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गैर शाकाहारियों की थाली पर भी महँगाई की मार

शाकाहारियों की ही नहीं गैर शाकाहारियों के भी मुँह का जायका महँगाई ने बिगाड़ रखा है। शाकाहारियों की थाली में आलू, प्याज व दाल पर महँगाई की मार है तो गैरशाकाहारियों के लिए लावारिस मानी जाने वाली छोटी मछली चेल्हवा के भाव भी आसमान पर हैं। रोहू दो सौ रुपये किलो के भाव पर बाजार में बिक रही है। लगभग सभी मछलियों के भाव पिछले साल के मुकाबले दो से चार गुना बढ़े हैं।

शहरी मांसाहारियों की रसोई में ज्यादातर छोटी मछली चेल्हवा, चाइना, केलपिया, टेंगर तथा रोहू की खपत रहती है। शहरियों को इन मछलियों की आपूर्ति रसूलाबाद, गऊघाट, दारागंज, सदियापुर व करेली के घाटों से होती है। सदियापुर शहर की बड़ी मछली मंडी है जबकि तेलियरगंज, कटरा, खुल्दाबाद, करेली, गऊघाट, मोतीमहल व केपी कालेज के पास मछली की छोटी बाजार हैं।

सूखे ने शाकाहारियों की रसोई पर चोट पहुँचाई तो गैरशाकाहारियों की रसोई भी अछूती नहीं रह सकी। इस साल खुदरा बाजार में चेल्हवा मछली 80, चाइना 80, केलापिया 60, टेंगर छोटी 75, टेंगर बड़ी 120 व रोहू 200 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है। पिछले साल ये मछलियाँ क्रमश: छह, 25, 20, 40, 50 व 60 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही थीं। मछली कारोबारी बाबा, सुधीर, सुरेश व छेदू बताते हैं कि सूखे के कारण मछली के भाव में तेजी है पर उत्पादन कम है।

दिन भर में सामान्यत: दो से तीन कुंतल मछली निकलने की बजाय इन दिनों उसकी आधी ही मछली निकल पाती है। सूखे के कारण गंगा के कछारी क्षेत्रों में पानी नहीं चढ़ सका जिससे मछलियाँ ठहर नहीं सकीं। जो मछलियाँ आईं भी वे पानी के साथ ही बह गईं। इस वजह से भावों में तेजी है। इन इलाकों से ही कोलकाता, सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी व मुरादाबाद को भी मछली आपूर्ति की जाती है।

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