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जड़ी-बूटी उत्पादन को तैयार किए जाएं किसानः दास

जिला विज्ञान मंच (यू-कोस्ट) के तहत एक दिवसीय बौद्धिक संपदा अधिकार कार्यशाला में भौगोलिक संकेतकों के संरक्षण पर लंबी चर्चा हुई। कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रमों के जरिए कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए विधायक चंदन राम दास ने कहा कि यू-कोस्ट के जरिए गांव-गांव में व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है। लोगों को जड़ी-बूटियों पर आधारित उत्पादन को बढ़ावा देने की सोच डाली जाए।

विधायक ने कहा कि जड़ी-बूटियों के उत्पादन से जहां किसानों की आय में वृद्धि होगी वहीं हर्बल प्रदेश का सपना भी साकार होगा। सरकार इस पर मुक्त हस्त से धन दे रही है। उत्तराखंड की पहचान जड़ी-बूटी को बनाने के लिए जिला विज्ञान मंच का सराहनीय कदम हो सकता है। विशिष्ट अतिथि जिला जज जयदेव सिंह ने कानून के बारे में जानकारी दी। जीबी पंत विश्वविद्यालय के डॉ.कमलजीत चावल ने कहा कि देश में प्राकृतिक, निर्मित, कृषि, उद्यान अथवा अन्य उत्पादों को बौद्धिक संपदा संरक्षण के तहत भौगोलिक संकेतक अधिनियम 1999 के तहत संरक्षित करने का प्राविधान है। उन्होंने भौगोलिक उपदर्शन, उपदर्शनों के उदाहरण, पंजीकरण, उत्पादक का दर्जा किस प्रकार निर्धारित होता है, कृषि संबंधी उत्पाद, प्राकृतिक संपदाओं से जुड़े उत्पाद आदि के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम को रंगारंग बनाने के लिए कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने नृत्य, नाटक, कुमाऊंनी और गढ़वाली संगीत से समां बांध दिया। इस मौके पर प्राचार्य डॉ.जेसी गड़कोटी, जिला समन्वयक डॉ.एमपी सिंह, डॉ.एन पुनेठा, वैज्ञानिक डॉ.राजीव पांडे, डॉ. एचएस चावला, डॉ.सुरेंद्र सिंह धपोला, विजय लूथरा आदि ने विभिन्न विषयों की जानकारी दी।

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