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रिवर्स मोर्गेज ब्याज

अमूमन बुढ़ापे में आय सीमित हो जाती है। इस उम्र में व्यक्ति के लिए आíथक जरूरतें पूरी करने के कुछ गिने-चुने विकल्प ही रह जाते हैं। ऐसे में पेंशन, जमा-पूंजी और ब्याज सरीखे कुछ ऑप्शन ही बचते हैं और इनमें से अधिकांश के पास कोई एक ही विकल्प होता है। वर्तमान में बुजुर्गो के लिए रिवर्स मोर्गेज एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है। रिवर्स मोर्गेज एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें सीनियर सिटिजन को उसके घर के बदले प्रति माह पेमेंट मिलती है, वह अपने मकान के एवज में बैंक या किसी एचएफसी को गिरवी रख सकता है। बुजुर्ग उस मकान में रह सकते हैं। इस स्कीम से बुजर्गों को अपनी रोजमर्रा की जरूरत के लिए पैसा मिलता रहता है। इस सुविधा का विदेशों में पहले काफी प्रचलन था, जिसमें व्यक्ति कैश एकत्र करने के लिए परेशान होने के बजाए लिक्विडिटी होने पर आनंद का जीवन व्यतीत करता था। साथ ही उन लोगों के लिए भी बेहतर सुविधा है जिनके पास प्रॉपर्टी तो है लेकिन कैश नहीं। 2007-08 के यूनियन बजट में रिवर्स मोर्गेज का प्रस्ताव लाया गया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रिवर्स मोर्गेज के लिए कुछ नियम बना रखे हैं।
ल्ल जो व्यक्ति 60 वर्ष की उम्र पार कर चुका है, वह अपनी प्रॉपर्टी की वैल्यू का 60 प्रतिशत तक लोन बैंक और एचएफसी से अधिकतम 15 वर्ष तक के लिए ले सकता है। साथ ही उसे इस दौरान घर में रुकने का पूरा अधिकार है।
ल्ल प्रत्येक 5 वर्ष में संपत्ति की बदलती वैल्यू का मूल्यांकन बैंक और एचएफसी को करना होगा।
ल्ल लोन का उपयोग वह प्रॉपर्टी बनाने, उसके रंगरोगन, मरम्मत में कर सकता है। लेकिन इसका इस्तेमाल ट्रेडिंग के काम में कतई नहीं कर सकता।

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