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गुजारा भत्ते पर बहाना अब नहीं चलेगाः गिरीजा

गुजारा भत्ते पर बहाना अब नहीं चलेगाः गिरीजा

राष्ट्रीय महिला आयोग के विचार में कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी को इस आधार पर गुजारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकता कि उसके पास भत्ता देने के लिए पर्याप्त साधन नहीं है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास के अनुसार इस संबंध में सरकार को अगले महीने सिफारिश भेजी जाएगी, ताकि कानून में आवश्यक संशोधन किया जा सके।

गिरिजा ने संवाददाताओं को बताया कि कर्नाटक विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बीएल मलिमथ के अनुसार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(1) के तहत कोई व्यक्ति पर्याप्त साधन का अभाव दिखाकर अपनी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता, इसलिए इस धारा के अंतर्गत पर्याप्त साधन के उपबंध को हटाया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने सीआरपीसी की धारा 125-127 में संशोधन करने के लिए नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इण्डिया यूनिवर्सिटी, बैंगलुरू के साथ मिलकर एक सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें महिलाओं के लिए कुछ सुझाव उभर कर आए। व्यास ने कहा कि इस सम्मेलन में आई सिफारिशों को नवंबर के पहले सप्ताह में सरकार के पास भेज दिया जाएगा।

सम्मेलन में कहा गया कि धारा 125(1) (बी) का दायरा बढ़ाते हुए इसमें अब गोद लिए बच्चों, सौतेले माता-पिता और दादा दादी को भी शामिल करने के लिए सरकार से आग्रह किया जाएगा। अभी तक इस धारा में वैध और अवैध बच्चे ही शामिल हैं।

व्यास ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 126 के तहत माता-पिता और बच्चे अभी तक उस स्थान पर रहने के लिए वाद दायर नहीं कर पाते थे, जहां वह पहले रहते थे। लिहाजा इस धारा में भी परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सीआरपीसी की धारा के चैप्टर नौ में भी बदलाव करते हुए पत्नी, माता-पिता और बच्चों के गुजारे के लिए नए तरीके से अलग श्रेणी बनाई जानी चाहिए।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरीजा व्यास ने बताया कि अभी तक महिलाओं के मामलों के निपटारे में काफी समय लग जाता है। ऐसे में निर्णय सुनाए जाने तक उसके लिए जीवन यापन करना बेहद कठिन हो जाता है। इसको देखते हुए आयोग सरकार से यह मांग करेगा कि महिलाओं से संबंधित मामलों की सुनवाई निश्चित अवधि के भीतर की जानी चाहिए।

सुनवाई की समय सीमा क्या हो, इस संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा पांच सुनवाई में ऐसे मामलों का निपटारा हो जाना चाहिए, लेकिन सुनवाई की समय सीमा को लेकर अभी भी कुछ तय नहीं किया जा सका है। जल्द ही इसकी अवधि भी तय करने की कोशिश की जाएगी। व्यास ने कहा कि अब अविवाहित बेटियों के गुजारे के लिए भी प्रावधान करने की सिफारिश आई हैं और इस बाबत सरकार से आग्रह किया जाएगा।

एयर इंडिया में विमान परिचारिका से हुए छेड़छाड़ के मामले में हुई प्रगति के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आयोग अभी संबंधित पक्षों से पूछताछ कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महीने भर के भीतर ही इस मामले का निपटारा कर लिया जाएगा।

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