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पाक के परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर लगे सवालिया निशान

पाक के परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर लगे सवालिया निशान

पाकिस्तान में सेना मुख्यालय पर आतंकवादियों के दुस्साहसिक हमले ने यह आशंका बढ़ा दी है कि विद्रोही देश के परमाणु प्रतिष्ठान पर भी हमला कर सकते हैं।

पाकिस्तान हालांकि तालिबान या आतंकवादियों से अपने परमाणु हथियारों की सुरक्षा की बात कह चुका है कि लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी परमाणु हथियार पांच साल पहले की तुलना में अब कम सुरक्षित हैं और शनिवार का हमला पाकिस्तानियों के चिंताजनक अति आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है।

एक पश्चिमी अधिकारी ने कहा कि हालांकि जटिल सुरक्षा व्यवस्था स्थापित है, लेकिन काफी कुछ पाक सेना और इस बात पर निर्भर करेगा कि चरमपंथियों के लिए घुसपैठ कर पाना कितना कठिन होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर नजर रखनी पड़ेगी कि कहीं प्रतिष्ठानों में वैज्ञानिक के रूप में आतंकवादियों के साथ सहानुभूति रखने वाले लोग काम न कर रहे हों और वे चरमपंथियों तक सूचनाएं न पहुंचा रहे हों। एशिया कार्यक्रम के प्रमुख गरेथ प्राइस ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि तालिबान अचानक हमला कर परमाणु प्रतिष्ठानों पर कब्जा कर सकते हों।

अमेरिका के एक परमाणु प्रसार रोधी अधिकारी ने वाशिंगटन में कहा कि वहां मजबूत सुरक्षा मानक हैं और यह मानने का कोई कारण नहीं है कि परमाणु भंडार पर आतंकवादियों का कब्जा हो जाएगा।
 अधिकारी ने कहा कि किसी परमाणु प्रतिष्ठान पर हमला करने और उसे जब्त करने तथा अंदर रखी परमाणु सामग्री को इस्तेमाल करने में एक बहुत बड़ा अंतर है।

पाकिस्तान के एकांत इलाकों में स्थित परमाणु प्रतिष्ठानों में सेना मुख्यालय से अधिक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था मानी जाती है। फेडरेशन ऑफ अमेरकन साइंटिस्टस की परमाणु सूचना परियोजना के प्रमुख हैंस क्रिस्टींसन के अनुसार ऐसा अनुमान है कि पाकिस्तान के पास 70 से 90 परमाणु हथियार हैं।

पाकिस्तान के सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड यूनिवर्सिटी के शाउन ग्रेगरी ने कहा कि आतंकवादी सरगोधा स्थित एक वायु सेना के प्रतिष्ठान के नजदीक हमला कर चुके हैं, जहां संभवत: परमाणु मिसाइलें रखी हैं। आतंकवादी वाह कैंटोनमेंट पर भी हमला कर चुके हैं जहां के बारे में माना जाता है कि वहां परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मिसाइलों को असेंबल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमलों से ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वे परमाणु हथियारों को निशाना बनाने के लिए किए गए। ग्रेगरी ने सेंटीनेंटल पत्रिका के जुलाई के अंक में लिखा था कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बलों के कर्मियों को तैनात रखता है और ये विस्फोट करने वाले तत्वों से अलग कर अलग-थलग रखे गए हैं।

ग्रेगरी ने कहा कि हथियारों के उपकरण भूमिगत स्थलों में सुरक्षित कर रखे गए हैं। हथियार इलेक्ट्रानिक रूप से लॉक हैं, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि आतंकवादियों के हाथों में जाने की स्थिति में वे फट न सकें।

अमेरिका और ब्रिटेन की सरकारों का मानना है कि परमाणु हथियारों के आतंकी हाथों में जाने का थोड़ा सा जोखिम है, लेकिन ग्रेगरी का कहना है कि खतरे के काफी सबूत हैं। पाकिस्तानी सेना में शामिल कई लोगों के अलकायदा से संबंध हैं और वे 11 सितंबर 2001 के हमलों के कथित मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद जैसे आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने में मददगार रहे हैं ।

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस तरह के किसी भी तर्क को खारिज किया है कि आतंकवादी पाक सरकार को उखाड़ सकते हैं और परमाणु भंडार पर कब्जा कर सकते हैं।

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