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टीबी

टीबी से हजारों लोग दुनिया से कूच कर जाते हैं। सच यह है कि गिने-चुने मामलों को छोड़ अधिकांश मामलों में इसे जड़ से मिटाया जा सकता है। ज्यादातर मामलों में टीबी फेफड़ों में होती है, लेकिन गांठों, लिम्फ नोड, हड्डियों, जोड़ों और आंतों की टीबी भी होती है। यह पेट, यकृत, प्लीहा, मस्तिष्क और त्वचा में भी हो सकती है।

फेफड़ों, दिल और पेट के अंगों को घेरने वाली झिल्लियों में भी टीबी आम पाई जाती है, जिससे उनके भीतर पानी भर जाता है। प्लूरसी, पेरीकॉर्डियल इंफ्यूजन और ट्यूबरकुलर एसाइटिस की उत्पत्ति इसी प्रकार होती है। तपेदिक से जननांग भी पीड़ित हो सकते हैं। स्त्रियों में डिंब-ग्रंथियां, डिंबवाही नलियां और गर्भाशय में टीबी होने से प्रजनन क्षमता भी नष्ट हो सकती है। इसी प्रकार पुरुषों में भी अंड ग्रंथियां और दूसरे अंग टीबी से घिर सकते हैं।

लक्षण
चार हफ्तों से अधिक खांसी, हल्का बुखार जो खासकर शाम के समय होता है, रात में पसीना टूटना, भूख ना लगना, वजन घटना, हर समय थकान रहना, बलगम में खून, गर्दन में गांठें उभरना, आंतों में सूजन, पेट में पानी भर आना, ये सभी टीबी के लक्षण हो सकते हैं। 

लक्षणों के आधार पर टेस्ट करे जाते हैं। फेफड़ों की टीबी में सीने का एक्स-रे लिया जाता है, थूक-बलगम और खून की जांच होती है। गर्दन में गांठे हों तो कोशिकीय नमूना लेकर जांच की जाती है। छाती या उदर में पानी भर जाए, तो पानी निकालकर विश्लेषण होता है। आंतों की टीबी का शक होने पर बेरियम एक्स-रे या सी़टी़, मस्तिष्क की टीबी के शक में सी़टी़ या एमआरआई स्कैन, उदर और जनन प्रणाली की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड, रीढ़ के लिए एक्स-रे, सी़टी़ स्कैन और एमआरआई से मामला काबू में आता है।  जारी..

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