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बंद के पहले दिन नक्सलियों का तांडव

दो दिनी बंदी के पहले दिन नक्सलियों ने राज्य के अलग-अलग स्थानों पर जमकर तांडव किया। 2009 में 47वें दिन बंदी के दौरान सड़क मार्ग और रेल लाइनें नक्सलियों निशाने पर रहे। पूरे राज्य में लंबी दूरी की बसें नहीं चलीं। छोटी गाड़ियों का परिचालन भी प्रभावित रहा। राज्य की आधी आबादी घरों में कैद रही। लगभग एक सौ करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ। खदानों से ढुलाई ठप रही।

बंद के दौरान घटनाएं

रविवार 12 बजे रात से बंदी के शुरू होते ही नक्सलियों ने सबसे पहले जीटी रोड को टारगेट किया। तोपचांची तथा इसरी में चार ट्रकों को फूंक डाला। वहीं बसों को लक्ष्य कर फायरिंग भी की, जिससे तीन यात्राी जख्मी हो गए। इससे जीटी रोड पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया, जो सोमवार की सुबह 10 बजे सामान्य हुआ। नक्सलियों ने आधी रात में गोमिया-विष्णुगढ़ सड़क मार्ग को सदारो जंगल के निकट लैंड माइंस विस्फोट से क्षतिग्रस्त कर दिया।

जरकुंडा के निकट पेड़ों को काटकर सड़क पर डाल यातायात को घंटों बाधित किया। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर थाना क्षेत्र में माकपा नेता के घर नक्सलियों ने धावा बोला। नेता के नहीं मिलने पर उनके रिश्तेदार चंद्रशेखर को गोली मार दी और घर में आग लगी दी।

वहीं पलामू के छतरपुर में विश्रमपुर रोड पर बागामाड़ा पुलिया के दोनो ओर सड़क को नक्सलियों ने खोदकर आवागमन ठप कर दिया है। उधर, धनबाद रेलमंडल के सीआइसी सेक्शन के बोकारो-जारंगडीह के बरूआबेड़ा में विस्फोट कर रेल ट्रैक क्षतिग्रस्त कर दिया। इस ट्रैक से गुजर रही लाइट इंजन दुर्घटनाग्रस्त हो गयी।

सड़क-रेल परिवहन पर व्यापक असर

धनबाद रेल मंडल के सीनियर पीआरओ अमरेंद्र कुमार दास ने बताया कि सीआइसी सेक्शन में लोडिंग पूरी तरह ठप है। इससे एक दिन में दस करोड़ रुपये से भी अधिक का नुकसान रेलवे को उठाना पड़ा। सीआइसी सेक्शन पर ट्रेनों के चलने, रद्द करने व मार्ग परिवर्तन को लेकर कोई फैसला नहीं लिया जा सका है। वहीं राज्य में सात हजार बसें, 50 हजार ट्रकें और 20 हजार ट्रेकर-जीप और अन्य छोटी गाड़िया नहीं चलीं।
व्यवसाय भी हुआ प्रभावित

नक्सली बंदी से लगभग 100 करोड़ की क्षति का अनुमान है। दीपावली और धनतेरस बाजार फीका रहा। बाजार में दूर-दराज से आनेवाले ग्राहकों के नहीं आने से व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ा। वहीं कोयला, बॉक्साइट से लेकर अन्य खनिजों का परिवहन ठप रहने से भी भारी आर्थिक क्षति हुई है।
आधी आबादी घरों में कैद

राज्य की पौने तीन करोड़ की आबादी में से आधी बंदी से घरों में कैद रही। खासकर ग्रामीण इलाका सर्वाधिक प्रभावित रहा। शहरी क्षेत्रों में भी इसका असर पड़ा। रोज कमाने खानेवाले लगभग एक लाख लोगों को भूखे सोना पड़ा।

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