमेड के नए डिजाइन विकसित कर विशेष बाजारों पर कब्जा करना चाहिए। उनके अनुसार पूर्वांचल की विशेषता यह है कि यह जनसंख्या बाहुल्य है जो श्रमशक्ति के रूप में उद्योगों की जान है उन्होने कहा कि जनसंख्या बाहुल्य को देखकर यहां के उद्यमियों को घबराना नहीं चाहिए बल्कि सस्ते श्रम का इस्तेमाल करना चाहिए और उत्पादन बढाकर बाजार पर छाना चाहिए। संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्वी क्षेत्र के संयुक्त निदेशक उद्योग वी वी वाहन ने कहा कि पूर्वांचल में औद्योगिक विकास की असीम संभावनाएं हैं।

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  • Web Title:नरेगा उद्योगों के दुश्मन: झुनझुनवाला