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प्रॉपर्टी खरीद

प्रॉपर्टी खरीदते वक्त कई तरह की औपचारिकताओं की पूर्ति करनी होती है जिनमें एग्रीमेंट सबसे महत्वूपर्ण चरण है। एग्रीमेंट लिखित दस्तावेज होता है, जिसमें दाम और शर्तो के बारे में बताया जाता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि एग्रीमेंट करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, क्योंकि इसमें जरा सी कोताही आपके लिए मुश्किल बन सकती है और साथ ही एग्रीमेंट द्वारा आप प्रॉपर्टी बेचने वाले द्वारा किए जाने वाले शोषण से भी बच जाते हैं।

स्टांप ड्यूटी : प्रत्येक राज्य के अनुसार स्टांप ड्यूटी अलग-अलग होती है। कुछ मामलों में जहां यह जमीन की कीमतों के आधार पर लगाई जाती है, तो कुछ मामलों में यह जमीन की पूरी कीमत और बिल्डिंग के आधार पर लगाई जाती है। वहीं कुछ मामलों में अथॉरिटी द्वारा कुछ न्यूनतम दाम फिक्स कर दिए जाते हैं।

एग्रीमेंट में जानकारियां : दोनों पक्षों को कीमत पर सहमत होना चाहिए। एग्रीमेंट में पेमेंट टर्म, पेमेंट चेक या ड्राफ्ट किस माध्यम से किया गया है, आदि जानकारियां होती हैं। यह जांच लेना चाहिए कि खरीदार और बेचने वाले के बीच होने वाला एग्रीमेंट पूरी तरह से निष्पक्ष हो। इसमें किसी भी तरह के फाइन प्रिंट से बचने की जरूरत है। साथ ही खरीदार को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जो मोल-भाव मौखिक तौर पर हुआ है, उसका जिक्र एग्रीमेंट में किया गया हो।

अंतिम एग्रीमेंट : सेल डीड महज प्रारंभिक अनुबंध होता है। रजिस्ट्रेशन से पहले अंतिम सेल डीड तैयार की जाती है। अगर आपने अपार्टमेंट खरीदा है, तो रजिस्टर्ड किया जाता है कि जिस जमीन पर वह बना है, उसके कौन से आनुपातिक हिस्से को आपने खरीदा है।

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