DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नई फसल की जमीन

तमाम विवादों के बीच कुछ ही बरस पहले हमने खेती की दुनिया में एक नई खिड़की खोली थी। भारत में जब बीटी कॉटन की खेती की इजाजत दी गई तो इसे लेकर तरह-तरह के शक शुबहे और आशंकाएं थीं। यह डर उस समय काफी ज्यादा था कि बॉयो तकनीक से उगी फसलें हमारी जमीन, खेत, मवेशी और न जाने क्या-क्या नष्ट कर देंगी। पर आज इसी बीटी कॉटन की वजह से भारत की गिनती दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादकों में होने लगी है। वह भी तब जब इस दौरान कपास की खेती का रकबा ज्यादा नहीं बढ़ा है। इस बीटी कॉटन की अकेली सिफत यही है कि वह कीट प्रतिरोधक है। इस बातों को इस घड़ी याद करने की जरूरत सिर्फ इसलिए है, क्योंकि सरकार देश में बीटी बैंगन की व्यावसायिक खेती की इजाजत देने जा रही है। और वे तमाम आशंकाएं और विवाद जो पहले बीटी कॉटन के लिए खड़े हुए थे, अब वे फिर बीटी बैंगन के लिए भी सर उठाने लगे हैं। यह फिर से कहा जाने लगा है कि भारत को बीटी फसलों की कतई जरूरत नहीं है, यहां तो परंपरागत खेती ही होनी चाहिए। ऐसे में एक नजर देश में खेती-बाड़ी की ताजा स्थिति पर डालनी भी जरूरी है। पिछले कई साल से देश के उद्योग जब दस फीसदी से ज्यादा विकास दर से तरक्की कर रहे हैं तो कृषि की विकास दर दो फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ सकी है। कारण कई और भी हैं, लेकिन देश की ग्रामीण आबादी की गरीबी और पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण यही है। इस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती कृषि की उत्पादकता बढ़ाना ही है। इसके पहले ऐसा संकट तब आया था, जब अपनी खाद्यान्न की जरूरतों के लिए आयातित अनाज के भरोसे हो गए थे। इस संकट से हरित मुक्ति हमें हरित क्रांति ने दिलवाई थी। सीधे प्रयोगशाला से निकलकर गेंहू की जो फसल उस समय हमारे खेतो में लहलहाई थी, उसने किसानों ही नहीं देश की अर्थव्यवस्था को एक नया आत्मविश्वास दिया था। बीटी फसलों का रास्ता हमें फिर से वही आत्मविश्वास दे सकता है, इसलिए उसके स्वागत की जरूरत है। बीटी फसलों में खतरे हो सकते हैं, लेकिन उससे बचने के, इन फसलों के प्रभावों के समुचित ट्रायल के इंतजाम किए जाने चाहिए। लेकिन खतरों से डरकर मंजिल को बिसरा देना समझदारी नहीं है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नई फसल की जमीन