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ब्रिटिश जासूस व दिलफेंक था मुसोलिनी !

ब्रिटिश जासूस व दिलफेंक था मुसोलिनी !

द्वितीय विश्व युद्ध के समय इटली के तानाशाह रहे बेनिटो मुसोलिनी का नाम फासीवाद के जनकों में लिया जाता है, लेकिन एक खुलासे में यह दावा किया गया है कि वह ब्रिटिश जासूस एजेंसी एम-15 का सीक्रेट एजेंट था।

दस्तावेज के मुताबिक, मुसोलिनी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1917 में हुई। उस वक्त उन्हें एम-15 की तरफ से हफ्ते का 100 पाउंड मिलता था और उन्हें इसके लिए अपने अखबार इल पोपोलो दितालिया में युद्ध की हिमायत करनी होती थी।

`द टाइम्स' के अनुसार, कैंब्रिज के पीटर मार्टलैंड की अगुवाई में इतिहासकारों के एक दल ने मुसोलिनी की मत्यु के 64 साल बाद उनके और एम-15 के बीच के इस करार का पर्दाफाश किया है । मार्टलैंड ने कहा कि मुसोलिनी को प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। हम सब जानते हैं कि वह एक गजब का दिलफेंक था। ऐसी संभावना है कि उसपर काफी पैसे बहाए गए।

दस्तावेज में बताया गया है कि ब्रिटिश सांसद सर सैमुअल होर ने उसे एजेंट बनाने में कड़ी का काम किया था। बाद में सैमुअल विदेश मंत्री भी बनें, लेकिन 1917 में वह इटली में एम-15 के लिए काम कर रहे थे। एम-15 को मुसोलिनी से उम्मीद थी कि उसका अखबार औद्योगिक मजदूरों तक पहुंचेगा और हड़तालों को बंद कराने में सफल होगा और बोल्शेविकों को सत्ता से दूर करेगा।

ऐसी भी उम्मीदें हैं कि मुसोलिनी और डयूस 2 मिले भी थे, लेकिन इतिहासकारों का अनुमान है कि उसको मिल रहा पैसा ब्रिटेन के बजट पर भारी पड़ रहा था क्योंकि युद्ध में ब्रिटेन के 40 लाख पाउंड रोज खर्च हो रहे थे। मार्टलैंड के अनुसार मुसोलिनी का काम मिकी माउस का खेल नहीं था, लेकिन जब आप युद्ध हार रहे हों तब इतने पैसे देने का मतलब नही बनता।

हालांकि युद्धविराम के बाद मुसोलिनी ने वहां खूनी फासीवादी तानाशाही स्थापित की, वही होर सरकारी सेवा में कार्यरत रहे। 1935 में वह दोबारा मिले जब विदेश मंत्री के तौर पर उन्होंने होर-लवाल संधि पर हस्ताक्षर किया।

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