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कवियों ने किया श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध

चौधरीखोला में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में अल्मोड़ा तथा अन्य स्थानों के प्रतिष्ठित कवियों ने भाग लिया।

काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रवक्ता तथा प्रसिद्ध साहित्यकार चारू चन्द्र पाण्डेय ने दिल्ली से मोबाईल पर कविता पाठ कर किया। तत्पश्चात् कवियित्री बीना चतुर्वेदी ने अपनी कविता 'रात मावस की धनेरी, जगमगाते दीप जगमग' गाकर समस्त श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद कवि मधुकर उप्रेती ने अपनी कविता 'नहीं पहनती आज द्रोपदी 6 गज की अब सारी' गाकर महिलाओं में घटते वस्त्रों के प्रचलन पर कटाक्ष किया। वहीं विनोद तिवारी ने शिक्षा विभाग में पड़ रही छापेमारी से पर 'गुणी बानर स्याव चिथरौव, यौ जंगल राज में बणी गयी पतरौव' कविता गाकर अपनी व्यथा प्रकट की। प्रसिद्ध रंगकर्मी तथा कवि गिरीश चन्द्र तिवारी गिर्दा ने नैनीताल से मोबाईल पर अपनी कविता 'वक्त जाने में कुछ नहीं लगता, वक्त आने में वक्त लगता है' गाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।


इसके साथ ही गोष्ठी में रतन सिंह किरमोलिया, प्रो.शेर सिंह बिष्ट, डॉ.महेन्द्र मेहरा, एसएसजे परिसर के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो.देव सिंह पोखरिया, डॉ.दीवा भट्ट, प्रो.केसी जोशी, प्रफुल्ल पंत, आनन्द सिंह बिष्ट, कंचन तिवारी, प्रेम प्रकाश पंत, लीला खोलिया, भीम सिंह बगडवाल ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को हंसाया तथा समाज में व्याप्त बुराईयों और कुरीतियों पर कटाक्ष कर लोगों को इस ओर सोचने पर मजबूर कर दिया।

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