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पुराने दोस्त से रक्षा संबंध मजबूत करने रूस पहुंचे एंटनी

पुराने दोस्त से रक्षा संबंध मजबूत करने रूस पहुंचे एंटनी

रक्षा मंत्री एके एंटनी द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूती प्रदान करने के एजेंडे के साथ मंगलवार को मास्को पहुंच गए हैं। रक्षा मंत्री मास्को में एक बेहद महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा आयोग की बैठक में भाग लेंगे जहां दोनों देशों के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के संबंध में तकनीकी मापदंडों और रक्षा निवेश समेत सामरिक हथियारों के क्षेत्र में नए संयुक्त उद्यम को अंतिम रूप दिया जाएगा।

अपने तीन दिवसीय रूस दौरे के दौरान रक्षा मंत्री एंटनी अपने रूसी समकक्ष अनातोली सेर्दियुकोव से आमने सामने बातचीत करेंगे और सैन्य तकनीकी सहयोग (आईआरआईजीसी) एमटीसी, पर भारत-रूस अंतर सरकारी आयोग की वार्ताओं में भागीदारी करेंगे। यह दोनों देशों के बीच चल रही रक्षा परियोजनाओं में आपसी समन्वय के लिए शीर्ष इकाई है।

गौरतलब है कि एंटनी की यह रूस यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कई महत्वपूर्ण भारत-रूस रक्षा परियोजनाओं को पूरा करने में देरी हो रही है। इनमें विमान वाहक पोत गोर्शकोव तथा परमाणु पनडुब्बी अकुला द्वितीय की सुपुर्दगी शामिल हैं।

इस बारे में रूसी पक्ष देरी की खबरों को नजरअंदाज करने के प्रयास में कह रहा है कि पिछले दो वर्ष में स्थितियां काफी बदल गयी हैं तथा परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है।

एंटनी के इस दौरे के दौरान हालांकि किसी नए रक्षा समक्षौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है लेकिन दोनों पक्षों द्वारा आधुनिक हथियार प्रणाली के क्षेत्र में नए संयुक्त उद्यम की संभावनाओं को तलाशे जाने की उम्मीद है।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि सैन्य उपकरणों की खरीद के संबंध में भारत ने विभिन्न देशों से संपर्क की शुरूआत की है लेकिन सर्वाधिक आधुनिक और संवेदनशील रक्षा तकनीक के लिए अभी उसका मुख्य स्रोत रूस ही बना हुआ है।

हाल ही में स्वदेशी तकनीक पर आधारित परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को भारत के सर्वाधिक गोपनीय एडवांस टेक्नोलोजी वैसल प्रोजेक्ट के तहत उतारना, आकुला श्रेणी की नेरपा परमाणु हमलावर पनडुब्बी को लीज पर देना, ब्रहमोस क्रूज मिसाइल तकनीक और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को संयुक्त रूप से विकसित करने जैसी परियोजनाएं रूस द्वारा भारत को दी गयी सर्वाधिक आधुनिक परियोजनाओं का उदाहरण हैं।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि अन्य सहयोगियों के विपरीत रूस ने कभी भी भारत को उसकी मांगी गयी तकनीक देने से इनकार नहीं किया। सादगी को बढ़ावा देने और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के केन्द्र सरकार के अभियान के तहत एंटनी नियमित उड़ान से यहां पहुंचे। वह आईआरआईजीसी एमटीसी की नौवीं वार्षिक बैठक की सह अध्यक्षता करेंगे।

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