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काम की सार्थकता

स्टीफन मिल्स ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘यदि आप सब कुछ छोड़-छाड़ कर बाहर निकल जाना चाहते हैं, तो ऐसा कर ही डालिए। लेकिन जब तक आप ऐसा न करें, तब तक अपने समय को सार्थक बनाना जरूर सुनिश्चित करें।’ बेशक। मिसाल के तौर पर, अगर आप एक बार हिमालय घूमने जाएं, तो जीवन को देखने का आपका नजरिया ही बदल सकता है।

वहां जाने के बाद धैर्य और शांति से सोचने पर आपको लगेगा कि कैसे आपने रोज-रोज एक सा काम करके, अपने जीवन को इतना एकरस बना लिया है कि अपनी खुशी ही कुर्बान कर दी। ज़रा सोचिए, क्या जो कुछ आप कर रहे हैं, वही जीवन का सर्वोत्तम काम है? अपने संतोष की क्या कोई अहमियत नहीं है? कहीं ऐसा तो नहीं कि दस साल बाद आप पीछे मुड़कर देखें, और आपको बहुत कुछ खो देने का एहसास हो? इससे बचने के तरीके ये हैं-

- जीवन के हर पड़ाव पर अपनी कामयाबियों को नोट करते चलें, और इन्हें खास बनाने वाले कारणों को भी दर्ज करें। कामयाबी के इस एहसास से आपको आगे काम करने में और भी ज्यादा मज़ा आएगा।

- अगर आपको अभी तक अपनी यूएसपी (खासियत) का पता ही नहीं है, तो थोड़ा समय निकाल कर इसे खोज निकालिए। अपनी इन विशिष्टताओं का इस्तेमाल आप अपने जॉब में तो कर ही सकते हैं, इससे आप ऐसे करियर की पहचान भी कर सकते हैं, जिसमें आपकी परफॉर्मेस गजब ढा सकती है। 

- असरदार नेटवर्क से आप अच्छे से अच्छा जॉब तो हासिल कार सकते हैं, लेकिन ये  परिवार, मित्र और रिश्तेदारों के साथ आपके आपसी संबंध ही हैं, जो आपके काम और कामयाबी को सही मायने में सार्थक बनाते हैं।

- परिवर्तन प्रकृति का नियम है, और इससे बचना बेवकूफी। इसलिए अपने आप पर भरोसा रखें और समय के साथ स्वयं में बदलाव लाते हुए आगे बढ़ते जाएं।

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