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प्रियदर्शिनी भी डोपिंग की दोषी, आईडब्ल्यूएफ पर संकट

प्रियदर्शिनी भी डोपिंग की दोषी, आईडब्ल्यूएफ पर संकट

शैलजा पुजारी और विक्की बत्ता के बाद प्रियदर्शिनी के डोपिंग में पकड़े जाने से भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) पर फिर से एक साल का प्रतिबंध लगने का खतरा मंडराने लगा है, जिससे भारतीय भारोत्तोलकों का अगले साल यहां होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने का सपना चकनाचूर हो सकता है।

आईडब्ल्यूएफ के महासचिव बीआर गुलाटी ने पुष्टि की है कि महाराष्ट्र की महिला भारोत्तोलक प्रियदर्शिनी को भी प्रतिबंधित दवा के सेवन का दोषी पाया गया है। उनके मुताबिक प्रियदर्शिनी को पुणे में सात और आठ अगस्त में हुए ट्रायल के दौरान डोप टेस्ट में पॉजीटिव पाया गया है। नाडा (राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी) की रिपोर्ट के अनुसार इस भारोत्तोलक को डोप का असर मिटाने के लिए दवा लेने का दोषी पाया गया है।

गुलाटी ने लगातार तीसरे भारोत्तोलक के डोपिंग में पकड़े जाने पर आईडब्ल्यूएफ पर प्रतिबंध लगने के संबंध में बात करने से इंकार कर दिया, लेकिन महासंघ के सूत्रों ने बताया कि आईडब्ल्यूएफ को एक साल का प्रतिबंध झेलना पड़ सकता है।

सूत्रों ने कहा कि प्रियदर्शिनी को पहली बार डोपिंग में पकड़ा गया है इसलिए उन पर दो साल का प्रतिबंध लग सकता है। अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ के नियमों के अनुसार वाडा या राष्ट्रीय डोपिंग एजेंसी के परीक्षण में एक साल में तीन खिलाड़ियों के पॉजीटिव पाए जाने पर महासंघ पर एक साल का प्रतिबंध लग सकता है। अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन के नियमों के अनुसार किसी भी देश के तीन खिलाड़ियों के एक साल के अंदर डोपिंग में पकड़े जाने पर उसके महासंघ पर एक साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। आईडब्ल्यूएफ एक लाख डॉलर जुर्माना भरने की दशा में ही प्रतिबंध से बच सकता है।
 
इससे पहले नाडा ने बेंगलुरु में ट्रायल के दौरान शैलजा पुजारी को जबकि विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने विक्की बत्ता को डोपिंग का दोषी पाया था। अगर आईडब्ल्यूएफ पर प्रतिबंध लगता है तो फिर भारतीय भारोत्तोलक अगले साल तीन से 14 अक्तूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भाग नहीं ले पाएंगे, जिसमें भारत को पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

यही नहीं नियमों के अनुसार डोपिंग के हर मामले में महासंघ पर 5000 डॉलर का जुर्माना किया जाता है और ऐसे में आईडब्ल्यूएफ को 15 हजार डॉलर का जुर्माना भी भरना होगा। आईडब्ल्यूएफ पर इससे पहले भी दो बार प्रतिबंध लगाया गया था। उस पर आखिरी बार 2006 में शैलजा पुजारी, बी प्रमिलावल्ली, एडविन राजू और तेजिंदर सिंह के पॉजीटिव पाए जाने पर एक साल का प्रतिबंध लगा था। यह प्रतिबंध छह महीने बाद 50 हजार डॉलर का जुर्माना भरकर हटा दिया गया था।
      
इस बीच सूत्रों ने बताया कि शैलजा पुजारी ने अभी तक अपने बी नमूने के परीक्षण के लिए आवेदन नहीं किया है। अगर वह दो दिन के अंदर आवेदन नहीं करती है तो उन पर आजीवन प्रतिबंध लग सकता है।

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