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अरुणाचल पर फिर बोला चीन, भारत ने जताया कड़ा ऐतराज

अरुणाचल पर फिर बोला चीन, भारत ने जताया कड़ा ऐतराज

अरुणाचल प्रदेश में नई सरकार चुनने के लिए चुनाव के मौके पर चीन ने एक बार फिर राज्य पर अपना दावा जताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरुणाचल यात्रा पर आपत्ति जताई, जिसे भारत ने तत्काल खारिज कर दिया।

चुनाव प्रचार के लिए मनमोहन की अरुणाचल यात्रा के दस दिन बाद चीन ने इस पर प्रतिक्रिया करने के लिए चुनाव के दिन चुना और कहा कि वह चीन की गंभीर चिंता की अवहेलना करते हुए भारतीय नेता की विवादित क्षेत्र की यात्रा से काफी असंतुष्ट है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मा झाओशू ने कहा कि हम भारतीय पक्ष से चीन की गंभीर चिंता का समाधान करने और विवादित क्षेत्र में परेशानी खड़ी न करने की मांग करते हैं, ताकि चीन और भारत के रिश्तों में एक स्वस्थ विकास हो सके। उन्होंने उल्लेख किया कि चीन और भारत ने कभी आधिकारिक रूप से सीमांकन नहीं किया और भारत-चीन सीमा के पूर्वी हिस्से पर बीजिंग का दावा पूरी तरह साफ और स्पष्ट है।

चीन के बयान की खबर जैसे ही आई, भारत में चीनी राजदूत झांग यान नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक स्थित विदेश मंत्रालय की ओर रवाना हो गए जहां वह चीन मामलों के प्रभारी संयुक्त सचिव विजय गोखले से मिले, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों के बीच क्या बात हुई।

इधर विदेश मंत्री एसएम कष्णा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरुणाचल यात्रा पर चीन की आपत्ति को यह कहकर खारिज कर दिया कि राज्य भारत का अखंड हिस्सा है। कष्णा ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। हम इसपर कायम हैं। दूसरे क्या कहते हैं इससे कोई मतलब नहीं है। भारत सरकार का रुख है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न भाग है।

विदेश मंत्रलय ने एक बयान भी जारी किया और मनमोहन की अरुणाचल यात्रा पर चीनी आपत्ति पर निराशा तथा चिंता जताई। विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और चीन इससे वाकिफ है। उन्होंने कहा कि चीन का बयान सीमा मुददे पर दोनों देशों की सरकारों के बीच जारी चर्चा प्रक्रिया में मदद नहीं करेगा।

चीन का बयान आज ऐसे समय आया है जब उसने अरुणाचल प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए एशियाई विकास बैंक [एडीबी] से मिलने वाले ऋण में बाधा डालने के ताजा प्रयास किए हैं। चीन ने पिछले महीने निर्वासित तिब्बती नेता दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा पर भी आपत्ति व्यक्त की थी।

चीन ने पिछले साल भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरुणाचल यात्रा पर आपत्ति जताई थी। मनमोहन ने चीन यात्रा से लौटने के कुछ दिन बाद पिछले साल एक फरवरी को अरुणाचल की यात्रा की थी। उस समय मनमोहन ने एक सभा में अरुणाचल के संदर्भ में कहा था कि यह हमारी उगते सूरज की धरती है। चीन ने मनमोहन के इस बयान पर आपित्त व्यक्त की थी। पिछले साल चीन की आपत्ति के जवाब में तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि अरुणाचल हमारे देश का एक अखंड हिस्सा है, इसलिए यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री देश के किसी भी हिससे की यात्रा करेंगे।

भारत का कहना है कि चीन ने जम्मू-कश्मीर के 43 हजार 180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है, जबकि चीन का आरोप है कि भारत ने चीनी क्षेत्र की 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर अपना कब्जा कर रखा है, अधिकांश अरुणाचल प्रदेश में।

चीन के आज के बयान पर भारत ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि मतभेदों के चलते द्विपक्षीय रिश्तों का सकारात्मक विकास प्रभावित नहीं हो। भारत ने उम्मीद जताई कि चीन इसी तरह इस सोच को मानेगा। विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने इस बात को रेखांकित किया कि चीन का इस तरह का बयान सीमा के मुद्दे पर दोनों सरकारों के बीच चल रही बातचीत की प्रक्रिया में सहयोगात्मक नहीं है। प्रकाश ने कहा कि भारत चीन के साथ मतभेदों को निष्पक्ष, व्यावहारिक और आपसी स्वीकार्य तरीके से हल करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि राज्य के लोग भारत के नागरिक हैं और वे भारत के गतिमान लोकतंत्र की मुख्यधारा में गौरवपूर्ण भागीदार हैं। चीनी पक्ष भारत सरकार की इस स्थिति से भलीभांति अवगत है।

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