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भारत का पलटवार, पीओके में गतिविधियों से बाज आए चीन

भारत का पलटवार, पीओके में गतिविधियों से बाज आए चीन

पाक अधिकृत कश्मीर में जारी परियोजनाओं में चीन की शिरकत पर विरोध जताते हुए भारत ने चीन से दोनों देशों के दीर्घकालिक रिश्ते को देखते हुए इन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

अरुणाचल प्रदेश में मंगलवार को हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौरे का चीन द्वारा विरोध जताने के ठीक एक दिन बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि चीन पाक अधिकृत कश्मीर में जारी परियोजनाओं में भागीदारी करना जारी रखेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने एक बयान में कहा, पाकिस्तान 1947 से ही भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के एक हिस्से पर कब्जा किए हुए है। चीन भारत की स्थिति और पाक अधिकृत कश्मीर में जारी परियोजनाओं में चीन की संलिप्तता से उपजी उसकी चिंता से भलीभांति वाकिफ है।

उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि चीन दोनों देशों के रिश्ते को दीर्घकालिक नजरिए से देखेगा और पाकिस्तान द्वारा अवैध तरीके से कब्जा किए हिस्से में जारी इन गतिविधियों पर रोक लगाएगा। उल्लेखनीय है कि कल चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी की मुलाकात के दौरान जिंताओ ने दोनों देशों को एक दूसरे से जोड़ने वाले काराकोरम मार्ग के स्तर में सुधार करने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना और पाक अधिकृत कश्मीर में नीलम-झेलम पनबिजली परियोजना में भी मदद करने का आश्वासन दिया है।

जिंताओ ने कहा कि बेशक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदल रही हैं, लेकिन पाकिस्तान और चीन के लोग हमेशा आपस में हृदय से जुड़ रहे हैं।

चिदंबरम ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस जैसे दलों का अपना रुख है और हमारा प्रयास रहेगा कि इन सभी राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों से बातचीत करें। अलगाववाद की वकालत करने वाले समूहों से भी बातचीत की कोशिश रहेगी ताकि किसी ऐसे समाधान की तलाश की जा सके जो संभवत: अनूठा हो।

उन्होंने कहा कि ऐसा समाधान जो जम्मू-कश्मीर के एक काफी बड़े तबके के लोगों के लिए सम्मानजनक और स्वीकार्य हो। गृह मंत्री ने कहा जम्मू-कश्मीर की अनूठी भौगोलिक स्थिति और अनूठा इतिहास है। हमें ऐसा समाधान खोजना है जो संभवत: अनूठा हो।

चिदंबरम ने कहा अनूठे समाधान में कुछ भी गलत नहीं है लेकिन हमें ऐसा समाधान खोजना होगा जो जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर लोगों के लिए सम्मानजनक और स्वीकार्य हो तथा अधिकतर लोग जिसका स्वागत करें। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, गृह मंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे पर फंसना नहीं चाहते। उन्होंने माना कि जम्मू-कश्मीर में समस्या है और इसके राजनीतिक समाधान के प्रयास किए जाएंगे।

राज्य की सीमा पर सुरक्षा हालात के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि राज्य में हिंसा के लिए पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर से भारतीय भूभाग में होने वाली घुसपैठ जिम्मेदार है। गृह मंत्री ने कहा कि घुसपैठ पर पूरी तरह नियंत्रण मुश्किल है, क्योंकि पड़ोसी देश के साथ लगने वाली सीमा और नियंत्रण रेखा काफी लंबी है।


चिदंबरम ने कहा कि अर्धसैनिक बलों की मदद से जम्मू-कश्मीर पुलिस शांति बनाए रखने के लिए प्रयासरत है। सेना की भूमिका अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा नियंत्रण रेखा की सुरक्षा की है। गृह मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ माह के दौरान सुरक्षा बलों को सीमा पर घुसपैठ रोकने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि उग्रवादी युवाओं को चुनते हैं, उनको भारत में जेहाद करने और हिंसा फैलाने के लिए उकसाते हैं। फिर उग्रवादी समूहों में सीमा से इस पार आते हैं। सुरक्षा बल उग्रवादियों की घुसपैठ रोकने के लिए हरसंभव और बेहतर प्रयास कर रहे हैं।


चिदंबरम ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने पिछले छह माह के दौरान कथित उग्रवादी कमांडरों को मार गिराया है, जिससे घुसपैठ में कमी आई है। पाकिस्तान द्वारा घुसपैठियों को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कराने में विफल होने के कारण पैदा हो रही हताशा का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा कि राज्य की स्थिति को देखते हुए वहां तैनात किए जाने वाले अर्धसैनिक बल की संख्या तय की जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य से अर्धसैनिक बलों को हटाया नहीं जाएगा। शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग के लिये वे उपलब्ध रहेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात में काफी सुधार हुआ है और इस साल के पहले छह माह में हुई हिंसा की घटनाओं की संख्या पिछले आठ नौ साल के मुकाबले सबसे कम है।


चिदंबरम से पूछा गया कि क्या कश्मीर संबंधी कार्य समूहों की सिफारिशों पर कार्यान्वयन नहीं किया जा रहा है। इस पर असहमति जताते हुए गह मंत्री ने कहा कि उनके सुझावों को कश्मीर योजना में शामिल किया जा रहा है।

कश्मीर संबंधी कार्य समूहों का गठन प्रधानमंत्री की जम्मू कश्मीर यात्रा के बाद किया गया था। गृह मंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक पुनर्निर्माण योजना के तहत संचालित विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी तथा उनके कामकाज में तेजी लाने के लिए एक व्यवस्था बनाई जा रही है।

नकली नोटों के वितरण को बड़ा खतरा न मानते हुए चिदंबरम ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, एक लाख रूपये में एकाध नोट नकली होता है और यह इतना बड़ा खतरा नहीं है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सके।

नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर से तथा नेपाल की सीमा से नकली नोटों की तस्करी होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस पर अंकुश लगाने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में लागू सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) के मुद्दे पर चिदंबरम ने कहा कि इसमें किए जाने वाले संशोधनों के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार है। एक बार मंजूरी मिल जाने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू होगा।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा राज्य में राजनीतिक मतभेद होंगे, विभिन्न राजनीतिक दल होंगे और अलग-अलग विचार भी होंगे, जिनमें से कुछ को कट्टरपंथी समझा जा सकता है।

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