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भारत-ईयू व्यापार समझौते में हो सकता है विलंब

भारत-ईयू व्यापार समझौते में हो सकता है विलंब

यूरोपीय संघ पर जलवायु परिवर्तन और सामाजिक विषमता जैसे मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जोड़ने को लेकर पड़ रहा है, जिससे भारत और 27 देशों के इस समूह के साथ मुक्त व्यापार समझौते में विलम्ब होना तय लगता है।

यूरोपीय संसद की सदस्य लीना कोलारस्का बोबिनस्का ने यहां यूरोपीय संघ के मुख्यालय पर आए भारतीय संवाददाताओं से कहा कि मैं भारत की समस्या से पूरी तरह अवगत हूं। मैं पोलैंड से आती हूं जहां यूरोपीय संघ के रुख और देश के औद्योगिक हित में मतभेद है, लेकिन हमें इन मुद्दों के हल के लिए बातचीत करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ भारत को न केवल आर्थिक बल्कि लोकतंत्र के स्थायित्व के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र मानता है। 27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा जलवायु परिवर्तन और सामाजिक विषमता को व्यापार से जोड़ने को लेकर दिए जा रहे दबाव से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत का नतीजा आने में विलंब होगा। एफटीए पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी। भारत और ईयू के बीच 2007-08 में कुल 73 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था।

भारत सामाजिक और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को व्यापार के साथ जोड़े जाने का पुरजोर विरोध करता रहा है। भारत का कहना है कि इन मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

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