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ओबीसी को अब एससी के बराबर फीस प्रतिपूर्ति

उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे पिछड़ी जाति और सामान्य वर्ग के गरीब विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अल्पसंख्यक गरीब विद्यार्थियों की तरह अब उन्हें भी शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत पूरी फीस दी जाएगी। शासन ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं।

अब तक पिछड़ी जाति तथा सामान्य वर्ग के गरीब विद्यार्थियों को राजकीय दर पर फीस दी जाती थी जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक गरीब विद्यार्थियों के लिए ऐसी बाध्यता नहीं थी। शिक्षण संस्था उनसे जितनी फीस लेती थी, वह पूरी फीस वापस की जाती थी। इस दोहरे मानक से पिछड़ी जाति तथा सामान्य वर्ग के गरीब विद्यार्थियों को काफी नुकसान हो रहा था।

शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक तथा सामान्य वर्ग के कक्षा 11 से मेडिकल, इंजीनियरिंग तक के गरीब छात्रों को फीस (प्रवेश शुल्क) की वापसी की जाती है। शासन ने पाँच नवंबर 2008 को आदेश जारी कर कहा था कि पिछड़ी जाति और सामान्य वर्ग के गरीब विद्यार्थियों को इस योजना के अंतर्गत उतनी ही फीस वापस की जाएगी, जितनी कक्षा 11 से मेडिकल, इंजीनियरिंग तक की कक्षाओं के लिए शासन ने (राजकीय दर) निर्धारित की है।

इसके उलट अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अल्पसंख्यक गरीब विद्यार्थियों को पूरी फीस मिलती थी। राजकीय दर और शिक्षण संस्थाओं की फीस में काफी अंतर है। मसलन, बीएड के लिए राजकीय दर 1588 रुपये प्रति छात्र प्रति वर्ष, बीटेक के लिए 25000 प्रति छात्र प्रति वर्ष है जबकि शिक्षण संस्थाएँ इससे अधिक फीस लेती हैं।

पिछड़ी जाति और सामान्य गरीब विद्यार्थियों को तो 1588 और 25 हजार मिल रहे थे जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अल्पसंख्यक गरीबों को इससे अधिक फीस दी जा रही थी। इस असमनता के खिलाफ कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी।

जिले में पिछड़ी जाति के गरीबों को फीस देने के लिए चार करोड़ रुपये मिले हैं। नए आदेश के तहत जब पूरी फीस वापस होनी है तो बजट की दिक्कत आएगी क्योंकि ये चार करोड़ रुपये तो किसी एक शिक्षण संस्था के लिए ही पर्याप्त नहीं होंगे। डीएम ने इस बारे में 14 अक्टूबर को बैठक बुलाई है।

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