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प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में परीक्षार्थी बेहतर प्रबंधक बनने का सपना मन में संजोए कैट की परीक्षा में बैठते हैं। दिन-ब-दिन यह क्षेत्र बड़ा होता जा रहा है और इसके प्रोग्राम भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में मैनेजमेंट की तैयारी करने वाले हर छात्र को देश भर में संचालित कोर्स के बारे में जानकारी होनी चाहिए जिससे वह अपने मुफीद प्रोग्राम का चयन कर सकें।

भारत में मैनेजमेंट प्रोग्राम
यूं तो एमबीए में एक, दो, डेढ़ और तीन वर्ष की अवधि के एमबीए प्रोग्राम संचालित होते हैं, लेकिन हम अपना फोकस दो वर्षीय फुल टाइम पोस्ट ग्रेजुएट एमबीए प्रोग्राम पर करेंगे।
1. दो वर्षीय फुल टाइम प्रोग्राम
2. एक वर्षीय फुल टाइम एमबीए प्रोग्राम (कभी 15 माह का)
3. तीन वर्ष का पार्ट टाइम एमबीए प्रोग्राम
4. पत्रचार कोर्स (सामान्यत: तीन वर्ष के)
5. एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम- एक से 13 हफ्तों के बीच

दो वर्षीय फुल टाइम प्रोग्राम : भारत में ज्यादातर अभ्यर्थी दो वर्षीय फुल टाइम एमबीए कोर्स करते हैं। एमबीए करने के लिहाज से इस प्रोग्राम को सबके लिए मुफीद माना जाता है। देश में मैनेजमेंट के कई संस्थान हैं जिनमें दाखिला कैट, मैट, जेट, स्नैप, यूपीएमकैट जैसी प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से मिलता है।

डिप्लोमा और डिग्री में अंतर
स्वायत्त संस्थाएं सामान्यत: दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम कराती हैं। जबकि विश्वविद्यालय एमबीए डिग्री प्रदान करते हैं। स्वायत्त संस्थाएं, मास्टर डिग्री नहीं देतीं, यह पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम) और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (पीजीडीबीए) देती हैं। इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट जो एक स्वायत्त बॉडी है और किसी भी विश्वविद्यालय से संबद्ध नहीं है, पीजीडीएम कोर्स ऑफर करती है।

मैनेजमेंट कोर्स की वैल्यू इस आधार पर नहीं मानी जाती कि आपने डिग्री या डिप्लोमा कर रखा है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है, कि संस्थान की छवि कैसी है और उन्हें किस संस्थान से मान्यता मिली है, उसकी क्वालिटी कैसी है, कौन सा संस्थान कोर्स ऑफर कर रहा है।

स्पेशलाइजेशन : ज्यादातर मैनेजमेंट संस्थान मैनेजमेंट के जनरल कोर्स ऑफर करते हैं। स्पेशलाइज्ड कोर्स मसलन मार्केटिंग, फाइनेंस, एचआर में छात्र विशेष क्षेत्रों के बेसिक के बारे में पहले वर्ष में जानकारी प्राप्त करता है। दूसरे वर्ष में आप इनमें से किसी एक क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। सामान्यत: छात्र स्पेशलाइजेशन के बारे में एडमिशन लेने से पहले निश्चय नहीं करते हैं, लेकिन एस.पी. जैन सरीखे कॉलेजों में छात्रों से एडमिशन लेने से पहले स्पेशलाइजेशन के बारे में पूछा जाता है।

एक वर्ष (एग्जीक्यूटिव एमबीए) का फुल टाइम एमबीए प्रोग्राम : पिछले पांच सालों में भारत में एक वर्षीय एमबीए का स्कोप तेजी से बढ़ा है। प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस अपने यहां तीन वर्ष से ज्यादा कार्यानुभव के लोगों को एक वर्ष के प्रोग्राम में दाखिला देता है। कुछ आईआईएम अपने रेगुलर पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम कोर्स के अलावा अनुभवी लोगों को एक वर्ष के प्रोग्राम भी करवाते हैं।

तीन वर्ष के पार्ट टाइम प्रोग्राम : यह प्रोग्राम ऐसे वर्किंग प्रोफेशनल के लिहाज से तैयार किया गया है, जो फुल टाइम एमबीए कोर्स करने में सक्षम नहीं है। इसको करने की न्यूनतम योग्यता दो वर्ष हैं। नारसी मुंजें, जमुनालाज बजाज जैसे संस्थान इस तरह के कोर्स करवाते हैं।

एग्जीक्यूटिव मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम : सामान्यत: देश में मैनेजमेंट के टॉप संस्थान एग्जीक्यूटिव और मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम करवाते हैं। ज्यादातर यह शॉर्ट टर्म कोर्स होते हैं, जिसकी अवधि एक हफ्ते से लेकर तीन हफ्तों तक होती है। इसमें प्रवेश के लिए मुख्यत: प्रवेश परीक्षा नहीं होती। जिस संस्थान में कैंडिडेट है, उसकी स्पांसरशिप के आधार पर उसे प्रवेश मिलता है।

योग्यता : ज्यादातर संस्थानों में एमबीए करने के लिए किसी भी क्षेत्र में स्नातक होना अनिवार्य है। डिग्री के बराबर किसी दूसरी क्वालिफिकेशन के छात्र को भी एमबीए में दाखिला मिल जाता है, बशर्ते वह किसी मान्यता प्राप्त संस्था से सत्यापित हो। अगर किसी छात्र को अपनी क्वालिफिकेशन के बारे में संदेह है, तो वह इसे संस्थान के माध्यम से प्रमाणित कर सकता है। मैनेजमेंट संस्थानों में दाखिला प्रवेश परीक्षा में परीक्षार्थी द्वारा अर्जित किए गए पर्सेटाइल के आधार पर होता है।

तकरीबन सभी मैनेजमेंट संस्थान उन अभ्यíथयों को ही प्रवेश देते हैं, जिन्होंने स्नातक में 50 फीसदी अंक प्राप्त किए हों। यहां तक कि कैट परीक्षा के माध्यम से आईआईएम में प्रवेश के लिए स्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) मुख्यत: देश भर के मैनेजमेंट संस्थाओं को रेगुलेट करती है।

बैच का आकार : बैच में छात्रों की संख्या 30 से लेकर 300 तक होती है। आईआईएम में एक बैच में सामान्यत: 300 लोग होते हैं, जिनको तीन और उससे ज्यादा सेक्शनों में बांट दिया जाता है। कुछ प्राइवेट संस्थानों में बैच संख्या 600 तक होती है।

समर इंटर्नशिप : सामान्यत: सभी बेहतर मैनेजमेंट संस्थानों में दो महीने की इंटर्नशिप होती है। इस इंटर्नशिप को छात्र उसके स्पेशलाइज्ड क्षेत्र के अनुरूप करता है। इसमें वह अपने क्षेत्र की बेसिक गतिविधियों का प्रैक्टिकल ज्ञान प्राप्त करता है। इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को कोई प्रोजेक्ट वर्क दिया जाता है, जिसको उन्हें संस्थान में जमा करना होता है।

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