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अमेरिकी कंपनियों से मिली रिश्वत की जांच कर रही सरकार

अमेरिका की कुछ कंपनियों की ओर से कुछ भारतीय प्रतिष्ठानों को गैर-कानूनी धन दिए जाने के मामले में भाजपा और माकपा जैसे दलों के शोर के बीच सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह इस मामले की तह तक जाने के लिए जांच का आदेश पहले ही दे चुकी है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि इस बारे में अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर का एक पत्र मई में मिला था। उस समय देश में लोकसभा चुनाव चल रहे थे। सूत्रों ने कहा कि जैसे ही (चुनाव के बाद) नई सरकार ने काम संभाला तो इस मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए गए और इसके सभी पहलुओं की जांच कराई जा रही है।

मीरा शंकर ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव टीकेए नायर को लिखा था कि महाराष्ट्र राज्य विद्युत परिषद, भारतीय रेल, और केंद्रीय कीटनाशक औषधि बोर्ड जैसे कई प्रतिष्ठानों को विभिन्न अमेरिकी कंपनियों ने धन दिया है। अमेरिका ने अपनी इन कंपनियों के खिलाफ विदेशों में भ्रष्टाचार करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। इन कंपनियों में मारियो कोविना (महाराष्ट्र विद्युत परिषद), वेस्टिंगआउस एयरब्रेक टेक्नोलॉजीज् कोर्पोरेशन (भा.रे.) और डाऊ केमिकल्स (केंद्रीय कीटनाशक औषधि बोर्ड) जैसे नाम शामिल हैं।

भाजपा ने कल भारतीय राजदूत का पत्र जारी करते हुए सरकार के रवैए की आलोचना की और कहा, सरकार भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल रही है। माकपा ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस मामले की जांच करे ओर दोषी अमेरिकी फर्मों को काली सूची में डाले।

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