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परमाणु बम : अब्दुल कादिर खान ने उगला सच

लंदन का ‘संडे टाइम्स’ एक अत्यंत ही प्रतिष्ठित समाचारपत्र है। उसमें कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार साइमन हैंडरसन ने गत 20 सितम्बर को पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर खान के बारे में जो कुछ लिखा है, वह सचमुच चौंकाने वाला है।

उन्होंने लिखा है कि 2004 की एक ठंडी रात में एमस्टरडम में ढेर सारी डच पुलिस और गुप्तचर अधिकारी एक फ्लैट के पास जमा हो गए। दनादन घंटियां बजी। जब दरवाजा नहीं खुल रहा था तो वे उसे तोड़ने को आमादा हो गए। उस फ्लैट में अब्दुल कादिर खान के भाई अपनी पत्नी और पुत्री के साथ रह रहे थे। वे बूढ़े हैं और पाकिस्तानी इंटरनेशनल एयरलाइन्स से रिटायर करके एमस्टरडम में अपने रिटायरमेंट के दिन चुपचाप शांति से बिता रहे हैं।

बूढ़े होने के कारण उन्हें दरवाजा खोलने में समय लग गया। परंतु जैसे ही दरवाजा खुला पुलिस अफसरों ने उनके परिवार के सदस्यों को घेर लिया और उनकी बेटी से कहा कि वह पत्र कहां है जो उसे विदेश से आया है। कादिर खान की भतीजी कौसर खान पहली मंजिल पर गई और अपने ड्रार से वह लिफाफा निकाला जो उसे उसके चाचा ने पाकिस्तान से भेजा था। लिफाफा बंद था और खोला तक नहीं गया था।

कौसर खान से कड़ी पूछताछ हुई। पुलिस अफसरों ने बार-बार उनसे पूछा कि उन्होंने यह लिफाफा खोला क्यों नहीं था। जवाब था कि उससे फोन पर कहा गया था कि वह इस पत्र को सुरक्षित स्थान पर रख दे। समय आने पर उसे बता दिया जाएगा कि यह पत्र किसे देना है। अब्दुल कादिर खान को सन् 2003 में जब यह डर सताने लगा कि पाकिस्तान के हुक्मरान सच को छिपाने के लिए उनकी हत्या करा सकते हैं तब उन्होंने एक पत्र अपनी डच पत्नी हैंडरीना को लिखा, जिसमें विस्तार से यह बताया कि पाकिस्तानी सरकार और फौज के आला अफसरों के निर्देश पर ही पाकिस्तान का परमाणु बम तैयार किया गया था और फिर उन्हीं के इशारे पर परमाणु बम की तकनीक उत्तर कोरिया, ईरान और लीबिया को दी गई।

पत्रकार हेंडरसन की जान पहचान अब्दुल कादिर खान से बहुत पुरानी थी। हेंडरसन ने लिखा है कि जब उन्हें अब्दुल कादिर खान का हेंडरीना के नाम लिखे पत्र की कॉपी मिली तो वे यह देखकर हैरान रह गए कि उसमें पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक ने अपनी पत्नी और पुत्री को यह आदेश दिया था कि यदि उनके साथ कोई दुर्घटना हो जाए तो किसी तरह इस पत्र की कॉपी साइमन हेंडरसन तक पहुंचा दी जाए। उस पत्र में हेंडरसन के टेलीफोन नम्बर, फैक्स नम्बर, मोबाइल नम्बर और ई-मेल का पता दिया हुआ था।

हेंडरसन ने लिखा है कि उसे इस पत्र की कॉपी सन् 2007 में मिली। जब अमेरिका को कादिर खान की हरकतों का पता चला। उस समय परवेज मुशर्रफ देश के राष्ट्रपति थे। परवेज मुशर्रफ ने कादिर खान से कहा कि उनके बच कर निकलने का एक ही रास्ता है कि वे यह कबूल कर लें कि उन्होंने उत्तर कोरिया, ईरान और लीबिया को परमाणु बम की तकनीक अपनी इच्छा से दी उसमें पाकिस्तान सरकार या पाकिस्तान के किसी फौजी अफसर का हाथ नहीं था। केवल दिखावे के लिए उन्हें उनके घर में नजरबंद कर दिया जाएगा।

उस हालत में न तो उन्हें अमेरिका को सौंपा जाएगा और न अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को। कादिर खान ने वैसा ही किया और जब अमेरिका का दबाव राष्ट्रपति मुर्शरफ पर बहुत अधिक बढ़ गया तब कादिर खान को ऐसा लगने लगा कि कहीं अमेरिका को और पश्चिम के संसार को सच का पता नहीं लग जाए, इसलिए हो सकता है कि पाकिस्तान सरकार उनकी हत्या करा दे। इसी कारण उन्होंने अपनी पत्नी और पुत्री को अलग-अलग पत्र लिखा।

इस पत्र से दो-तीन बातें स्पष्ट हो जाती हैं। एक तो यह कि चीन ने सबसे पहले पाकिस्तान को परमाणु बम बनाने की तकनीक दी। चीन जानता था कि पाकिस्तान इस तरह का परमाणु बम अंतत: भारत के खिलाफ ही इस्तेमाल करेगा। दूसरा सत्य यह है कि उत्तर कोरिया को कहकर चीन ने पाकिस्तान को मिसाइल की टेक्नोलॉजी प्रदान कराई। यह एक अत्यंत ही गंभीर बात थी। क्योंकि चीन यह जानता था कि यदि पाकिस्तान परमाणु बम बना भी ले तो जब तक उसके पास ‘डिलीवरी सिस्टम’ नहीं होगा, वह इस तरह के बम को भारत के किसी शहर पर नहीं गिरा सकेगा।

अब विश्व समुदाय का यह कर्तव्य है कि वह अब्दुल कादिर खान को अविलंब पाकिस्तान से निकाले। अमेरिका और सीआईए उनसे कड़ी पूछताछ करे और यह पता लगाए कि यह घिनौना काम आखिर हुआ कैसे?

लेखक पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं

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