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144 साल बाद दुर्लभ योग काल में दीपावली

144 साल बाद इस बार दीपावली पर ऐसा अवसर आ रहा है जब कई ग्रह नीच राशि में जा रहे हैं। साथ ही बृहस्पति वक्री होकर गुरु चाण्डाल योग बना रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि यह दीपावली काल सर्प योग में पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस तरह के योग में लोगों को अग्नि दुर्घटना के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। दीवाली की रात कवच सिद्ध करने वाले साधकों के लिए यह दीपावली विशेष फलदायी होगी।

पद्मेश इंस्टीटयूट ऑफ वैदिक सांइसेज के निदेशक पं. केए दुबे ‘पद्मेश’ ने बताया कि लम्बे समय के बाद विचित्र योगों के साथ यह दीपावली पर्व मनाया जाएगा। दीवाली के पावन पर्व पर मंगल नीच राशि में, बृहस्पति वक्री होकर नीच राशि में जा कर गुरु चाण्डाल योग बना रहा है। इतना ही नहीं शुक्र नीच राशि में और यहाँ तक कि सूर्य भी दीपावली के महानिशिथकाल में नीच राशि में प्रवेश करेगा।

सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे। शनिवार की दीपावली, चतुर्दशीयुक्त अमावस्या, वैधृति योग और कन्या राशि में यह पर्व दुर्लभ योगकाल में होगी। इसमें खास यह भी है कि यह दीपावली कालसर्प योग में होगी। हर राशि का व्यक्ति इन योगों से प्रभावित होगा।

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