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बॉलीवुड स्टार्स, बचपन में इनकी दीवाली

बॉलीवुड स्टार्स, बचपन में इनकी दीवाली

..और मेरे बाल बच गए
अमीषा पटेल
जब मैं छोटी थी, तब दीवाली मनाने का मजा ही अलग था। दीवाली आने से पहले ही मेरी धमाचौकड़ी शुरू हो जाती थी, पटाखे-फुलझड़ी छुड़ाना शुरू कर देती थी। इसी चक्कर में एक बार जब मैं अनार जला रही थी तो मेरे बालों में भी आग लग गई थी। वह तो अच्छा हुआ कि कुछ लोगों ने मेरे बालों में आग लगे हुए देख लिया और जल्दी-जल्दी आग बुझई। अच्छा हुआ कि मेरे बाल जलने से बच गये, वरना मैं तो लेडी अनुपम खेर कहलाती (हंसते हुए)।

पटाखों से लगता है डर : दीपिका पादुकोण
जब मैं छोटी थी, तब मेरे डैडी मेरे लिये ढेर सारे पटाखे लाया करते थे और अच्छी-सी ड्रेस भी दिलाया करते थे, जिसे पहन कर मैं अपनी फ्रैंड्स के साथ दिवाली मनाती थी। मुङो खतरनाक पटाखों से बहुत डर लगता है, इसलिये मैं फुलझड़ी और हल्के-फुल्के पटाखे ही छुड़ाना पसंद करती थी। आज भी मैं दीवाली उतने ही जोश के साथ मनाती हूं। दीवाली पर आज भी खास तौर पर अच्छी-सी ड्रेस सिलवाती हूं और पूरी Þाद्धा के साथ लक्ष्मी मां की पूजा करती हूं तथा घर में घी के दीये भी जलाती हूं।

जब डैडी की डांट पड़ी: ऋतिक रोशन
बचपन में मैं कुछ ज्यादा ही शरारती था और दीवाली आई तो समझो मैं पागल ही हो जाता था। दीवाली के एक हफ्ते पहले से ही मेरा अपने दोस्तों के साथ पटाखे छुड़ाना शुरू हो जाता था। ऐसे ही एक बार दीवाली पर जब मैं रॉकेट छुड़ा रहा था तो वह रॉकेट हमारे घर के बगल में रहने वाली आंटी के घर मे घुस गया और उनके नये परदे जल गये। उसके बाद जब आंटी ने मेरे डैडी से शिकायत की तो मुङो डैडी ने बहुत डांटा और कहा कि बेटा, आगे से ध्यान रखना कि अपने मजे के लिये किसी का नुकसान नहीं होना चाहिये। उसके बाद से मैंने दीवाली पर रॉकेट छुड़ाने से तो तौबा ही कर ली ।

खूब मिठाई खाती हूं: एशा देओल
बचपन से ही मैं लड़की कम लड़कों की तरह रफ एंड टफ ज्यादा हूं, इसलिये दीवाली पर भी मैं अपने ग्रुप के साथ रस्सी बम और राकेट जैसे खतरनाक पटाखे छुड़ाना पसंद करती हूं। मेरी मम्मी मुङो खतरनाक पटाखे छुड़ाने के लिये हमेशा डांटती थीं, यह कह कर कि एक दिन मैं अपना हाथ जला लूंगी। और सचमुच एक बार पटाखे छुड़ाने में मेरा हाथ जल गया तो मुङो मम्मी की कही बात याद आई। उसके बाद मैंने पटाखे छुड़ाने तो नही छोड़े, लेकिन खतरनाक पटाखे छुड़ाने से परहेज करने लगी। दीवाली पर मैं बचपन से लेकर आज तक मिठाई खाने में कोई परहेज नहीं करती। ढेर सारी मिठाई खाती हूं।

हम लोग बहुत ज्यादा शरारती थे
जॉनी लीवर
दीवाली पर बचपन में जब तक हम किसी कुत्ते को पटाखे छुड़ा कर डरा कर परेशान नहीं कर लेते थे, तब तक मेरे  दोस्तों को और मुङो चैन नहीं आता था। हम लोग बहुत ज्यादा शरारती थे और मस्तीखोर भी थे। मुङो आज भी याद है, जिस चाल में मैं रहा करता था, वहां एक खडूस बुड्ढा रहा करता था, जो हम बच्चों को बिना वजह डांटता रहता था।
वही बुड्ढा मेरे घर के सामने खटिया डाल कर सोया करता था। दीवाली के दिनों में ही एक बार हम बच्चों ने उसकी खटिया के नीचे पटाखों की लड़ी लगा दी। जब वे पटाखे बजने शुरू हुए तो उस बूढ़े ने भड़भड़ा कर नाचना शुरू कर दिया। उसे कॉमेडी डांस करते देख कर वहां उपस्थित सभी लोग हंसने लगे। आज जब मैं अपनी बचपन की शरारतों को सोचता हूं तो मुङो लगता है कि मैं कितना ज्यादा शैतान था।

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