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जानवरों के आशियाने पर लैंटाना का हमला

पश्चिमी वृत्त के दो लाख हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को आक्रमणकारी प्रजाति की लैंटाना झाड़ियों ने अपने आगोश में ले लिया है। तराई के इसी वन क्षेत्र में घास के वह मैदान हैं जो हाथी, चीतल, गुलदार और नील गाय के प्राकृतवास हैं। इन मैदानों के लैंटाना से घिर जाने का ही असर है कि आदमी और वन्य जीव-जंतुओं का संघर्ष बढ़ गया है। जानवर उनकी खेती को चट कर रहे हैं।

जंगलात कितने दावे करे कि प्रदेश में उसका फॉरेस्ट कवर 65 फीसदी है पर इसके एक फीसदी हिस्से को लैंटाना घास ने अपने आगोश में ले लिया है। इस प्रजाति का दुगरुण यह है कि इसके नीचे कोई भी चारा प्रजाति नहीं उगती। जिस तराई क्षेत्र का वन कभी अच्छे घास के मैदानों के लिए जाना जाता था वहां लैंटाना झाड़ी ने आक्रमण कर अपने पांव पसार लिये हैं।

पश्चिमी वृत्त के तराई केंद्रीय वन प्रभाग, तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी वन प्रभाग, रामनगर वन प्रभाग और तराई पश्चिमी वन प्रभाग में तकरीबन दो लाख हेक्टेयर जंगल को लैंटाना ने घेर लिया है। इसमें तराई के लैंटाना के वह घास के मैदान एकदम ढक दिए हैं जिनमें वन्य जीवों की एक पूरी श्रृंखला पनपती थी।

प्रभागीय वनाधिकारी डॉ.पराग मधुकर धकाते का कहना है कि इसी का नतीजा है कि हाथी, जंगली सुअर, गुलदार और नील गाय तराई में जंगल से सटे आबादी क्षेत्रों की फसल चौपट कर रहे हैं और कभी-कभी गुलदार भोजन के लिए आदमी को भी अपना निवाला बना रहे हैं।

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  • Web Title:जानवरों के आशियाने पर लैंटाना का हमला