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देश की सुरक्षा के लिए बने ठोस नीति : डॉ. जोशी

भारत को बाहरी और भीतरी खतरे से निबटने के लिए ठोस नीति बनानी होगी। देश पर दो तरह का खतरा मँडरा रहा है। दोनों ही गम्भीर हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री व वाराणसी से सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने सोमवार को यहाँ संवाददाताओं से बातचीत में यह राय जाहिर की।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में चीन द्वारा किया गया हथियारों का प्रदर्शन भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। वह लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में भारतीय भूभाग पर कब्जा करने की फिराक में है। डा. जोशी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इसे गम्भीरता से नहीं ले रहे हैं। सैन्य अधिकारियों में मतभेद पैदा हो गया है।

उन्होंने कहा कि चीन की इच्छा पूरे एशिया को दबा कर रखने की है लेकिन उसकी योजना में भारत सबसे बड़ी बाधा है। डॉ. जोशी ने कहा कि चीन, पाकिस्तान और म्याँमार के रास्ते भी देश में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है। उसकी मदद से ही पाकिस्तान ने परमाणु बम बना लिया।

भारत का यह दूसरा पड़ोसी मुल्क आतंकवादी भेज रहा है। बांग्लादेश की धरती भी भारत में आतंकियों को भेजने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। देश के भीतर नक्सलियों का बढ़ता आधार भी अच्छे संकेत नहीं हैं। वे जनतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में बाहरी और आंतरिक सुरक्षा मजबूत रखने के लिए ठोस नीति बनाना जरूरी हो गया है।

उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी संसद के शीतकालीन सत्र में यह मसला उठाएगी। डॉ. जोशी ने दोनों समस्याओं पर मनमोहन सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की माँग की। उन्होंने भाजपा के भीतर मचे घमासान के सवाल पर सिर्फ इतना ही कहा कि इससे पार्टी मजबूत होकर उभरेगी।

पार्टी में जल्द ही युवा चेहरों को सामने लाया जाएगा। राहुल गांधी के हालिया दौरों के बारे में डॉ. जोशी ने कहा कि यह तो बाद में पता चलेगा कि आखिर इतनी मेहनत के पीछे कौन सा राज है। डॉ. जोशी के साथ बारा के विधायक उदयभान करवरिया और नरेंद्र देव पांडेय भी मौजूद थे।

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