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दीनू ने दिया जीवनदान

दीनू ने दिया जीवनदान

केरल राज्य में छोटी नदियों व जलाशयों की भरमार है। गांवों में नहाने-कपड़े धोने आदि कार्य इन्हीं जलाशयों पर होते हैं। जिला पलाक्कड़ में स्थित एक जलाशय पर 17 मई, 2008 को पुष्पलता अपने तीन बच्चों को लेकर स्नान व कपड़े धोने का कार्य करने के लिए गईं। वहीं पास में 14 वर्षीय दीनू के.जी. भी कपड़े धो रही थी। दोपहर का समय था। तीनों बच्चे जलाशय के किनारे खेलने लगे। एक जगह फिसलन थी, जिसे ऊधम मचाते बच्चों ने अनदेखा कर दिया। नतीजन, एक-एक करके तीनों बच्चे 15 फुट गहरे जलाशय में ज गिरे। उनको बचाने की खातिर पुष्पलता भी जलाशय में कूद गई। उनमें से किसी को भी तैरना नहीं आता था, अत: वे सभी पानी  में ऊपर-नीचे होने लगे। किशोरी दीनू से यह देखा नहीं गया। उसे थोड़ा तैरना आता था। उसने हिम्मत दिखाई व उनको बचाने के लिए वह भी जलाशय में कूद गई। पहले दीनू ने दो छोटे बच्चों को पकड़ा और उनको किनारे तक ले आई। वह फिर दोबारा पानी में उतरी। इस बार उसने पुष्पलता व उसकी बड़ी बेटी को बालों से पकड़ा व उनको खींचकर किनारे तक ले आई।
इस बीच शोर सुनकर कुछ पड़ौसी वहां जमा हो गए, लेकिन तब तक पुष्पलता व उसके तीनों बच्चे किनारे तक सुरक्षित पहुंच चुके थे। इस प्रकार दीनू की बहादुरी व हिम्मत से चार लोगों की जान बच गई। दीनू को सबने खूब सराहा। बहादुरी के इस प्रदर्शन के लिए दीनू को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार हासिल हुआ। बच्चो, तुम्हारे लिए संदेश यही है कि बहादुरी व हिम्मत दिखाने में कभी पीछे न रहना।

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